मां दुर्गा को क्यों कहते हैं ‘सर्वमंगला’? विवाह से लेकर हर शुभ कार्य में क्यों लिया जाता है यह नाम?

धर्म-अध्यात्म

धर्म एवं अध्यात्म (Action Bharat) | नवरात्र के पावन अवसर पर मां दुर्गा की आराधना विशेष महत्व रखती है। भक्त मां को शक्ति, जगदंबा, महिषासुर मर्दिनी और सर्वमंगला जैसे अनेक नामों से पुकारते हैं। इनमें ‘सर्वमंगला’ नाम का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा समस्त संसार का मंगल और कल्याण करने वाली देवी हैं। यही कारण है कि विवाह, गृह प्रवेश, नई यात्रा और अन्य शुभ कार्यों से पहले भी उनकी स्तुति की जाती है।

नारायणी स्तुति में मिलता है मां का यह स्वरूप

मां दुर्गा की स्तुति में एक प्रसिद्ध श्लोक है, जिसे दुर्गा सप्तशती के 11वें अध्याय की नारायणी स्तुति का हिस्सा माना जाता है।

“सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥”

इस श्लोक में देवी को सभी मंगलों में श्रेष्ठ मंगल प्रदान करने वाली, कल्याणकारी, सभी उद्देश्यों की सिद्धि में सहायक और भक्तों को शरण देने वाली शक्ति के रूप में नमन किया गया है।

क्या है ‘सर्वमंगला’ नाम का अर्थ?

‘सर्वमंगला’ शब्द का भावार्थ है—सबका मंगल करने वाली। धार्मिक आस्था के अनुसार, मां दुर्गा अपने भक्तों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण का आशीर्वाद देती हैं।

यह नाम देवी के उस स्वरूप को दर्शाता है, जो केवल किसी एक व्यक्ति या परिवार ही नहीं, बल्कि समस्त संसार के कल्याण की प्रतीक हैं।

श्लोक में छिपे हैं देवी के कई स्वरूप

इस प्रसिद्ध स्तुति की प्रत्येक पंक्ति मां के अलग-अलग गुणों और स्वरूपों की ओर संकेत करती है।

  • सर्वमंगलमांगल्ये: सभी शुभ कार्यों और मंगलकारी भावों का आधार।
  • शिवे: कल्याणकारी और शुभता प्रदान करने वाली।
  • सर्वार्थसाधिके: जीवन के उचित उद्देश्यों की पूर्ति में सहायक।
  • शरण्ये: भक्तों को शरण और आश्रय देने वाली।
  • त्र्यंबके: तीन नेत्रों वाली देवी।
  • गौरी: देवी के सौम्य और उज्ज्वल स्वरूप का प्रतीक।
  • नारायणी: परम शक्ति के उस स्वरूप का संबोधन, जो भगवान नारायण की शक्ति से जुड़ा है।

इस प्रकार, यह स्तुति देवी की शक्ति, करुणा, संरक्षण और कल्याणकारी स्वरूप का स्मरण कराती है।

विवाह और शुभ कार्यों से पहले क्यों किया जाता है जाप?

हिंदू परंपरा में किसी नए कार्य की शुरुआत से पहले देवी-देवताओं का स्मरण करने की प्रथा है। विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत और यात्रा जैसे अवसरों पर भक्त मां दुर्गा का आशीर्वाद मांगते हैं।

‘सर्वमंगलमांगल्ये’ मंत्र का जाप इसी आस्था से किया जाता है कि देवी की कृपा से जीवन में शुभता, शांति और सकारात्मकता बनी रहे। नवरात्र में भी अनेक श्रद्धालु इस मंत्र का पाठ करते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी का स्मरण मन को एकाग्र करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और कठिन परिस्थितियों में संबल पाने का माध्यम बन सकता है। हालांकि, किसी विशेष परिणाम या हर कार्य में सफलता की गारंटी के रूप में इसे नहीं देखना चाहिए।

नवरात्र में कैसे करें मां सर्वमंगला का स्मरण?

भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार सरल तरीके से मां की आराधना कर सकते हैं।

  1. स्नान के बाद स्वच्छ स्थान पर बैठकर मां दुर्गा का ध्यान करें।
  2. दीपक जलाकर पुष्प अर्पित करें।
  3. ‘सर्वमंगलमांगल्ये’ श्लोक का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
  4. परिवार, समाज और समस्त प्राणियों के कल्याण की कामना करें।
  5. पूजा के साथ अपने व्यवहार में दया, सेवा और सद्भाव को भी महत्व दें।

निष्कर्ष: मां दुर्गा को ‘सर्वमंगला’ कहने का मूल भाव समस्त संसार के कल्याण और शुभता की कामना है। नारायणी स्तुति का यह श्लोक भक्तों को देवी की शक्ति के साथ उनके करुणामय और कल्याणकारी स्वरूप का भी स्मरण कराता है।

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