यमुना के पानी में अगस्त में सुधार, फिर भी 5 जगह मानक से ज्यादा मल-कोलीफार्म; ISBT पर BOD सबसे अधिक

दिल्ली

नई दिल्ली (Action Bharat) | दिल्ली में यमुना नदी के पानी की गुणवत्ता में जुलाई के मुकाबले अगस्त में सुधार दर्ज किया गया है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के आंकड़ों के अनुसार, कई निगरानी स्थलों पर मल-कोलीफार्म के स्तर में बड़ी गिरावट आई है। हालांकि, पांच स्थानों पर इसका स्तर अब भी निर्धारित सीमा से ऊपर रहा।

पांच स्थानों पर मल-कोलीफार्म मानक से ऊपर

मल-कोलीफार्म की अधिकतम स्वीकार्य सीमा 2,500 MPN/100 मिलीलीटर निर्धारित है। अगस्त में पल्ला और वजीराबाद को छोड़कर बाकी पांच निगरानी स्थलों पर यह स्तर इस सीमा से अधिक रहा।

अगस्त के आंकड़े इस प्रकार रहे:

  • पल्ला: 1,400
  • वजीराबाद: 1,100
  • ISBT पुल: 35,000
  • ITO पुल: 17,000
  • निजामुद्दीन पुल: 13,000
  • ओखला बैराज: 23,000
  • असगरपुर: 36,000 MPN/100 मिलीलीटर

इन आंकड़ों में जुलाई की तुलना में कई स्थानों पर बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। उदाहरण के लिए ISBT पुल पर मल-कोलीफार्म जुलाई के 1,70,000 से घटकर अगस्त में 35,000 और निजामुद्दीन पुल पर 1,30,000 से घटकर 13,000 रहा।

BOD में भी सुधार, लेकिन ISBT पर सबसे ज्यादा

यमुना में जैव-रासायनिक ऑक्सीजन मांग (BOD) में भी सुधार दर्ज किया गया, लेकिन प्रदूषण की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

  • अगस्त में BOD 3 से 28 मिलीग्राम प्रति लीटर के बीच रहा।
  • निर्धारित अधिकतम सीमा 3 मिलीग्राम प्रति लीटर है।
  • ISBT पुल पर BOD सबसे अधिक 28 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया।

इसका मतलब है कि कई निगरानी स्थलों पर नदी के पानी में जैविक प्रदूषण अभी भी निर्धारित सीमा से काफी ऊपर है।

बारिश और सीवर के असर से जुड़ी संभावना

DPCC के अनुसार, अगस्त में मल-कोलीफार्म में कमी का एक संभावित कारण नदी में पहुंचने वाले बिना उपचारित सीवर की मात्रा में कमी हो सकता है। वहीं, बारिश ने भी नदी के पानी को पतला करने और गुणवत्ता में अस्थायी सुधार लाने में भूमिका निभाई हो सकती है।

नालों का प्रदूषित पानी अब भी बड़ी चिंता

DPCC ने अगस्त में दिल्ली के प्रमुख नालों के अपशिष्ट जल के आंकड़े भी जारी किए। रिपोर्ट के अनुसार, यमुना में सीधे गिरने वाले कई नालों और नजफगढ़ नाले से जुड़े सहायक नालों के पानी में BOD और कुल निलंबित ठोस पदार्थ (TSS) का स्तर काफी अधिक पाया गया।

इससे संकेत मिलता है कि यमुना में पहुंचने वाले नालों के प्रदूषण को नियंत्रित करना नदी की जल गुणवत्ता में सुधार के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।

सात स्थानों से लिए जाते हैं पानी के नमूने

DPCC दिल्ली में यमुना के सात निगरानी स्थानों से पानी के नमूने लेकर विभिन्न मानकों की जांच करता है। इनमें शामिल हैं:

  • पल्ला
  • वजीराबाद
  • ISBT पुल
  • ITO पुल
  • निजामुद्दीन पुल
  • ओखला बैराज
  • असगरपुर (किडवली), हरियाणा

इन नमूनों में BOD, घुलित ऑक्सीजन, रासायनिक ऑक्सीजन मांग, pH और मल-कोलीफार्म समेत कई मानकों की जांच की जाती है।

आंकड़ों से क्या तस्वीर सामने आती है?

अगस्त में यमुना के पानी में जुलाई की तुलना में कई स्थानों पर सुधार जरूर दर्ज हुआ, लेकिन पांच निगरानी स्थलों पर मल-कोलीफार्म और कई स्थानों पर BOD अभी भी निर्धारित मानकों से ऊपर रहा। साथ ही नालों के अपशिष्ट जल की गुणवत्ता भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए चुनौती बनी हुई है।

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