वाशिंगटन (Action Bharat) | अमेरिका ने H-1B वीजा से जुड़े कड़े नियमों को एक और साल के लिए जारी रखने का फैसला किया है। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के प्रशासन ने सितंबर 2025 में लागू किए गए प्रतिबंधों को 21 सितंबर 2027 तक बढ़ा दिया है। इसके तहत दायरे में आने वाले कुछ विदेशी पेशेवरों के लिए 1 लाख डॉलर का अनिवार्य भुगतान प्रमुख शर्त है।
इस फैसले का असर खास तौर पर उन भारतीय इंजीनियरों, सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और अन्य तकनीकी पेशेवरों पर पड़ सकता है, जो अमेरिका में H-1B वीजा के जरिए रोजगार हासिल करना चाहते हैं। उपलब्ध अमेरिकी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारतीय उम्मीदवार H-1B स्वीकृतियों में सबसे बड़ा हिस्सा रखते हैं।
क्या है 1 लाख डॉलर फीस का नियम?
नए निर्देश के तहत दायरे में आने वाले विदेशी कर्मचारी तब तक अमेरिका में प्रवेश नहीं कर सकते, जब तक संबंधित कंपनी की याचिका में 1,00,000 डॉलर का भुगतान शामिल न हो।
स्रोत के अनुसार यह शर्त उन कर्मचारियों पर लागू होती है जो अमेरिका के बाहर स्थित हैं और 21 सितंबर 2026 के बाद अमेरिका की यात्रा करने का प्रयास करते हैं।
हालांकि, यह नियम सभी विदेशी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू नहीं होता। होमलैंड सिक्योरिटी सचिव के पास कुछ मामलों में छूट देने का विवेकाधिकार बना हुआ है।
राष्ट्रीय हित में छूट देने का प्रावधान
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, होमलैंड सिक्योरिटी सचिव किसी व्यक्तिगत कर्मचारी, कॉर्पोरेट कार्यबल या पूरे व्यावसायिक क्षेत्र को इस भुगतान की शर्त से छूट दे सकते हैं।
इसके लिए यह प्रमाणित किया जाना जरूरी होगा कि संबंधित रोजगार अमेरिकी राष्ट्रीय हित के लिए महत्वपूर्ण है और उससे राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक कल्याण को खतरा नहीं है।
सरकार ने H-1B सिस्टम में दुरुपयोग का लगाया आरोप
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि कुछ थर्ड-पार्टी स्टाफिंग एजेंसियों और IT आउटसोर्सिंग कंपनियों ने लंबे समय तक H-1B व्यवस्था का इस्तेमाल अपेक्षाकृत सस्ते विदेशी श्रम के जरिए अमेरिकी कर्मचारियों को प्रतिस्थापित करने के लिए किया।
सरकार के अनुसार, H-1B कार्यक्रम मूल रूप से अमेरिका में उच्च-कुशल अस्थायी श्रमिकों को लाने के लिए बनाया गया था, लेकिन कुछ नियोक्ताओं ने कम वेतन वाले श्रमिकों के जरिए इसका दुरुपयोग किया।
भारतीयों पर क्यों पड़ सकता है बड़ा असर?
H-1B कार्यक्रम में भारतीय पेशेवरों की हिस्सेदारी काफी बड़ी है। स्रोत में दिए गए USCIS FY2025 के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय उम्मीदवारों को सभी स्वीकृत H-1B याचिकाओं में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा मिला था।
चीन दूसरे स्थान पर था, जिसकी हिस्सेदारी 12.1 प्रतिशत बताई गई है।
इस वजह से H-1B नियमों में लागत और प्रक्रिया से जुड़े बदलावों का असर भारतीय सॉफ्टवेयर डेवलपर्स, इंजीनियरों और अन्य तकनीकी कर्मचारियों पर विशेष रूप से पड़ सकता है।
पहले कितनी फीस देनी पड़ती थी?
स्रोत के मुताबिक, पुरानी व्यवस्था में कंपनियों को प्रति आवेदक लगभग 995 डॉलर का भुगतान करना पड़ता था। इसमें—
- 215 डॉलर लॉटरी एंट्री फीस
- 780 डॉलर नियोक्ता याचिका शुल्क
शामिल थे।
नई 1 लाख डॉलर की भुगतान आवश्यकता इससे काफी अधिक है। स्रोत इसे लागत में 10,000 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के रूप में बताता है।
कंपनियों की भर्ती रणनीति पर पड़ सकता है असर
इतनी बड़ी वित्तीय बाधा के कारण अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशों से कर्मचारियों को H-1B के जरिए नियुक्त करना महंगा हो सकता है।
स्रोत में उद्योग विश्लेषकों के हवाले से संभावना जताई गई है कि कंपनियां अपने H-1B आवेदनों की संख्या कम कर सकती हैं। इसका असर खास तौर पर शुरुआती करियर वाले और जूनियर तकनीकी कर्मचारियों पर पड़ सकता है।
वहीं, उच्च तकनीकी विशेषज्ञता वाले वरिष्ठ पेशेवरों के मामले में कंपनियां अधिक लागत वहन करने पर विचार कर सकती हैं।
सभी विदेशी कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा नियम
स्रोत के मुताबिक, यह प्रतिबंध अमेरिका में काम करने वाले हर विदेशी कर्मचारी या किसी पूरे उद्योग के सभी विदेशी कर्मचारियों पर स्वतः लागू नहीं होगा।
राष्ट्रीय हित और सुरक्षा से जुड़े मानदंडों के आधार पर होमलैंड सिक्योरिटी सचिव को छूट देने का अधिकार दिया गया है।
H-1B कर्मचारियों के लिए यात्रा भी महत्वपूर्ण मुद्दा
पिछले वर्ष नियमों में बदलाव के समय बड़ी टेक कंपनियों ने अपने H-1B कर्मचारियों को तत्काल यात्रा संबंधी सलाह जारी की थी। विदेश यात्रा पर गए कर्मचारियों को अमेरिका लौटने से जुड़े नए नियमों के कारण चिंता का सामना करना पड़ा था।
स्रोत के अनुसार, Amazon, Microsoft और JPMorgan जैसे प्रमुख नियोक्ताओं ने अपने कर्मचारियों को नियम लागू होने से पहले अमेरिका लौटने या देश में ही रहने की सलाह दी थी।
H-1B नियम की प्रमुख बातें
- नई समयसीमा: 21 सितंबर 2027 तक नियम जारी रहने की बात।
- भुगतान: दायरे में आने वाले मामलों में 1 लाख डॉलर।
- भारतीय हिस्सेदारी: FY2025 में स्वीकृत H-1B याचिकाओं में लगभग 70 प्रतिशत।
- चीन की हिस्सेदारी: करीब 12.1 प्रतिशत।
- पुरानी फीस: लगभग 995 डॉलर।
- छूट: राष्ट्रीय हित और सुरक्षा से जुड़े मामलों में होमलैंड सिक्योरिटी सचिव के पास विवेकाधिकार।
- संभावित प्रभाव: विदेशी कर्मचारियों की भर्ती की लागत बढ़ना और कंपनियों द्वारा H-1B भर्ती रणनीति पर पुनर्विचार।
Action Bharat | World & Business Desk
