रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच में कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। गिरफ्तार टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी के कथित बयान के अनुसार, रांची के हरिओम टावर में फ्लैट लेकर अभ्यर्थियों के उत्तर लिखवाने की व्यवस्था की गई थी।
जांच में सामने आए कथित बयानों के मुताबिक, दूसरे राज्यों से विशेषज्ञों को बुलाकर कुछ अभ्यर्थियों की मेंस परीक्षा में उत्तर लिखवाए जाते थे। इसके अलावा बेहतर प्रदर्शन करने वाले अभ्यर्थियों के अंक बढ़ाने के लिए कुछ प्रोफेसरों से संपर्क किए जाने का भी दावा किया गया है।
🚨 OMR शीट में हेरफेर का आरोप
मामले में गिरफ्तार टीडीपीएल निदेशक रामवीर सिंह के कथित बयान में OMR शीट से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप सामने आए हैं। दावा है कि खाली छोड़े गए विकल्पों को बाद में सही उत्तर के रूप में दर्ज किया जाता था।
इसके अलावा OMR स्कैनिंग, मेरिट डेटा, मेंस परीक्षा के अंकों और इंटरव्यू से जुड़े कोड में भी कथित हेरफेर की बात जांच में सामने आई है।
💰 लाखों रुपये में होती थी कथित सेटिंग
कथित बयानों के अनुसार, कुछ परीक्षाओं में अभ्यर्थियों के चयन के बदले 8 से 10 लाख रुपये तक लिए जाने की बात सामने आई है। अभय तिवारी ने एसीएफ और एफआरओ परीक्षा में अभ्यर्थियों की मदद के लिए करीब 40 लाख रुपये देने का भी दावा किया है।
जांच में 40 से 50 अभ्यर्थियों के रोल नंबर उपलब्ध कराने और इसके बदले करीब 1.10 करोड़ रुपये नकद दिए जाने का भी आरोप सामने आया है।
IAS मनीष रंजन का नाम भी आया
कथित बयान में वरिष्ठ IAS अधिकारी मनीष रंजन का नाम भी सामने आया है। बयान के अनुसार, टीडीपीएल के रामवीर सिंह और सतपाल सिंह के उनके आवास पर आने-जाने का उल्लेख किया गया है।
अभय तिवारी ने कथित तौर पर यह भी कहा कि उसने इन्हीं लोगों से सुना था कि 14वीं JPSC परीक्षा में मनीष रंजन के तीन अभ्यर्थियों की मदद कराई गई थी। हालांकि, अभय ने उन अभ्यर्थियों के नाम जानने से इनकार किया है।
महत्वपूर्ण: मनीष रंजन से जुड़े ये आरोप फिलहाल जांच में सामने आए कथित बयानों पर आधारित हैं। CID इन दावों का सत्यापन कर रही है।
🔍 जांच में और क्या सामने आया?
कथित बयान के अनुसार, कुछ परीक्षाओं की आंसर-की मूल्यांकन शुरू होने से पहले ही संबंधित कर्मचारियों तक पहुंचाए जाने का भी आरोप है। एफआरओ परीक्षा में करीब 15 अभ्यर्थियों की सूची देकर उनकी OMR शीट में बाद में सही उत्तर दर्ज कराने की बात भी सामने आई है।
मामले की जांच अब कथित पेपर सेटिंग, OMR में बदलाव, उत्तर लिखवाने की व्यवस्था, पैसों के लेन-देन और अधिकारियों से संभावित कनेक्शन की अलग-अलग कड़ियों को जोड़कर की जा रही है।
Action Bharat | JPSC घोटाले की जांच में सामने आए इन दावों ने परीक्षा व्यवस्था और चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
