नई दिल्ली। छात्र आंदोलनों को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन और झारखंड की राजधानी रांची में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष पर निशाना साधा है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश के युवाओं को दिल्ली और रांची के दोनों आंदोलनों को एक तराजू पर तौलकर देखना चाहिए।
भाजपा का आरोप है कि रांची में छात्र परीक्षा और नियुक्तियों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, जबकि विपक्ष की ओर से इस आंदोलन को लेकर वैसी सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है जैसी दिल्ली के आंदोलन के दौरान दिखाई गई थी।
सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया कि रांची में छात्र अपने मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण और मर्यादित तरीके से संघर्ष कर रहे हैं। भाजपा नेता ने दिल्ली के आंदोलन से इसकी तुलना करते हुए कहा कि दोनों आंदोलनों के स्वरूप और राजनीतिक समर्थन में अंतर दिखाई देता है।
विपक्ष पर ‘राजनीतिक स्वार्थ’ का आरोप
भाजपा ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि छात्र हित उसके लिए केवल राजनीतिक मुद्दा है। त्रिवेदी ने कहा कि अगर विपक्ष वास्तव में छात्रों के हितों को लेकर गंभीर है, तो उसे रांची के छात्रों की आवाज भी उसी मजबूती से उठानी चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि जब दूसरे राज्यों में छात्र आंदोलनों को लेकर कांग्रेस मुखर होती है, तो झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर उसकी आवाज क्यों नहीं सुनाई दे रही?
रांची में किन मुद्दों पर आंदोलन?
रांची में छात्रों और अभ्यर्थियों का आंदोलन परीक्षा प्रक्रिया, कथित अनियमितताओं और नियुक्तियों से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा है। आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम में छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस प्रशासन के बीच टकराव की खबरें भी सामने आई हैं।
भाजपा का कहना है कि इन आरोपों और छात्रों की मांगों पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए, लेकिन पार्टी ने विपक्ष की राजनीतिक भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।
अब सवाल सिर्फ आंदोलन का नहीं, राजनीति का भी है
इस पूरे विवाद में अब दो सवाल आमने-सामने हैं।
पहला—क्या छात्रों के मुद्दे पर आंदोलन को राजनीतिक समर्थन उसकी जगह और राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर मिलता है?
और दूसरा—क्या विपक्ष को हर राज्य में छात्रों के आंदोलनों पर एक समान रुख अपनाना चाहिए?
भाजपा ने विपक्ष की चुप्पी को इसी सवाल से जोड़ते हुए कहा है कि युवाओं को खुद दोनों आंदोलनों की परिस्थितियों और मुद्दों को देखकर फैसला करना चाहिए।
फिलहाल रांची का छात्र आंदोलन सिर्फ परीक्षा और नियुक्तियों से जुड़े सवालों तक सीमित नहीं रह गया है। इसके साथ अब दिल्ली की राजनीति भी जुड़ गई है और भाजपा बनाम विपक्ष की सियासी बहस तेज होती दिखाई दे रही है।
