नई दिल्ली: मंगलवार और शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान हनुमान की पूजा करते हैं और उन्हें सिंदूर अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में हनुमान जी के चरणों के सिंदूर को माथे पर लगाने की भी विशेष महत्ता बताई गई है। हालांकि, दाएं और बाएं चरण से जुड़े अलग-अलग फल की मान्यताएं अलग-अलग परंपराओं में मिलती हैं।
दाएं चरण का सिंदूर क्यों लगाया जाता है?
लोकप्रिय धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी के दाएं चरण का सिंदूर माथे पर लगाने से संकटों से रक्षा, कार्यों में सफलता और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
भक्त इसे विशेष रूप से नई शुरुआत, कठिन परिस्थितियों और बाधाओं से निकलने की प्रार्थना के साथ जोड़ते हैं। हालांकि, इन दावों को आस्था और धार्मिक परंपरा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
बाएं चरण का सिंदूर किस कामना से जुड़ा है?
मान्यता के अनुसार, हनुमान जी के बाएं चरण का सिंदूर मन की शांति, नकारात्मकता से मुक्ति और शत्रु बाधाओं से राहत की कामना के लिए लगाया जाता है।
कुछ परंपराओं में इसे मानसिक तनाव और जीवन में लगातार आ रही बाधाओं से छुटकारे की प्रार्थना से भी जोड़ा जाता है।
दोनों चरणों का सिंदूर लगाने की भी परंपरा
कुछ भक्त हनुमान जी के दोनों चरणों से सिंदूर लेकर माथे पर तिलक लगाते हैं। इसे संपूर्ण सुरक्षा, शक्ति और मनोकामना की प्रार्थना का प्रतीक माना जाता है।
हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा स्वयं भी भक्तिभाव से जुड़ी है। मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालु सिंदूर, चमेली का तेल और चोला अर्पित करते हैं।
एक जरूरी बात
दाएं या बाएं चरण के सिंदूर से किसी निश्चित समस्या का समाधान या मनोकामना पूरी होने का दावा धार्मिक विश्वास है, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं। अलग-अलग क्षेत्रों और पूजा परंपराओं में इसके नियम और मान्यताएं अलग हो सकती हैं।
आस्था का सार यही है कि पूजा श्रद्धा, भक्ति और सकारात्मक भावना से की जाए।
