नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस तेज हो गई है। 18 अगस्त 2026 को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में करीब 33 प्रतिशत Enumeration Forms का डिजिटल रिकॉर्ड अभी पूरा नहीं हुआ था, जिसके आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में दिखाई नहीं दे सकते हैं। (NDV Today)
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य-जांच जरूरी है: दिल्ली CEO और चुनाव आयोग की उपलब्ध आधिकारिक SIR समय-सारिणी के अनुसार दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची 5 अगस्त 2026 को प्रकाशित होनी थी, न कि 24 अगस्त को। अंतिम मतदाता सूची 7 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित होनी है। इसलिए 24 अगस्त वाली तारीख को Action Bharat की खबर में बिना आधिकारिक पुष्टि के तथ्य की तरह नहीं लिखना चाहिए। (Ceo Delhi)
क्या 33% मतदाताओं के नाम सीधे कट जाएंगे?
नहीं। यह कहना कि डिजिटाइजेशन से बाहर रहने वाले 33% मतदाताओं के नाम अपने-आप स्थायी रूप से मतदाता सूची से कट जाएंगे, सही नहीं होगा।
SIR में ड्राफ्ट रोल अंतिम मतदाता सूची नहीं होता। ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद पात्र मतदाताओं को अपने नाम की जांच करने और दावे-आपत्तियां दाखिल करने का अवसर मिलता है। दिल्ली CEO की आधिकारिक FAQ के मुताबिक दावे और आपत्तियों की अवधि 5 अगस्त से 4 सितंबर 2026 है और अंतिम रोल 7 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित होना निर्धारित है। (Ceo Delhi)
यानी अगर किसी योग्य मतदाता का नाम ड्राफ्ट में नहीं है, तो मामला वहीं खत्म नहीं होता।
📊 दिल्ली में SIR के दौरान कितने मतदाता?
SIR शुरू होने से पहले ECI के आंकड़ों में दिल्ली में करीब 1.48 करोड़ electors दर्ज थे। 12 मई 2026 के आंकड़ों में NCT of Delhi के 1,48,23,234 electors बताए गए थे। (Press Information Bureau)
रिपोर्ट में इसके बाद 1,45,10,299 मतदाताओं तक Enumeration Forms पहुंचाए जाने और 97,47,879 फॉर्म यानी 67.18% डिजिटल किए जाने का दावा किया गया है।
इस हिसाब से लगभग 47.62 लाख फॉर्म उस समय डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हुए थे।
लेकिन 47.62 लाख फॉर्म का डिजिटलाइजेशन लंबित होना = 47.62 लाख अपात्र मतदाता होना नहीं है।
यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण फर्क है।
SIR आखिर है क्या?
Special Intensive Revision यानी SIR मतदाता सूची की व्यापक समीक्षा की प्रक्रिया है।
चुनाव आयोग का उद्देश्य Electoral Roll को अपडेट करना, पात्र मतदाताओं को शामिल करना और ऐसे नामों की पहचान करना है जो नियमों के अनुसार सूची में नहीं होने चाहिए।
दिल्ली में SIR के तहत BLOs ने घर-घर जाकर Enumeration Forms वितरित किए। दिल्ली CEO के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार यह घर-घर प्रक्रिया 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक निर्धारित थी। (Election Commission of India)
🏠 अगर फॉर्म नहीं मिला तो क्या होगा?
यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।
दिल्ली CEO की SIR FAQ के अनुसार, ड्राफ्ट रोल प्रकाशित होने के बाद मतदाता को यह देखना चाहिए कि उसका नाम सूची में सही तरीके से दर्ज है या नहीं।
अगर किसी व्यक्ति का नाम नहीं है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत Form 6 और आवश्यक Declaration/दस्तावेजों के जरिए नाम शामिल कराने का दावा कर सकता है। (Ceo Delhi)
ECI के Voter Services Portal पर SIR के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनमें Enumeration Form भरना, पिछली SIR सूची में नाम खोजना, नोटिस का जवाब देना, Form 6 से नया पंजीकरण, Form 7 से deletion और Form 8 से correction जैसी सेवाएं शामिल हैं। (Voter Services)
जिलेवार तस्वीर भी चिंता बढ़ा रही है
रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में डिजिटाइजेशन की स्थिति सभी जिलों में समान नहीं थी।
सबसे कम डिजिटाइजेशन दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में बताया गया, जहां लगभग 56.32% फॉर्म डिजिटल हुए थे।
इसके विपरीत बाहरी उत्तर जिला करीब 75.68% डिजिटाइजेशन के साथ सबसे आगे बताया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण-पूर्वी जिले में लगभग 6.80 लाख फॉर्म और पूर्व, उत्तर-पूर्व तथा दक्षिण जिलों को मिलाकर चार जिलों में लगभग 23 लाख से अधिक फॉर्म डिजिटल रिकॉर्ड से बाहर थे।
इससे सवाल उठता है कि इतने बड़े पैमाने पर लंबित डेटा को समय पर कैसे प्रोसेस किया जाएगा।
कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग और BJP पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि झुग्गी-बस्तियों, गांवों और अनधिकृत कॉलोनियों में बड़ी संख्या में लोगों तक फॉर्म नहीं पहुंचे और कई लोगों को “shifted” बताकर सूची से बाहर किया जा सकता है।
कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि जिन लोगों के फॉर्म लंबित हैं, उनका विवरण सार्वजनिक किया जाए और मतदाता सूची में जोड़े गए, हटाए गए तथा स्थानांतरित किए गए नामों की जानकारी राजनीतिक दलों के Booth Level Agents को उपलब्ध कराई जाए।
ये राजनीतिक दल के आरोप हैं, चुनाव आयोग द्वारा स्थापित तथ्य नहीं। इसलिए खबर में इन्हें आरोप के रूप में ही प्रस्तुत करना जरूरी है।
2002 की वोटर लिस्ट क्यों चर्चा में है?
SIR को लेकर दिल्ली में एक और बड़ा विवाद पिछली SIR Electoral Roll के इस्तेमाल को लेकर है।
ECI के आधिकारिक पोर्टल पर मतदाता Last SIR Electoral Roll में अपना नाम खोज सकते हैं। दिल्ली समेत SIR वाले राज्यों के लिए पिछली SIR सूची को देखने और उससे संबंधित जानकारी प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध है। (Voter Services)
इसका मतलब यह है कि जिन मतदाताओं को अपने वर्तमान रिकॉर्ड को लेकर संदेह है, उन्हें अभी से अपने दस्तावेज और पुराने मतदाता रिकॉर्ड की जांच कर लेनी चाहिए।
🚨 वोटरों के लिए सबसे जरूरी काम
अगर आप दिल्ली के मतदाता हैं तो ड्राफ्ट और अंतिम सूची का इंतजार करके न बैठें।
अभी ये 5 काम करें:
1. अपना नाम Electoral Roll में चेक करें।
2. अपना EPIC/Voter ID नंबर सुरक्षित रखें।
3. पिछली SIR Electoral Roll में अपना या परिवार के सदस्य का नाम खोजें।
4. यदि नाम गायब मिले तो Form 6 और संबंधित दस्तावेजों की प्रक्रिया समझें।
5. नाम, पता, उम्र या अन्य विवरण गलत होने पर correction के लिए Form 8 की प्रक्रिया अपनाएं। (Voter Services)
ECI का Voter Services Portal SIR से जुड़ी इन सेवाओं के लिए आधिकारिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा रहा है। (Election Commission of India)
⚠️ Action Bharat Fact Check: सबसे बड़ा सवाल तारीख पर
इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण सुधार यही है:
18 अगस्त 2026 को उपलब्ध आधिकारिक ECI/Delhi CEO दस्तावेजों के अनुसार दिल्ली की SIR ड्राफ्ट Electoral Roll की तारीख 5 अगस्त 2026 है, जबकि अंतिम Electoral Roll 7 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।
इसलिए “24 अगस्त को नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होगी” वाले दावे को आधिकारिक अधिसूचना से दोबारा मिलाए बिना प्रकाशित करना उचित नहीं होगा। (Ceo Delhi)
Action Bharat की हेडलाइन
दिल्ली SIR पर बड़ा सवाल: 33% फॉर्म का डिजिटल रिकॉर्ड अधूरा, लाखों वोटरों के नाम को लेकर बढ़ी चिंता; जानिए नाम कटने पर क्या करें
Sub-head:
ड्राफ्ट सूची और अंतिम सूची में फर्क समझना जरूरी, ECI ने दावे-आपत्तियों और नाम जोड़ने/सुधारने की प्रक्रिया भी उपलब्ध कराई है।
