लखनऊ। रेलवे ग्रुप-डी की परीक्षा देने मऊ से लखनऊ आए एक युवक को कथित तौर पर कमरा दिलाने का झांसा देकर सुनसान स्थान पर ले जाने और मारपीट कर ऑनलाइन रकम ट्रांसफर कराने के मामले में बाजारखाला पुलिस ने आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपित रेलवे स्टेशनों पर बाहर से आने वाले ऐसे यात्रियों को निशाना बनाते थे, जिन्हें लखनऊ की ज्यादा जानकारी नहीं होती थी। मदद या कमरा दिलाने का भरोसा देकर उन्हें अपने साथ ले जाया जाता और फिर कथित तौर पर डराकर पैसे ट्रांसफर कराए जाते थे।
परीक्षा देने लखनऊ आया था युवक
पुलिस के अनुसार, मऊ निवासी सुधाकर पाल रेलवे ग्रुप-डी की परीक्षा देने लखनऊ आए थे। वह 10 अगस्त की रात करीब 11 बजे कैफियात एक्सप्रेस से ऐशबाग रेलवे स्टेशन पहुंचे।
आरोप है कि स्टेशन पर कुछ युवक उनके पीछे लग गए और कमरा दिलाने की बात कहकर उन्हें अपने साथ ले गए। पहले उन्हें टेंपो से चारबाग रेलवे स्टेशन की ओर ले जाया गया और इसके बाद एक सुनसान स्थान पर ले जाकर कथित तौर पर डराया-धमकाया और मारपीट की गई।
Google Pay से पांच बार कराया ट्रांसफर
पुलिस के मुताबिक, आरोपितों ने युवक का मोबाइल अपने कब्जे में ले लिया और Google Pay के जरिए पांच बार रकम ट्रांसफर कराई।
पीड़ित के विरोध करने पर उसका मोबाइल फोन तोड़ दिया गया। पुलिस का आरोप है कि इसके बाद पानी में नशीला पदार्थ मिलाकर युवक को पिलाया गया, जिससे वह बेहोश हो गया।
घटना के बाद पीड़ित की शिकायत पर बाजारखाला थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।
CCTV और तकनीकी साक्ष्यों से खुला मामला
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों के CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके अलावा डिजिटल ट्रांजेक्शन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से संदिग्धों की पहचान की गई।
पुलिस के मुताबिक, लगातार तलाश के बाद 15 अगस्त की रात करीब 1:54 बजे ऐशबाग रेलवे स्टेशन के पास आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया गया।
आठ आरोपित गिरफ्तार
पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें कमता निवासी राज उर्फ राज वर्मा, निखिल रावत, अभिजीत राजपूत, राज राजपूत, मेराज अहमद, आदित्य वर्मा, इंदिरानगर निवासी धीरेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ धीरज और खरगापुर निवासी निसार अहमद शामिल हैं।
पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से डिजिटल ट्रांजेक्शन में इस्तेमाल मोबाइल फोन के अलावा बिना नंबर की टीवीएस स्कूटी और हीरो पैशन प्रो बाइक भी बरामद करने की बात कही है।
रेलवे स्टेशन के यात्रियों को बनाते थे निशाना
पुलिस की पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि गिरोह का तरीका रेलवे स्टेशन पर आने वाले यात्रियों को निशाना बनाना था।
खास तौर पर बाहर से आने वाले उन यात्रियों की तलाश की जाती थी, जिन्हें शहर की जानकारी कम होती थी। आरोप है कि पहले उन्हें कमरा दिलाने या किसी अन्य मदद का भरोसा दिया जाता था। इसके बाद सुनसान जगह पर ले जाकर गिरोह के अन्य सदस्य भी वहां पहुंचते और कथित तौर पर डराकर डिजिटल माध्यम से रकम ट्रांसफर कराते थे।
एक आरोपित पर पहले से मामले दर्ज
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपित धीरेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ धीरज के खिलाफ प्रतापगढ़ के पट्टी थाने में मारपीट, रंगदारी और धमकी समेत तीन मामले पहले से दर्ज हैं।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने इससे पहले कितने यात्रियों को निशाना बनाया और ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए कितनी रकम वसूली।
यात्रियों के लिए जरूरी सावधानी
रेलवे स्टेशन पर अनजान व्यक्ति द्वारा कमरा, टैक्सी या दूसरी मदद का प्रस्ताव मिलने पर यात्रियों को सावधानी बरतनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति के साथ सुनसान जगह पर जाने से बचें और किसी भी दबाव की स्थिति में तुरंत 112 या स्थानीय पुलिस से संपर्क करें।
निष्कर्ष: लखनऊ पुलिस की कार्रवाई से एक ऐसे कथित गिरोह का खुलासा हुआ है, जो रेलवे स्टेशन पर बाहर से आने वाले यात्रियों को निशाना बनाकर डिजिटल माध्यम से पैसे ट्रांसफर कराने का आरोप झेल रहा है। पुलिस अब गिरोह के अन्य मामलों और संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटा रही है।
डिस्क्लेमर: आरोपितों पर लगाए गए आरोप पुलिस की जांच और प्राथमिकी पर आधारित हैं। अदालत में दोष सिद्ध होने तक सभी आरोपित कानून की नजर में निर्दोष माने जाते हैं।
