पटना | (एक्शन भारत) पटना के गर्दनीबाग धरनास्थल पर सहायक प्राध्यापक बहाली समेत विभिन्न मांगों को लेकर शोधार्थियों का अनिश्चितकालीन आमरण अनशन 17वें दिन भी जारी है। आंदोलनकारियों ने अब अपनी मांगों को लेकर आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है। इसके तहत 22 अगस्त को लोकभवन मार्च प्रस्तावित है।
आंदोलन के प्रदेश संयोजक कुमुद पटेल के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन के बीच उनकी तबीयत बिगड़ने की भी बात सामने आई है। इसके बावजूद आंदोलनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं।
22 अगस्त को लोकभवन मार्च
आंदोलनकारियों ने 22 अगस्त को छात्र-युवा संगठनों और विश्वविद्यालय सहायक प्राध्यापक पद के अभ्यर्थियों के साथ लोकभवन मार्च निकालने की घोषणा की है।
प्रस्तावित मार्च वीर कुंवर पार्क से होते हुए आयकर गोलंबर तक जाने की बात कही गई है। इस घोषणा के बाद प्रशासन और सरकार के स्तर पर भी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
आंदोलनकारियों का दावा है कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थी और छात्र इस मार्च में शामिल हो सकते हैं।
सरकार पर मांगों की अनदेखी का आरोप
प्रेस वार्ता में आंदोलन के नेता कुमुद पटेल ने सरकार पर शोधार्थियों और युवाओं की मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
आंदोलनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से सहायक प्राध्यापक बहाली और विश्वविद्यालयों से जुड़े कई मुद्दे उठा रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी मांगों पर कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
इसी वजह से अब आंदोलन को व्यापक रूप देने का फैसला लिया गया है।
अलग-अलग जिलों से पहुंच रहे छात्र और शोधार्थी
बुधवार को बिहार के अलग-अलग जिलों से शोधार्थी, युवा और छात्र नेता पटना के धरनास्थल पर पहुंचे और आंदोलन को समर्थन दिया।
समर्थन देने पहुंचे लोगों ने सरकार से बातचीत के माध्यम से मामले का समाधान निकालने की मांग की। आंदोलनकारियों ने संकेत दिया है कि यदि जल्द उनकी मांगों पर फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
क्या हैं शोधार्थियों की प्रमुख मांगें?
आंदोलनकारियों की मांगें केवल सहायक प्राध्यापक बहाली तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया, आयु सीमा, डोमिसाइल नीति और अतिथि शिक्षकों के सेवा संरक्षण सहित कई मुद्दे उठाए हैं।
1. UGC Regulation-2018 की मांग
एसोसिएशन की प्रमुख मांग है कि सहायक प्राध्यापक बहाली में UGC Regulation-2018 के Table 3A को लागू किया जाए।
2. अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष
आंदोलनकारी सहायक प्राध्यापक पद के लिए अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष करने की मांग कर रहे हैं।
3. स्थायी और नियमित बहाली
विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की बहाली को स्थायी और नियमित प्रक्रिया के तहत कराने की मांग भी शामिल है।
4. प्रभावी डोमिसाइल नीति
आंदोलनकारी बिहार में प्रभावी डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग कर रहे हैं।
5. विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता
उनकी मांग है कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्वायत्तता का हनन रोका जाए और संस्थानों की अकादमिक व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
6. अतिथि सहायक प्राध्यापकों का सेवा संरक्षण
वर्षों से विश्वविद्यालयों में काम कर रहे अतिथि सहायक प्राध्यापकों को सेवा संरक्षण या सेवा समंजन देने की मांग भी आंदोलन का अहम हिस्सा है।
अब 22 अगस्त पर टिकी नजर
17 दिनों से चल रहे आमरण अनशन और आंदोलनकारियों की तबीयत बिगड़ने की खबरों के बीच 22 अगस्त का लोकभवन मार्च आंदोलन के लिए अहम पड़ाव माना जा रहा है।
यदि बड़ी संख्या में छात्र, शोधार्थी और अभ्यर्थी मार्च में शामिल होते हैं तो सरकार पर इन मांगों को लेकर बातचीत और समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल आंदोलनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं और उनका कहना है कि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
एक्शन भारत: अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 22 अगस्त के लोकभवन मार्च से पहले सरकार आंदोलनकारियों से बातचीत करती है या प्रदर्शन के बाद कोई बड़ा फैसला सामने आता है।
