IDBI बैंक के निजीकरण की तैयारी तेज, कर्मचारियों की नौकरी और पेंशन का क्या होगा? सरकार ने दिया भरोसा

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नई दिल्ली (Action Bharat) | IDBI बैंक की रणनीतिक बिक्री को मंजूरी मिलने के बाद कर्मचारियों की नौकरी, सेवा शर्तों और पेंशन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। केंद्र सरकार ने इन चिंताओं पर सफाई देते हुए कहा है कि शेयर खरीद समझौते (Share Purchase Agreement) के तहत मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों और वर्तमान पेंशनभोगियों के पेंशन लाभों को सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है।

निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव अरुणिश चावला के अनुसार, बैंक की रणनीतिक बिक्री के बावजूद कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समझौते में आवश्यक शर्तें शामिल की गई हैं।

कर्मचारियों की सेवा शर्तें सुरक्षित रहेंगी: DIPAM सचिव

मनीकंट्रोल को दिए गए एक साक्षात्कार में DIPAM सचिव अरुणिश चावला ने कहा कि IDBI बैंक को एक चालू बैंकिंग इकाई के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बैंक में कर्मचारियों की सेवा शर्तें बोर्ड द्वारा संबंधित कर्मचारी संघों से परामर्श के बाद तय की जाती हैं।

चावला के मुताबिक, शेयर खरीद समझौते के तहत मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तें सुरक्षित हैं। इसके साथ ही वर्तमान पेंशनभोगियों के पेंशन लाभों को भी समझौते के जरिए संरक्षित किया गया है।

सरकार का कहना है कि नए प्रमोटर के आने के बाद भी बैंक को लागू कंपनी कानूनों और श्रम कानूनों के तहत काम करना होगा। प्रबंधन और कर्मचारी संघों के बीच संवाद तथा आपसी समझ को भी महत्वपूर्ण बताया गया है।

पेंशनभोगियों को क्या मिला आश्वासन?

निजीकरण की प्रक्रिया में कर्मचारियों के साथ-साथ सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हित भी महत्वपूर्ण हैं। सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन के अनुसार, मौजूदा पेंशनभोगियों के पेंशन लाभ शेयर खरीद समझौते की शर्तों के तहत सुरक्षित रहेंगे।

हालांकि, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए यह समझना जरूरी है कि उनके व्यक्तिगत मामलों में वास्तविक सुरक्षा संबंधित सेवा नियमों, पेंशन योजना और समझौते की लागू शर्तों पर निर्भर करेगी। इसलिए संबंधित कर्मचारियों को आधिकारिक दस्तावेजों और बैंक की ओर से जारी निर्देशों को ध्यान से देखना चाहिए।

बैंक यूनियनों ने निजीकरण का किया विरोध

दूसरी ओर, बैंक कर्मचारी यूनियनों ने IDBI बैंक की रणनीतिक बिक्री का विरोध किया है। यूनियनों की आशंका है कि निजी या विदेशी निवेशक को हिस्सेदारी बेचे जाने से सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

उन्होंने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। इस तरह एक ओर सरकार कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा का भरोसा दे रही है, वहीं दूसरी ओर यूनियनें बैंक के स्वामित्व में बदलाव और उसके संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठा रही हैं।

2019 में LIC ने खरीदी थी 51 प्रतिशत हिस्सेदारी

IDBI बैंक के स्वामित्व में बड़ा बदलाव जनवरी 2019 में हुआ था, जब भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने बैंक में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की थी। इसके बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने नियामकीय व्यवस्था के तहत IDBI बैंक को निजी क्षेत्र के बैंक की श्रेणी में रखा।

हालांकि, LIC एक सरकारी स्वामित्व वाली संस्था है, इसलिए बैंक में सरकारी प्रभाव बना रहा। अब प्रस्तावित रणनीतिक बिक्री के जरिए स्वामित्व और नियंत्रण में आगे बदलाव की प्रक्रिया चल रही है।

आगे क्या होगा?

IDBI बैंक की रणनीतिक बिक्री से जुड़ी प्रक्रिया में नए निवेशक के आने के बाद बैंक के संचालन और प्रबंधन में बदलाव हो सकते हैं। सरकार ने मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों और पेंशनभोगियों के लाभों की सुरक्षा का भरोसा दिया है, जबकि कर्मचारी यूनियनें निजीकरण के व्यापक प्रभावों को लेकर चिंतित हैं।

अब इस मामले में शेयर खरीद समझौते की अंतिम शर्तों, नए प्रमोटर की भूमिका और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा के लिए किए जाने वाले प्रावधानों पर नजर रहेगी।

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