लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बुजुर्ग माता-पिता के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए बड़ा फैसला लिया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियमावली-2014’ में संशोधन को मंजूरी दी गई।
इस संशोधन के बाद यदि कोई संतान या आश्रित रिश्तेदार बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल नहीं करता या उनके साथ दुर्व्यवहार करता है, तो माता-पिता अपनी संपत्ति से उसे बेदखल कराने की प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे।
🎯 नियम 22 में जोड़े गए नए प्रावधान
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के अनुसार नियमावली के नियम 22 में 22क, 22ख और 22ग जोड़े गए हैं। इन नए प्रावधानों में वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति से संतान को बेदखल करने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है।
यानी अब बुजुर्गों को केवल संपत्ति से बेदखली का अधिकार बताने तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसके लिए एक निर्धारित और समयबद्ध प्रक्रिया भी बनाई गई है।
🎯 शिकायत कहां की जा सकेगी?
यदि किसी बुजुर्ग को लगता है कि उनकी संतान या कोई आश्रित रिश्तेदार उनकी देखभाल नहीं कर रहा या उनके साथ दुर्व्यवहार कर रहा है, तो वे मामले की शिकायत जिला मजिस्ट्रेट यानी DM के समक्ष कर सकेंगे।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिकायतों की सुनवाई को लंबा खींचने के बजाय 30 दिन के भीतर सुनवाई पूरी करने की व्यवस्था की गई है।
जिला मजिस्ट्रेट को ऐसे मामलों की मासिक रिपोर्ट सरकार को भेजनी होगी।
🎯 बुजुर्ग खुद शिकायत नहीं कर पाए तो?
सरकार इस बात को भी ध्यान में रख रही है कि कई वरिष्ठ नागरिक शारीरिक या अन्य कारणों से खुद सरकारी कार्यालय जाकर शिकायत नहीं कर पाते।
इसीलिए सरकार जल्द ही एक टोल-फ्री नंबर जारी करेगी। इसके माध्यम से ऐसे बुजुर्गों को शिकायत दर्ज कराने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
🎯 फैसले का उद्देश्य क्या है?
सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य बुजुर्ग माता-पिता को सम्मानजनक जीवन और उनके अधिकारों की सुरक्षा देना है।
इसके साथ ही सरकार का मानना है कि संपत्ति से बेदखली की स्पष्ट प्रक्रिया होने से उन मामलों पर भी रोक लग सकती है, जहां संतान संपत्ति के लालच में माता-पिता की देखभाल नहीं करती या उनके साथ दुर्व्यवहार करती है।
🎯 बड़ी बात
इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में ऐसे बुजुर्ग माता-पिता के लिए शिकायत और कार्रवाई का रास्ता अधिक स्पष्ट होगा, जो अपनी ही संतान की उपेक्षा या दुर्व्यवहार का सामना कर रहे हैं।
शिकायत → जिला मजिस्ट्रेट → 30 दिन में सुनवाई → नियमों के तहत संपत्ति से बेदखली की कार्रवाई।
