खाड़ी देशों में नौकरी के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, बिहार में फर्जी एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट बनाने वाला गिरोह पकड़ा गया

राज्य

पटना (Action Bharat) | खाड़ी देशों में नौकरी दिलाने के नाम पर बिहार की राजधानी पटना में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। वैशाली ट्रैवल्स कंसल्टेंसी सर्विस के जरिए ऐसे लोगों को विदेश भेजने की तैयारी की जा रही थी, जिनके पास तकनीकी काम का वास्तविक अनुभव नहीं था।

पुलिस के मुताबिक, अभ्यर्थियों को पहले दो-तीन दिन की ट्रेनिंग दी जाती थी और इसके बाद उनके लिए प्लंबर, फिटर, इलेक्ट्रीशियन और बिजली मिस्त्री जैसे कामों में पांच से छह साल का फर्जी अनुभव दिखाने वाले प्रमाणपत्र तैयार किए जाते थे।

118 पासपोर्ट समेत भारी मात्रा में सामान बरामद

गांधी मैदान थाना पुलिस ने एग्जीबिशन रोड स्थित चांदी व्यापार भवन की पांचवीं मंजिल पर कंसल्टेंसी के कार्यालय में छापेमारी की।

पुलिस ने वहां से—

  • 118 पासपोर्ट
  • फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र
  • फर्जी इंटरव्यू लेटर
  • पैथोलॉजी जांच की बुकलेट
  • 3 लैपटॉप और 1 CPU
  • 5 मोबाइल फोन
  • ₹1.44 लाख नकद
  • रियाल, दिरहम और अन्य विदेशी मुद्रा

बरामद की।

मामले में तनवीर आलम, शाहिद अनवर और तौसिफ आलम को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया है।

बड़ी कंपनियों के नाम पर बनाते थे फर्जी सर्टिफिकेट

जांच में सामने आया है कि गिरोह बरौनी पेट्रोकेमिकल और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) जैसी कंपनियों के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र तैयार करता था।

पुलिस को शक है कि गिरोह किसी अन्य नेटवर्क की मदद से कंपनियों के अधिकारियों के कथित हस्ताक्षर और मुहर वाले फर्जी प्रमाणपत्र भी तैयार करवाता था। जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में भी ऐसे कई प्रमाणपत्र मिलने की बात सामने आई है।

नाम-पता बदलकर भी तैयार करते थे दस्तावेज

जांच में यह भी पता चला है कि विदेश जाने के इच्छुक लोगों के नाम और पते में बदलाव करके अलग-अलग हार्ड कॉपी तैयार कराने की कोशिश की जाती थी। पुलिस अब इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है।

सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों से खाड़ी देशों में नौकरी का प्रचार कर युवाओं को कंसल्टेंसी कार्यालय बुलाया जाता था। जरूरी दस्तावेज नहीं होने पर उन्हें दस्तावेज तैयार कराने के नाम पर अलग-अलग शुल्क भी लिया जाता था।

118 पासपोर्ट की होगी जांच

पुलिस जब्त किए गए सभी पासपोर्ट का विवरण तैयार कर उनका सत्यापन कराएगी। रिपोर्ट पासपोर्ट कार्यालय भेजी जाएगी और संबंधित राज्यों की पुलिस के जरिए पासपोर्ट धारकों के पते का भी सत्यापन कराया जाएगा।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी प्रमाणपत्रों के पीछे पूरा नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें विदेश भेजने वाले अन्य एजेंटों की क्या भूमिका है।

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