नई दिल्ली, Action Bharat | सर्दियों के मौसम में खुले में कचरा जलाने की समस्या और गंभीर हो जाती है। वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (WRI) इंडिया के एक जमीनी अध्ययन के मुताबिक, गर्मियों की तुलना में सर्दियों में खुले में कचरा जलाने की घटनाएं और उनसे होने वाला प्रदूषण करीब तीन गुना बढ़ जाता है।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि निम्न सामाजिक-आर्थिक स्थिति वाले इलाकों में यह समस्या ज्यादा गंभीर है। टियर-2 शहरों के ऐसे इलाकों में सर्दियों के दौरान एक वर्ग किलोमीटर के दायरे में रोजाना 84 तक कचरा जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं।
11 शहरों में किया गया अध्ययन
WRI इंडिया ने वर्ष 2019 से 2026 के बीच 11 शहरों में यह अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने तय मार्गों पर पैदल और वाहनों से जाकर खुले में कचरा जलाने की घटनाओं का प्रत्यक्ष सर्वेक्षण किया।
इस दौरान जलाए जा रहे कचरे की मात्रा, उसकी संरचना और उससे निकलने वाले PM2.5 और PM10 प्रदूषकों के उत्सर्जन का आकलन किया गया। अध्ययन के लिए शहरों को आबादी के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया।
छोटे शहरों में प्रति व्यक्ति प्रदूषण ज्यादा
अध्ययन का एक अहम निष्कर्ष यह है कि टियर-2 शहरों में कुल जलाए जाने वाले कचरे की मात्रा अधिक पाई गई, जबकि टियर-3 यानी छोटे शहरों में कचरा जलाने की घटनाओं का घनत्व और प्रति व्यक्ति उत्सर्जन ज्यादा रहा।
इसका मतलब है कि छोटे शहरों में भले ही कचरे के ढेर अपेक्षाकृत छोटे हों, लेकिन वहां खुले में कचरा जलाने का प्रति व्यक्ति प्रदूषणकारी प्रभाव अधिक हो सकता है।
प्लास्टिक और कागज बड़ी चिंता
अध्ययन के मुताबिक, खुले में जलाए जाने वाले कचरे में प्लास्टिक और कागज की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। दोनों मिलकर जलाए जाने वाली सामग्री का करीब 25 प्रतिशत तक हिस्सा पाए गए।
WRI के अनुसार, यह स्थिति कचरे को स्रोत पर अलग-अलग करने और उसके उचित संग्रहण की व्यवस्था में मौजूद कमियों की ओर भी संकेत करती है।
कहीं मच्छर, कहीं कचरा संग्रहण की कमी वजह
अध्ययन में कचरा जलाने के कारण शहरों के आकार के हिसाब से अलग-अलग पाए गए। छोटे शहरों में मच्छरों से बचने के लिए कचरा जलाना एक प्रमुख कारण रहा।
वहीं बड़े और मध्यम शहरों में कचरा संग्रहण व्यवस्था की कमी तथा निर्धारित कलेक्शन जोन के बाहर फेंके गए कचरे को जलाना प्रमुख कारणों में शामिल रहा।
कई शहरों में घर-घर कचरा संग्रहण की अनियमितता, कम संग्रहण आवृत्ति, खराब कचरा वाहनों और कचरे को अलग-अलग रखने के लिए पर्याप्त जगह की कमी जैसी समस्याएं भी सामने आईं।
बड़े शहरों में निगरानी, छोटे शहरों में जागरूकता की जरूरत
WRI इंडिया ने टियर-1 और टियर-2 शहरों में नगर निकायों की कचरा प्रबंधन व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही मजबूत करने की जरूरत बताई है।
वहीं टियर-3 शहरों में वैज्ञानिक तरीके से मच्छर नियंत्रण और जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया है।
अध्ययन में टियर-2 और टियर-3 शहरों में बगीचे के कचरे तथा बड़ी मात्रा में निकलने वाले कचरे के लिए अलग संग्रहण व्यवस्था विकसित करने की भी जरूरत बताई गई है।
खुले में कचरा जलाने से निकलने वाला धुआं स्थानीय वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में सर्दियों से पहले कचरा संग्रहण, पृथक्करण और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना प्रदूषण नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।
