रूस-यूक्रेन युद्ध में नया खतरा: आसमान में ड्रोन, निशाने पर आम लोग

विदेश

रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग अब सिर्फ बॉर्डर और मोर्चे तक सीमित नहीं रह गई है। युद्ध के पांचवें साल में प्रवेश कर चुके इस संघर्ष में ड्रोन सबसे बड़े हथियारों में शामिल हो गए हैं।

आसमान में उड़ते ये छोटे-बड़े ड्रोन अब सैन्य ठिकानों के साथ-साथ ऊर्जा संयंत्रों, गोदामों और दूसरे महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बना रहे हैं।

लेकिन सबसे बड़ी चिंता ये है कि इस युद्ध की कीमत आम नागरिकों को भी चुकानी पड़ रही है।


एक ही दिन में दर्जनों मौतों का दावा

रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को यूक्रेन के ड्रोन हमले में रूस में 13 लोगों की मौत की जानकारी रूसी अधिकारियों ने दी, जिसमें एक बच्चा भी शामिल बताया गया।

इसके बाद रूस की तरफ से यूक्रेन के खार्किव पर हमला किया गया, जिसमें 5 लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई।

यानी दोनों तरफ हमले जारी हैं और इनके बीच आम नागरिक लगातार फंसते जा रहे हैं।


ड्रोन युद्ध का चेहरा बदल रहे हैं

कुछ साल पहले तक ड्रोन हमले मुख्य रूप से रणनीतिक और सैन्य ठिकानों तक सीमित दिखाई देते थे।

लेकिन अब इनका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर तेल रिफाइनरी, ऊर्जा ढांचे, बिजली सब-स्टेशन, गोदाम और दूसरे महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने में किया जा रहा है।

यूक्रेन की तरफ से रूसी क्षेत्र में ड्रोन हमलों में बढ़ोतरी हुई है।

वहीं रूस भी जवाबी कार्रवाई में यूक्रेन के शहरों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहा है।


सबसे ज्यादा चिंता नागरिकों की सुरक्षा को लेकर

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक यूक्रेन में नागरिकों के हताहत होने की संख्या में गंभीर बढ़ोतरी हुई है।

रिपोर्ट में इस साल के शुरुआती छह महीनों में यूक्रेन में 1,396 नागरिकों की मौत और 7,978 लोगों के घायल होने का आंकड़ा दिया गया है।

ये आंकड़े बताते हैं कि युद्ध का असर सिर्फ सैनिकों तक सीमित नहीं है।

शहरों में रहने वाले आम लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।


छोटे FPV ड्रोन बने बड़ा खतरा

युद्ध के मैदान में इस्तेमाल होने वाले छोटे FPV ड्रोन ने स्थिति को और खतरनाक बना दिया है।

ये ड्रोन बेहद तेजी से लक्ष्य का पीछा कर सकते हैं और ऑपरेटर दूर बैठकर इन्हें नियंत्रित कर सकता है।

यही वजह है कि फ्रंटलाइन के आसपास रहने वाले नागरिकों के लिए भी इनसे खतरा बढ़ गया है।

रिपोर्ट में एक 52 वर्षीय व्यक्ति का जिक्र किया गया है, जिस पर ड्रोन से हमला होने की बात कही गई है।

ऐसी घटनाएं दिखाती हैं कि आधुनिक युद्ध में तकनीक ने लड़ाई को कितना बदल दिया है।


मिसाइलों का खतरा भी बरकरार

हालांकि ड्रोन युद्ध का तरीका बदल रहे हैं, लेकिन रूस की तरफ से मिसाइल हमले भी जारी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार जुलाई में रूस ने बड़ी संख्या में मिसाइलें दागीं।

इनमें बैलिस्टिक मिसाइलें भी शामिल थीं, जिन्हें रोकना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

यूक्रेन की राजधानी की सुरक्षा के लिए पश्चिमी देशों से मिले एयर डिफेंस सिस्टम बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


जेलेंस्की लगातार मांग रहे एयर डिफेंस सिस्टम

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की लगातार अपने देश के लिए पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और दूसरे रक्षा उपकरणों की मांग करते रहे हैं।

यूक्रेन का कहना है कि रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों से शहरों की सुरक्षा के लिए मजबूत एयर डिफेंस बेहद जरूरी है।

लेकिन अमेरिका और दूसरे सहयोगी देशों के सामने भी अपने संसाधनों और प्राथमिकताओं को लेकर चुनौतियां हैं।


शांति की कोशिशें… लेकिन जंग जारी

इस युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका और दूसरे देशों की तरफ से कई स्तरों पर कूटनीतिक प्रयास किए गए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी युद्ध को जल्द खत्म कराने की बात कही थी।

बैठकें हुईं, बातचीत हुई और शांति की संभावनाओं पर चर्चा भी हुई।

लेकिन जमीन पर तस्वीर अभी भी अलग है।

रूस और यूक्रेन के बीच हमले जारी हैं और दोनों पक्ष अपनी-अपनी सुरक्षा और रणनीतिक लक्ष्यों को लेकर पीछे हटते नहीं दिख रहे।


अब पूरा शहर बन चुका है युद्ध का मोर्चा

रूस-यूक्रेन युद्ध की सबसे भयावह तस्वीर यही है कि अब खतरा सिर्फ सीमा पर खड़े सैनिकों तक सीमित नहीं है।

ड्रोन आसमान में हैं… मिसाइलें दूर तक पहुंच रही हैं… और आम लोग अपने घरों में भी पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे।

चार साल से ज्यादा समय बीतने के बावजूद युद्ध का अंत दिखाई नहीं दे रहा।

और इस पूरी लड़ाई में सबसे बड़ा सवाल यही है—

आखिर शांति कब आएगी और कब आम लोग फिर से बिना डर के अपने घरों से बाहर निकल पाएंगे?

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