बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने भारत के साथ रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। ढाका में भारत के नए हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी से मुलाकात के दौरान तारिक रहमान ने दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए अनुकूल माहौल बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
लेकिन इसी मुलाकात में बांग्लादेश ने भारत के सामने एक बेहद संवेदनशील मुद्दा भी रखा है—
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का प्रत्यर्पण।
भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश
तारिक रहमान की सरकार पड़ोसी भारत के साथ संबंधों को स्थिर करने की कोशिश कर रही है।
दोनों देशों के बीच व्यापार, सीमा, ऊर्जा, लोगों के बीच संपर्क और सुरक्षा जैसे कई मुद्दे हैं, जिन पर बातचीत आगे बढ़ाना दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
रहमान ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए ऐसा माहौल बनाने की बात कही है, जिसमें दोनों देश विवादित मुद्दों के बावजूद बातचीत जारी रख सकें।
लेकिन हसीना के प्रत्यर्पण पर ढाका का दबाव
रिश्ते सुधारने की कोशिश के साथ-साथ बांग्लादेश शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी लगातार उठा रहा है।
शेख हसीना अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद भारत में रह रही हैं।
बांग्लादेश का कहना है कि भारत को उनके प्रत्यर्पण के अनुरोध पर आगे बढ़ना चाहिए।
तारिक रहमान की सरकार ने भारत से इस प्रक्रिया को तेज करने में सहयोग की उम्मीद जताई है।
हसीना के बयान से फिर बढ़ा तनाव
हाल ही में शेख हसीना ने भारत से एक ऑनलाइन कार्यक्रम को संबोधित किया था।
सत्ता से हटने के बाद उनका यह सार्वजनिक संबोधन बांग्लादेश में राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना गया।
ढाका ने हसीना को भारत से सार्वजनिक रूप से संबोधित करने की अनुमति दिए जाने पर नाराजगी जताई।
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत के इस कदम को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी।
भारत का क्या कहना है?
भारत ने साफ किया है कि बांग्लादेश की ओर से भेजे गए प्रत्यर्पण अनुरोध की समीक्षा कानूनी और न्यायिक प्रक्रियाओं के तहत की जा रही है।
यानी फिलहाल नई दिल्ली ने प्रत्यर्पण को लेकर कोई जल्दबाजी वाला फैसला नहीं किया है।
साथ ही भारत ने बांग्लादेश के साथ सकारात्मक, रचनात्मक और भविष्य को ध्यान में रखकर संबंध आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
दिनेश त्रिवेदी की मुलाकात क्यों अहम?
भारत के नए हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी की प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दोनों देश रिश्तों को नए सिरे से संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
एक तरफ बांग्लादेश भारत के साथ संबंधों में सुधार चाहता है।
दूसरी तरफ शेख हसीना का प्रत्यर्पण, उनके भारत में रहना और उनके सार्वजनिक राजनीतिक बयानों जैसे मुद्दे दोनों देशों के बीच संवेदनशील बने हुए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या रिश्ते सुधरेंगे?
भारत और बांग्लादेश के रिश्ते सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं हैं।
दोनों देशों के बीच व्यापार, सीमा सुरक्षा, ऊर्जा, परिवहन और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे जुड़े हुए हैं।
इसलिए दोनों देशों के लिए बातचीत का रास्ता खुला रखना बेहद अहम है।
लेकिन शेख हसीना का मुद्दा दोनों सरकारों के बीच सबसे बड़ी कूटनीतिक चुनौतियों में से एक बना हुआ है।
अब देखना होगा कि तारिक रहमान सरकार भारत के साथ रिश्तों को सुधारने और शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग—इन दोनों मुद्दों के बीच संतुलन कैसे बनाती है।
