ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों के लिए वीजा नियमों में सख्ती, योग शिक्षकों को लेकर भी विवाद

विदेश

कैनबरा (Action Bharat) | ऑस्ट्रेलिया में इमिग्रेशन और वीजा नियमों को लेकर बहस तेज हो गई है। सरकार का फोकस अंतरराष्ट्रीय छात्रों, अस्थायी वीजा और ‘वीजा हॉपिंग’ पर नियंत्रण को लेकर है। इसी बीच विपक्ष के उस दावे पर भी विवाद सामने आया है, जिसमें कहा गया कि सरकार निर्माण श्रमिकों की तुलना में अधिक योग शिक्षकों को ऑस्ट्रेलिया ला रही है।

निर्माण श्रमिकों को मिले 15 हजार वीजा

ऑस्ट्रेलिया के इमिग्रेशन और गृह मामलों के मंत्री टोनी बर्क ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले वित्त वर्ष में करीब 15,000 निर्माण श्रमिकों को वीजा दिया गया, जो पिछली बार की तुलना में लगभग तीन गुना है।

वहीं, मौजूदा सरकार ने अब तक किसी योग शिक्षक को वीजा नहीं दिया है। योग शिक्षकों का उल्लेख उस व्यावसायिक सूची में है, जो भारत के साथ पहले हुए व्यापारिक समझौते से जुड़ी है। इसके तहत सालाना 1,800 योग शिक्षकों और शेफ को अस्थायी वीजा देने का प्रावधान बताया गया है।

‘वीजा हॉपिंग’ पर सरकार का फोकस

सरकार अंतरराष्ट्रीय छात्रों द्वारा बार-बार वीजा और कोर्स बदलकर ऑस्ट्रेलिया में लंबे समय तक रहने की प्रवृत्ति को लेकर भी नियम कड़े करने की तैयारी में है।

सरकार के अनुसार पढ़ाई पूरी करने के बाद काम का अनुभव हासिल करना और पात्रता के आधार पर स्थायी निवास की ओर बढ़ना अलग बात है। चिंता उन मामलों को लेकर है, जहां छात्र केवल ऑस्ट्रेलिया में रुकने के लिए बार-बार समान स्तर के अलग-अलग कोर्स में दाखिला लेते हैं।

प्रस्तावित व्यवस्था में छात्रों को अपनी शैक्षणिक योग्यता का स्तर आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, जैसे बैचलर के बाद मास्टर डिग्री करना।

परिवार को साथ लाने के नियम भी सख्त

प्रस्तावित बदलावों के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों और ग्रेजुएट वीजा धारकों के लिए परिवार के सदस्यों को ऑस्ट्रेलिया लाना मुश्किल हो सकता है।

हालांकि, जो परिवार पहले से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं, उन्हें अलग नहीं किया जाएगा। पीएचडी छात्रों और कुछ देशों के छात्रों के लिए प्रस्तावित नियमों में छूट का उल्लेख किया गया है।

भारतीय छात्रों पर क्यों पड़ेगा असर?

2026 के शुरुआती पांच महीनों के आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों में भारतीय छात्रों की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत बताई गई है। चीन के बाद भारत ऑस्ट्रेलिया के लिए विदेशी छात्रों का दूसरा बड़ा स्रोत है।

ऐसे में वीजा नियमों में प्रस्तावित सख्ती का असर ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई की योजना बना रहे भारतीय छात्रों पर भी पड़ सकता है।

Action Bharat | World Desk

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