लखनऊ (Action Bharat) | उत्तर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में हुए हंगामे और जूता-चप्पल चलने की घटना ने पार्टी के भीतर अनुशासन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बृजलाल खाबरी को बनाया गया समिति का अध्यक्ष
जागरण की 13 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खाबरी को जांच समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति में उत्तर प्रदेश के सह प्रभारी अभिषेक दत्त और अब्दुल हन्नान, पूर्व सांसद रवि वर्मा तथा महिला कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शमीना शफीक को सदस्य बनाया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, समिति मंगलवार से मामले की जांच शुरू करने वाली थी। जांच में घटना के दौरान मौजूद लोगों की भूमिका और विवाद की परिस्थितियों की पड़ताल की जाएगी।
आखिर कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह घटना रविवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद के पदभार ग्रहण कार्यक्रम के दौरान हुई।
रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और उनके समर्थक पार्टी कार्यालय पहुंचे थे। इसी दौरान महिला पार्षद ममता चौधरी और अजय राय के बीच कथित टिप्पणी को लेकर विवाद शुरू हो गया। बहस बढ़ने के बाद दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच मारपीट हुई।
आरोप है कि अजय राय के समर्थकों अमित और संदीप ने महिला पार्षद पर जूते से हमला किया। घटना के दौरान मौके पर लात-घूंसे और जूते-चप्पल चलने की बात भी सामने आई है। मामले में सभी संबंधित पक्षों की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पार्टी की किरकिरी, कार्रवाई पर नजर
घटना के बाद कांग्रेस के भीतर अनुशासन और संगठनात्मक व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने जांच के आधार पर कार्रवाई का भरोसा दिया है।
रिपोर्ट में यह सवाल भी उठाया गया है कि मामले की जांच के लिए पार्टी की मौजूदा अनुशासन समिति के बजाय अलग समिति क्यों बनाई गई। हालांकि, इस फैसले के पीछे की आधिकारिक वजह स्पष्ट नहीं बताई गई है।
एक सप्ताह में आएगी जांच रिपोर्ट
पांच सदस्यीय समिति को एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देनी है। अब देखना होगा कि जांच में विवाद की शुरुआत, मारपीट में शामिल लोगों की भूमिका और संगठनात्मक जिम्मेदारी को लेकर क्या निष्कर्ष सामने आते हैं।
कांग्रेस के लिए यह मामला केवल एक हंगामे की जांच नहीं, बल्कि पार्टी कार्यालय में अनुशासन और नेताओं-कार्यकर्ताओं के व्यवहार पर उठे सवालों का जवाब देने की भी चुनौती है।
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