नई दिल्ली (Action Bharat) | पितृ पक्ष के दौरान गया की फल्गु नदी के तट पर पिंडदान और तर्पण का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता सीता ने भी इसी स्थान पर राजा दशरथ का पिंडदान किया था।
वनवास के दौरान गया पहुंचे थे श्रीराम
प्रस्तुत कथा के अनुसार, वनवास के समय भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण गया पहुंचे थे। उस समय पितृ पक्ष चल रहा था। वहां एक ब्राह्मण ने उन्हें श्राद्ध के लिए आवश्यक सामग्री जुटाने को कहा। इसके बाद श्रीराम और लक्ष्मण सामग्री लेने चले गए, लेकिन उन्हें लौटने में देर हो गई।
माता सीता ने बालू से बनाए पिंड
जब पिंडदान का समय निकलने लगा तो ब्राह्मण ने माता सीता से ही पिंडदान करने का आग्रह किया। कथा के अनुसार, इसी दौरान राजा दशरथ ने माता सीता को दिव्य रूप में दर्शन दिए और पिंडदान करने के लिए कहा।
इसके बाद माता सीता ने फल्गु नदी के तट पर बालू से पिंड बनाए और विधिपूर्वक पिंडदान किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पिंडदान से राजा दशरथ की आत्मा तृप्त हुई।
फल्गु नदी का इतना महत्व क्यों?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गया में फल्गु नदी के तट पर पिंडदान और तर्पण करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान यहां पूर्वजों के लिए किए गए श्राद्ध कर्म से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
26 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष
उपलब्ध सामग्री के अनुसार, पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत 26 सितंबर से होगी और इसका समापन 10 अक्टूबर को होगा।
नोट: माता सीता द्वारा राजा दशरथ के पिंडदान की कथा धार्मिक परंपरा और मान्यताओं के संदर्भ में प्रस्तुत की जाती है।
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