नवरात्र में घट स्थापना के समय कलश पर क्यों बांधा जाता है कलावा? जानिए धार्मिक महत्व और मान्यता

धर्म-अध्यात्म

नई दिल्ली (Action Bharat) | शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की आराधना के साथ घट स्थापना यानी कलश स्थापना का विशेष महत्व माना जाता है। इस पूजा में कलश पर लाल या लाल-पीले रंग का पवित्र धागा, जिसे कलावा या मौली कहा जाता है, बांधने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह धागा पवित्रता, संकल्प, श्रद्धा और देवी-देवताओं के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

कलश पर कलावा क्यों बांधा जाता है?

हिंदू धार्मिक परंपरा में कलश को शुभता, समृद्धि और सृष्टि का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र में घट स्थापना के दौरान इसे विशेष पूजा सामग्री के साथ स्थापित किया जाता है। कलश पर कलावा बांधने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं।

1. पवित्रता और शुभता का प्रतीक

कलश पर कलावा बांधना पूजा की पवित्रता और धार्मिक परंपरा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक तरीका माना जाता है। इसे घट स्थापना की विधि का महत्वपूर्ण हिस्सा समझा जाता है।

2. देवी मां से रक्षा और आशीर्वाद की प्रार्थना

जिस प्रकार पूजा के समय कलाई पर कलावा बांधकर ईश्वर से रक्षा की प्रार्थना की जाती है, उसी प्रकार कलश पर मौली बांधना भी दैवीय संरक्षण और मंगल की कामना से जुड़ा है।

3. भक्त और ईश्वर के बीच आध्यात्मिक संबंध

धार्मिक मान्यता के अनुसार, कलावा भक्त के संकल्प और ईश्वर के प्रति समर्पण का प्रतीक है। कलश पर इसे बांधकर भक्त नवरात्र की पूजा श्रद्धा और नियमपूर्वक पूरी करने का संकल्प लेते हैं।

4. सुख-समृद्धि की कामना

कलश को शुभता और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इसके पूजन और कलावा बांधने की परंपरा के माध्यम से परिवार में सुख, शांति और खुशहाली की प्रार्थना की जाती है।

क्या कलश पर कलावा बांधने का संबंध नौ ग्रहों से भी है?

कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में कलश को नौ ग्रहों और ब्रह्मांडीय शक्तियों से जोड़कर देखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि पूजा के दौरान कलश पर मौली बांधना शुभ ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है।

हालांकि, कलावा बांधने से नौ ग्रहों की ऊर्जा फैलने या नकारात्मकता दूर होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसे धार्मिक आस्था और परंपरा के संदर्भ में समझना उचित है।

नवरात्र में कलश स्थापना के समय कैसे बांधें कलावा?

  • सबसे पहले पूजा स्थल को स्वच्छ करके आवश्यक सामग्री व्यवस्थित करें।
  • शुभ मुहूर्त और अपनी परंपरा के अनुसार घट स्थापना की तैयारी करें।
  • कलश पर मौली या कलावा श्रद्धापूर्वक बांधें।
  • कलश में जल, आम या अशोक के पत्ते और अन्य पूजन सामग्री अपनी परंपरा के अनुसार रखें।
  • नारियल स्थापित करके मां दुर्गा का आह्वान करें और पूजा-संकल्प लें।

पूजा की विधि परिवार, क्षेत्र और परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए अपने घर में प्रचलित विधि या किसी जानकार पुरोहित के मार्गदर्शन का पालन किया जा सकता है।

क्या कलावा बांधे बिना घट स्थापना अधूरी है?

कई प्रचलित पूजा-पद्धतियों में कलश पर मौली बांधना महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, धार्मिक विधियों में परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है। यदि किसी कारणवश कलावा बांधना भूल जाएं, तो घबराने के बजाय श्रद्धापूर्वक अपनी पूजा परंपरा के अनुसार आगे की विधि पूरी करें।

निष्कर्ष: नवरात्र में कलश पर कलावा बांधना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि श्रद्धा, संकल्प, पवित्रता और देवी मां से मंगल की प्रार्थना का प्रतीक माना जाता है। इस परंपरा का मुख्य भाव मां दुर्गा के प्रति समर्पण और परिवार के कल्याण की कामना है।

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