क्रिप्टोकरेंसी पर सतर्क रुख, ब्लॉकचेन तकनीक और टोकन व्यवस्था को बढ़ावा: RBI गवर्नर

कारोबार

नई दिल्ली (Action Bharat) | भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि भारत क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सतर्क है, लेकिन इससे जुड़ी बुनियादी तकनीकों और नवाचार को बढ़ावा दे रहा है। इनमें डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) और टोकन व्यवस्था शामिल हैं।

कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में बोलते हुए मल्होत्रा ने कहा कि क्रिप्टो परिसंपत्तियों से जुड़ी तकनीकों में नवाचार का समर्थन किया जा रहा है। हालांकि, मौद्रिक संप्रभुता, मौद्रिक नीति और पूंजी प्रवाह पर संभावित प्रभावों को देखते हुए क्रिप्टोकरेंसी के मामले में सतर्कता बरती जा रही है।

तकनीक को बढ़ावा, क्रिप्टो पर सतर्कता

आरबीआई गवर्नर के अनुसार, भारत का दृष्टिकोण बुनियादी तकनीकों को प्रोत्साहित करने का रहा है। केंद्रीय बैंक इनमें से कुछ तकनीकों का इस्तेमाल अपने स्तर पर और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से भी कर रहा है।

डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी ऐसी डिजिटल व्यवस्था है, जिसमें लेनदेन या रिकॉर्ड किसी एक केंद्रीय स्थान पर रखने के बजाय नेटवर्क के कई कंप्यूटरों पर साझा किए जाते हैं। वहीं, टोकनाइजेशन में किसी संपत्ति या संवेदनशील जानकारी को डिजिटल टोकन के रूप में दर्शाया जाता है।

मौद्रिक नीति और पूंजी प्रवाह को लेकर चिंता

मल्होत्रा ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी से मुद्रा की एकरूपता और मौद्रिक नीति पर असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव खास तौर पर उन उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, जहां पूंजी प्रवाह पर प्रतिबंध लागू हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में घरेलू भुगतान व्यवस्था पहले ही तेज, सस्ती और सुविधाजनक हो चुकी है। इसलिए बड़ी चुनौती सीमा पार भुगतान को अधिक कुशल बनाना है। इस दिशा में केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) समेत अन्य विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

बॉन्ड प्रतिफल और बढ़ते खर्च पर भी बात

आरबीआई गवर्नर ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते सार्वजनिक ऋण और बॉन्ड प्रतिफल दरों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, बॉन्ड प्रतिफल में बदलाव मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति पर निर्भर करता है। सरकार और निजी क्षेत्र का खर्च बढ़ रहा है, जिसमें कृत्रिम मेधा (AI) से जुड़ा खर्च भी शामिल है।

मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई की मौद्रिक नीति मुख्य रूप से घरेलू आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति पर केंद्रित रहती है। हालांकि, वैश्विक ब्याज दरों का असर भारत की वास्तविक ब्याज दरों पर भी पड़ता है।

#RBI #SanjayMalhotra #Cryptocurrency #Blockchain #Tokenisation #CBDC #Economy #ActionBharat

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *