नागेंद्र के इस्तीफे पर BJP-JDS का हल्ला बोल, विधानसभा तक निकाला मार्च

राजनीति

बेंगलुरु। कर्नाटक में मंत्री बी. नागेंद्र को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भाजपा और JDS विधायकों ने नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर विधान सौधा तक विरोध मार्च निकाला। विपक्ष का आरोप है कि नागेंद्र से जुड़े मामले में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और करोड़ों रुपये के कथित गबन के आरोप सामने आए हैं।

🔥 विधानसभा के बाहर प्रदर्शन

भाजपा और JDS नेताओं ने महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा के सामने प्रदर्शन किया। विपक्ष के नेता आर. अशोक और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया।

विपक्षी विधायक काले कपड़े और बैज के जरिए अपना विरोध दर्ज कराना चाहते थे, लेकिन विधानसभा के प्रवेश द्वार पर मार्शलों ने काली टी-शर्ट पहने विधायकों को रोक दिया।

⚠️ नागेंद्र के खिलाफ विपक्ष के गंभीर आरोप

भाजपा नेताओं का दावा है कि नागेंद्र के खिलाफ कई आपराधिक मामले हैं और उनके खिलाफ जांच से जुड़े दस्तावेज तथा चार्जशीट भी सामने रखी गई हैं।

आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार पर नागेंद्र को बचाने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि अगर विपक्ष द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों में आरोपों से जुड़े सबूत हैं, तो सरकार कार्रवाई क्यों नहीं कर रही?

विपक्ष की मांग है कि बी. नागेंद्र को तत्काल मंत्री पद से हटाया जाए, ताकि विधानसभा का कामकाज सुचारु रूप से चल सके।

🏛️ सरकार पर बढ़ा दबाव

नागेंद्र फिलहाल कर्नाटक की शिवकुमार सरकार में योजना एवं सांख्यिकी मंत्री हैं। भाजपा और JDS पिछले कई दिनों से उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इससे पहले विपक्षी विधायकों ने काले बैज पहनकर भी विरोध किया था।

🎙️ ACTION BHARAT एंकर इंट्रो

“कर्नाटक में मंत्री बी. नागेंद्र को लेकर सियासी संग्राम तेज हो गया है। भाजपा और JDS के विधायक नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए और विधान सौधा तक मार्च निकाला। विधानसभा पहुंचने पर काली टी-शर्ट को लेकर विधायकों और मार्शलों के बीच भी विवाद हुआ। विपक्ष का आरोप है कि नागेंद्र से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और सरकार उन्हें बचा रही है। अब सवाल है—क्या नागेंद्र के इस्तीफे की मांग कर्नाटक विधानसभा के मौजूदा सत्र पर भारी पड़ेगी?”

नोट: आरोपों को खबर में विपक्ष के आरोप के रूप में ही प्रस्तुत करना उचित है; किसी आरोप को अदालत से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं लिखा जाना चाहिए।

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