नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सदन में जवाब देने की सरकार की तैयारी के बावजूद विपक्ष ने अब अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी के मामले पर चर्चा की मांग तेज कर दी है।
विपक्ष की मांग बदलने के बाद सरकार ने भी मानसून सत्र के बचे हुए दिनों को लेकर अपनी रणनीति नए सिरे से तैयार करनी शुरू कर दी है। इसी बीच एफसीआरए संशोधन विधेयक और महिला आरक्षण व परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लेकर भी सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं।
जंतर-मंतर मामले पर चर्चा के लिए सरकार तैयार
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने विपक्ष से संसद चलने देने की अपील करते हुए कहा कि सरकार जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर पूरी चर्चा और जवाब देने के लिए तैयार है।
रिजीजू ने विपक्ष से चर्चा में हिस्सा लेने की अपील करते हुए कहा कि गृह मंत्री के जवाब के दौरान विपक्ष को डरने या पीछे हटने की जरूरत नहीं है।
लेकिन कांग्रेस का कहना है कि केवल पुलिस कार्रवाई पर चर्चा पर्याप्त नहीं है। पार्टी अब राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े मामले पर भी सदन में बहस चाहती है।
राम मंदिर चढ़ावा मामले पर कांग्रेस अड़ी
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने जंतर-मंतर मामले के साथ राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी के मुद्दे को भी चर्चा में शामिल करने की मांग की।
सरकार की ओर से इसका विरोध किया गया। किरेन रिजीजू ने कहा कि राम मंदिर चढ़ावे का मुद्दा समाजवादी पार्टी की मांग है, जबकि कांग्रेस की मूल मांग गृह मंत्री अमित शाह के बयान को लेकर थी।
गोगोई ने सरकार पर विपक्षी दलों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
परिसीमन पर सरकार के पास कितना समर्थन?
इस बीच महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के बीच इस मुद्दे पर लंबी बैठक हुई। बैठक में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद रहे।
सरकारी सूत्रों का दावा है कि लोकसभा में विधेयक के लिए जरूरी 360 सांसदों के दो-तिहाई समर्थन के मुकाबले 366 सांसदों का आंकड़ा जुटा लिया गया है।
हालांकि, विधेयक को मौजूदा सत्र में पेश किया जाएगा या नहीं, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
कांग्रेस को सरकार की रणनीति पर शक
विपक्ष को आशंका है कि यदि जंतर-मंतर मामले पर अमित शाह के बयान के जरिए संसद में गतिरोध टूटता है, तो सरकार इसके बाद परिसीमन से जुड़े विधेयक को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकती है।
यही वजह है कि महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा अब संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शह-मात की राजनीति का अहम केंद्र बन गया है।
FCRA विधेयक पर भी पेंच
विदेशी अनुदान विनियमन कानून यानी FCRA में संशोधन से जुड़े विधेयक को लेकर भी सरकार और कांग्रेस के बीच सहमति नहीं बन पाई है।
कांग्रेस की ओर से इस विधेयक को संसदीय स्थायी समिति या संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की मांग की गई है। सरकार इसे आगे बढ़ाने की कोशिश में है, लेकिन विपक्ष पूरे संशोधन विधेयक की समीक्षा चाहता है।
बचे दिनों में क्या होगा?
मानसून सत्र के अधिकांश दिन हंगामे की भेंट चढ़ चुके हैं। अब सरकार के सामने बचे हुए दिनों में विधायी कामकाज पूरा कराने की चुनौती है।
सरकार के सामने फिलहाल कई विकल्प हैं—बचे हुए दिनों में विधेयक पास कराना, सत्र की अवधि बढ़ाना या जरूरत पड़ने पर विशेष सत्र बुलाना।
वहीं विपक्ष अपने मुद्दों पर चर्चा की मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा। ऐसे में संसद के अंतिम दिनों में भी हंगामे और राजनीतिक टकराव के आसार बने हुए हैं।
