नई दिल्ली (Action Bharat) | चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी सवाल किया कि देश की राजनीति में आम तौर पर दिखाई देने वाली सत्ता-विरोधी लहर यानी एंटी-इनकंबेंसी भारतीय जनता पार्टी की सरकारों के खिलाफ हाल के चुनावों में प्रभावी क्यों नहीं दिखाई दे रही है।
राहुल गांधी के इन दावों पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस के विभिन्न राज्यों में चुनावी प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे समय तक सत्ता से बाहर रहने का उदाहरण कांग्रेस के मामले में भी मौजूद है।
राहुल गांधी ने उठाया एंटी-इनकंबेंसी का सवाल
स्रोत के अनुसार, राहुल गांधी ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चुनाव आयोग और मतदाता सूची के SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच एंटी-इनकंबेंसी पर सवाल उठाया।
उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय राजनीति में सत्ता में रहने वाली सरकारों के खिलाफ समय के साथ सत्ता-विरोधी भावना देखने को मिलती रही है, लेकिन हाल के चुनावों में भाजपा के संदर्भ में यह प्रभाव क्यों नहीं दिखाई दे रहा है, इस पर सवाल उठना चाहिए।
अन्य रिपोर्टों के अनुसार, राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा ने उनके इन आरोपों को खारिज किया है।
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के चुनावी इतिहास का दिया हवाला
भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के तर्क का जवाब देते हुए तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में कांग्रेस के लंबे समय से सत्ता में नहीं लौटने का उल्लेख किया।
त्रिवेदी के अनुसार:
- तमिलनाडु में 1967 के बाद कांग्रेस की सरकार नहीं बनी।
- पश्चिम बंगाल में 1977 के बाद कांग्रेस सत्ता में नहीं लौटी।
- बिहार में 1990 के बाद कांग्रेस की सरकार नहीं बनी।
- उत्तर प्रदेश में 1989 के बाद कांग्रेस सत्ता में नहीं लौटी।
- ओडिशा में 1999 के बाद कांग्रेस की सरकार नहीं बनी।
इन ऐतिहासिक चुनावी आंकड़ों का उल्लेख भाजपा ने यह तर्क देने के लिए किया कि सत्ता-विरोधी राजनीति का प्रभाव केवल भाजपा के संदर्भ में देखने के बजाय अलग-अलग दलों के चुनावी इतिहास के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। इसी तरह की जानकारी की पुष्टि अन्य रिपोर्टों में भी की गई है।
राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर भी टिप्पणी
बहस के दौरान सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी की राजनीतिक समझ और भारतीय चुनावी इतिहास की उनकी व्याख्या पर भी सवाल उठाए। स्रोत में त्रिवेदी की ओर से राहुल गांधी के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी का उल्लेख है।
इस तरह विवाद केवल एंटी-इनकंबेंसी के सवाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों पक्षों के बीच चुनावी इतिहास और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले।
SIR को लेकर क्या है विवाद?
मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर भी राजनीतिक विवाद जारी है। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां उठाई हैं। वहीं भाजपा ने उनके आरोपों को खारिज करते हुए SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसलों का बचाव किया है।
रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयोग के भीतर SIR प्रक्रिया को लेकर दो चुनाव आयुक्तों द्वारा आपत्तियां उठाए जाने की खबरों के बाद यह मुद्दा और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, इन आंतरिक मतभेदों और प्रक्रिया से जुड़े दावों पर अलग-अलग पक्षों की अलग-अलग व्याख्याएं सामने आई हैं।
चुनावी आंकड़ों और राजनीतिक दावों के बीच बहस
इस पूरे विवाद में एक तरफ राहुल गांधी चुनावी प्रक्रिया, SIR और एंटी-इनकंबेंसी को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि भाजपा कांग्रेस के ऐतिहासिक चुनावी प्रदर्शन को सामने रखकर उनके तर्क का जवाब दे रही है।
तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में कांग्रेस के सत्ता में लौटने की तारीखों को लेकर दिए गए आंकड़े ऐतिहासिक चुनावी रिकॉर्ड से संबंधित हैं। वहीं चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर लगाए गए राजनीतिक आरोपों का मूल्यांकन संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना है।
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