भारत-अमेरिका FTA पर संशय? मार्को रूबियो के बयान से बदली तस्वीर, अमेरिका अब द्विपक्षीय समझौतों पर देगा जोर

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नई दिल्ली (Action Bharat) | भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में बड़े पैमाने पर फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का दौर खत्म हो सकता है। उनके बयान से अमेरिकी व्यापार नीति में संभावित बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

रूबियो ने कहा कि अमेरिका अब व्यापक FTA की बजाय द्विपक्षीय व्यापार समझौतों और पारस्परिक व्यापारिक व्यवस्थाओं को ज्यादा महत्व दे सकता है। हालांकि, उनके बयान से यह सीधे तौर पर स्पष्ट नहीं होता कि भारत-अमेरिका FTA वार्ता समाप्त हो गई है।

क्या अमेरिका FTA से पीछे हट रहा है?

आइसलैंड की विदेश मंत्री थोरगेरदुर कैट्रिन गुन्नार्सडाटिर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रूबियो से अमेरिका-आइसलैंड FTA को लेकर सवाल पूछा गया था। इसी दौरान उन्होंने व्यापक रूप से कहा कि आने वाले समय में FTA का दौर शायद समाप्त हो सकता है।

रूबियो ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी केवल आइसलैंड तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक अमेरिका के लिए भविष्य में दोनों देशों के बीच सीधे व्यापार समझौते, द्विपक्षीय व्यापार और पारस्परिक व्यापारिक समझ ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर क्या असर?

रूबियो का बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है और टैरिफ, कृषि तथा बाजार पहुंच जैसे मुद्दे अहम बने हुए हैं।

अमेरिका की ओर से FTA के बजाय द्विपक्षीय और पारस्परिक व्यापार व्यवस्था पर जोर दिए जाने की स्थिति में भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता का स्वरूप प्रभावित हो सकता है। हालांकि, फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि अमेरिका और भारत के बीच FTA की संभावनाएं पूरी तरह खत्म हो गई हैं।

अमेरिकी व्यापार नीति में बदलाव के संकेत

रूबियो की टिप्पणी से संकेत मिलता है कि वाशिंगटन अब बहुपक्षीय या व्यापक मुक्त व्यापार समझौतों की बजाय देश-दर-देश व्यापारिक समझौतों और पारस्परिकता पर ज्यादा जोर देना चाहता है।

अमेरिका की मौजूदा व्यापार नीति में टैरिफ और बाजार पहुंच के मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में भारत समेत कई देशों के साथ होने वाली व्यापार वार्ताओं में आने वाले समय में अमेरिकी रुख पर करीबी नजर रहेगी।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत-अमेरिका व्यापार समझौता पारंपरिक FTA के बजाय किसी नए द्विपक्षीय मॉडल के तहत आगे बढ़ेगा? रूबियो के बयान ने इस संभावना को लेकर नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।

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