नई दिल्ली (Action Bharat) | दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने पर पाबंदी लगाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के 11 अक्टूबर को जारी आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल की गई है। इस आदेश के तहत जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने पर सवाल उठाए गए हैं।
जंतर-मंतर की जगह तीन नए प्रदर्शन स्थल
जागरण की 13 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तीन वैकल्पिक स्थान तय किए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड शामिल हैं। इन स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी किए जाने की बात भी कही गई है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी गई?
याचिका में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व फैसले में जंतर-मंतर को धरना-प्रदर्शन के लिए उपयुक्त स्थान माना गया था। याचिका में रामलीला मैदान को उसके विकल्प के रूप में स्वीकार करने को लेकर भी आपत्ति जताई गई है।
नए प्रदर्शन स्थलों की व्यवस्था पर सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, याचिका में नए निर्धारित स्थलों की भौगोलिक स्थिति और वहां उपलब्ध सुविधाओं को लेकर भी चिंता जताई गई है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि ये स्थान लैंडफिल क्षेत्रों यानी कूड़े के बड़े ढेरों के आसपास हैं। ऐसे में वहां बड़ी संख्या में लोगों के जुटने पर स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर नजर
इस मामले में अदालत का फैसला महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि जंतर-मंतर लंबे समय से विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और जनहित से जुड़े आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। फिलहाल याचिका में उठाई गई आपत्तियों और पुलिस के आदेश को लेकर अंतिम न्यायिक निर्णय की जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है।
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