रांची में छात्रों के प्रदर्शन पर हुए पुलिस एक्शन को लेकर अब सियासत तेज हो गई है। JPSC और JSSC की परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया दी है।
राहुल गांधी ने छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग को गलत बताते हुए कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार है और इस पूरे मामले का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जाना चाहिए।
दरअसल, सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र झारखंड विधानसभा का घेराव करने के लिए आगे बढ़े। प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग तोड़े जाने के बाद पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया, जबकि लाठीचार्ज किए जाने की भी बात सामने आई है।
छात्रों की मुख्य मांग भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और कथित अनियमितताओं की जांच से जुड़ी है। रिपोर्टों के मुताबिक, JPSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन पिछले कई दिनों से लगातार तेज हो रहा है।
राहुल गांधी ने सरकार से छात्रों की बात सुनने और उनकी समस्याओं का जल्द समाधान करने की अपील की है। उनका कहना है कि छात्रों पर बल प्रयोग किसी समस्या का समाधान नहीं है।
लेकिन इसी बीच इस पूरे मामले में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है।
JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को CID ने गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी की कार्रवाई कथित परीक्षा अनियमितताओं से जुड़े मामले में हुई है। इससे पहले CID ने उनसे पूछताछ की थी और उनके कई ठिकानों पर तलाशी भी ली गई थी।
खियांग्ते पर परीक्षा संचालन से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर जांच चल रही है। जांच में दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी जुटाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, मामले में आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब इस पूरे मामले ने छात्र आंदोलन से लेकर सियासत तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
छात्र कह रहे हैं कि जब तक भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सवालों का समाधान नहीं होता और कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
वहीं राहुल गांधी के बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होने की संभावना है।
एक तरफ छात्र पारदर्शी भर्ती और निष्पक्ष परीक्षा की मांग कर रहे हैं… दूसरी तरफ पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने इस आंदोलन को और बड़ा मुद्दा बना दिया है।
अब देखना होगा कि झारखंड सरकार छात्रों से बातचीत कर इस आंदोलन का समाधान निकालती है या फिर रांची की सड़कों पर आंदोलन और सियासत दोनों और तेज होते हैं।
