नई दिल्ली। महाराष्ट्र की शिवसेना को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में उद्धव ठाकरे गुट यानी शिवसेना (UBT) ने सुप्रीम कोर्ट में शिंदे गुट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। UBT की ओर से दलील दी गई कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला गुट दल-बदल के परिणामों से लगातार लाभ उठा रहा है।
⚖️ चुनाव आयोग के फैसले पर भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट में उद्धव ठाकरे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कहा कि चुनाव आयोग ने मुख्य रूप से विधायी बहुमत के आधार पर शिवसेना का नाम और चुनाव चिन्ह शिंदे गुट को दिया था।
UBT का तर्क है कि मामले में समय पर फैसला नहीं होने के कारण शिंदे गुट को कथित दल-बदल का फायदा पहले ही मिल चुका है और वह अब भी उसका लाभ उठा रहा है।
🔥 अयोग्यता पर क्या दी गई दलील?
कामत ने दलील दी कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित होने पर सदस्य अपनी विधानसभा सदस्यता खो देते हैं।
उनके अनुसार, यदि विधानसभा अध्यक्ष समय पर फैसला नहीं करते हैं तो असाधारण परिस्थितियों में सुप्रीम कोर्ट भी दल-बदल के मुद्दे पर फैसला कर सकता है। UBT ने यह भी कहा कि कोर्ट यह निर्धारित कर सकता है कि सदस्य किस तारीख से अयोग्य हुए, भले बाद में व्यावहारिक राहत का स्वरूप अलग हो।
📅 अब शिंदे गुट की बारी
उद्धव ठाकरे गुट की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलीलें पूरी हो चुकी हैं। अब शिंदे गुट 2 सितंबर को अपनी अंतिम दलीलें पेश करेगा।
इसके बाद महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े इस लंबे समय से चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर सबकी नजर रहेगी।
🎙️ ACTION BHARAT एंकर इंट्रो
“महाराष्ट्र की सियासत से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। शिवसेना UBT ने सुप्रीम कोर्ट में शिंदे गुट पर दल-बदल कानून का फायदा उठाने का आरोप लगाया है। उद्धव ठाकरे गुट ने चुनाव आयोग के उस फैसले पर भी सवाल उठाए, जिसके तहत शिवसेना का नाम और चुनाव चिन्ह शिंदे गुट को मिला था। अब उद्धव गुट की दलीलें पूरी हो चुकी हैं और 2 सितंबर को शिंदे गुट अपनी अंतिम दलीलें रखेगा। ऐसे में सवाल है—महाराष्ट्र की शिवसेना की लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट का अगला बड़ा कदम क्या होगा?”
नोट: यह खबर सुप्रीम कोर्ट में UBT की ओर से रखी गई दलीलों पर आधारित है। आरोपों और कानूनी दावों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
