नई दिल्ली। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव का अंतिम चरण सोमवार को कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हुआ। चुनाव प्रक्रिया कई हफ्तों से जारी विरोध-प्रदर्शनों और हिंसक झड़पों के बीच आगे बढ़ी है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने चुनाव का बहिष्कार किया है।
4 सीटों पर मतदान, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
अंतिम चरण में पुंछ जिले की चार विधानसभा सीटों पर मतदान होना था। हालांकि सुरक्षा कारणों से कुछ इलाकों में मतदान प्रभावित और कुछ सीटों पर प्रक्रिया में देरी की खबर सामने आई। क्षेत्र में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है।
PTI ने चुनाव से बनाई दूरी
इमरान खान की पार्टी PTI ने जुलाई में ही घोषणा कर दी थी कि वह मौजूदा परिस्थितियों में AJK चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी। पार्टी ने इसे कश्मीरियों के साथ एकजुटता और मौजूदा राजनीतिक हालात के विरोध का फैसला बताया था।
JAAC ने भी चुनाव प्रक्रिया का विरोध किया है। संगठन की प्रमुख मांगों में विधानसभा की उन 12 आरक्षित सीटों को लेकर आपत्ति शामिल है, जो भारतीय प्रशासन वाले कश्मीर से विस्थापित लोगों के लिए रखी गई हैं। JAAC का आरोप है कि इन सीटों का इस्तेमाल क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित करने के लिए किया जाता है।
चुनाव से पहले हिंसक प्रदर्शन
PoK में चुनाव से पहले कई सप्ताह तक विरोध-प्रदर्शन और सुरक्षा बलों के साथ झड़पें हुईं। Reuters के अनुसार, Rawalakot में पहले चरण के मतदान के बाद हुई हिंसा में 30 से अधिक लोगों के मारे जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। JAAC इन प्रदर्शनों में प्रमुख भूमिका निभा रहा है।
PML-N को पहले ही बड़ी बढ़त
चुनाव के शुरुआती चरणों में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) ने बड़ी बढ़त हासिल कर ली है। AP के अनुसार, अंतिम चरण से पहले PML-N 34 में से 24 सीटें जीत चुकी थी और उसके क्षेत्रीय सरकार बनाने की संभावना मजबूत हो गई है।
भारत ने चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल
भारत ने PoK में हो रहे चुनावों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने इसे पाकिस्तान के कब्जे को वैधता देने की कोशिश बताते हुए चुनावी प्रक्रिया को “cosmetic electoral exercise” कहा है। भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के वे सभी क्षेत्र, जो पाकिस्तान के कब्जे में हैं, भारत का अभिन्न हिस्सा हैं।
आगे क्या?
अंतिम चरण का मतदान पूरा होने के बाद नवनिर्वाचित सदस्य क्षेत्रीय प्रधानमंत्री का चुनाव करेंगे। ऐसे में PML-N की बढ़त के बीच अब नजर इस बात पर है कि नई सरकार क्षेत्र में जारी राजनीतिक असंतोष और JAAC के विरोध को किस तरह संभालती है।
