पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकारी व्यवस्था में शिकायतों के समयबद्ध निपटारे को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की शिकायतों का समाधान तय समय के भीतर होना चाहिए। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद सभागार में आयोजित कार्यक्रम में ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य छात्रों की शिक्षा, छात्रावास, स्कूल और कॉलेज से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना है।
🎯 30 दिन में शिकायत निपटाने की व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘सहयोग पोर्टल’ के जरिए अब तक लगभग 6.46 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से करीब 96 प्रतिशत आवेदनों का निष्पादन किया जा चुका है।
सरकार ने शिकायतों के समाधान के लिए अधिकतम 30 दिन की समयसीमा निर्धारित की है। मुख्यमंत्री के अनुसार, बिहार ऐसा पहला राज्य है जहां इस तरह समयबद्ध शिकायत निपटारे की व्यवस्था लागू की गई है।
अगर किसी शिकायत का निर्धारित समय में समाधान नहीं होता है तो संबंधित अधिकारी को मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से लगातार नोटिस भेजे जाते हैं।
- 11वें दिन पहला नोटिस दिया जाता है।
- 21वें दिन दूसरा नोटिस जारी किया जाता है।
- 25वें दिन तीसरा नोटिस दिया जाता है।
- इसके बाद भी लापरवाही जारी रहने पर निलंबन की कार्रवाई का प्रावधान है।
मुख्यमंत्री के अनुसार करीब 5 हजार मामलों में पहला नोटिस, लगभग 600 मामलों में दूसरा नोटिस और 325 मामलों में तीसरा नोटिस जारी किया जा चुका है।
🎯 छात्रों की समस्याओं के लिए विशेष शिविर
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑनलाइन व्यवस्था पहले से मौजूद है, लेकिन अब विद्यार्थी सहयोग शिविर के माध्यम से भी छात्रों की समस्याएं सुनी जाएंगी।
इसमें स्कूल-कॉलेज, छात्रावास और शिक्षा से संबंधित अन्य समस्याओं को शामिल किया गया है। सरकार का उद्देश्य छात्रों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाना है।
🎯 एक करोड़ लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सरकार के रोजगार लक्ष्य की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में 10 लाख सरकारी नौकरी और 10 लाख रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया था।
उनके मुताबिक, इस लक्ष्य के मुकाबले लगभग 12 लाख सरकारी नौकरियां दी गईं और करीब 51 लाख लोगों को रोजगार से जोड़ा गया।
अब सरकार ने एक करोड़ लोगों को सीधे सरकारी नौकरी और रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
🎯 महिलाओं के रोजगार पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस लक्ष्य में महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। बिहार सरकार महिला सशक्तीकरण को रोजगार और आर्थिक विकास से जोड़ने पर जोर दे रही है।
उन्होंने बताया कि बिहार में पंचायत और नगर निकाय चुनावों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार वर्तमान में लगभग 59-60 प्रतिशत महिलाएं जनप्रतिनिधि के रूप में निर्वाचित होकर आ रही हैं।
सरकार का दावा है कि महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक भागीदारी बढ़ाकर बिहार के विकास को नई गति देने का प्रयास किया जा रहा है।
🎯 सरकार का फोकस क्या है?
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में तीन प्रमुख मुद्दे सामने आए—
- पहला, सरकारी शिकायतों का समयबद्ध समाधान।
- दूसरा, छात्रों की शिक्षा और संबंधित समस्याओं का त्वरित निपटारा।
- तीसरा, रोजगार के अवसर बढ़ाने और महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर।
सरकार का कहना है कि शिकायतों के निपटारे में देरी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ नोटिस से लेकर निलंबन तक की कार्रवाई की जा सकती है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने का संदेश दिया गया है।
