चेन्नई के पास मंदिर में बेशकीमती पन्ना मूर्ति चोरी, तीन-स्तरीय सुरक्षा को चकमा देकर गर्भगृह तक पहुंचे चोर

क्राइम

अलार्म सिस्टम निष्क्रिय किया, CCTV कैमरों पर पेंट स्प्रे कर भागे आरोपी; 2.25 फीट ऊंची भगवान मुरुगन की मूर्ति की तलाश में जुटी पुलिस

चेन्नई। तमिलनाडु में मंदिर से भगवान मुरुगन की बेशकीमती मूर्ति चोरी होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। चेन्नई से करीब 60 किलोमीटर दक्षिण में मदुरंतकम के पास पेरुंगकरनई गांव स्थित श्री मरगथा बाला दंडायुधपाणि मुरुगन मंदिर में मंगलवार रात चोरों ने वारदात को अंजाम दिया।

पुलिस के मुताबिक, चोरी की गई मूर्ति पूरी तरह पन्ने (Emerald) से बनी थी और इसकी ऊंचाई करीब 2.25 फीट थी। मंदिर में इस मूर्ति को मुख्य देवता के रूप में स्थापित किया गया था। घटना के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है और मूर्ति बरामद करने के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं।

तीन स्तर की सुरक्षा को भी दिया चकमा

पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचने के लिए तीन मजबूत सुरक्षा दरवाजे और लोहे के शटर लगाए गए थे। इसके अलावा मंदिर में घुसपैठ की स्थिति में चेतावनी देने वाला अलार्म सिस्टम और अलग-अलग स्थानों पर CCTV कैमरे भी लगाए गए थे।

इसके बावजूद चोर सुरक्षा व्यवस्था को पार करने में कामयाब रहे।

जांचकर्ताओं का मानना है कि वारदात को अंजाम देने वाले लोगों को मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था की पहले से जानकारी हो सकती है। पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि आरोपियों ने पहले मंदिर की रेकी की थी।

पीछे की तरफ से मंदिर में दाखिल होने का शक

पुलिस के अनुसार, चोर मंदिर के पीछे स्थापित एक विशाल प्रतिमा का सहारा लेकर पिछले हिस्से तक पहुंचे। इसके बाद उन्होंने वहां से मंदिर के अंदर प्रवेश किया और गर्भगृह की ओर बढ़े।

गर्भगृह तक पहुंचने के लिए उन्हें तीन सुरक्षा दरवाजों को पार करना पड़ा। पुलिस का अनुमान है कि आरोपियों ने पूरी वारदात को पहले से तैयार योजना के तहत अंजाम दिया।

अलार्म का कनेक्शन काटा, CCTV पर पेंट छिड़का

चोरी की सबसे अहम कड़ी मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को निष्क्रिय करना बताई जा रही है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पहले सुरक्षा अलार्म के कनेक्शन को काट दिया, जिससे मूर्ति को हटाए जाने के दौरान अलार्म सक्रिय न हो सके। इसके बाद उन्होंने मंदिर में लगे CCTV कैमरों पर पेंट स्प्रे कर दिया।

इससे कैमरों की रिकॉर्डिंग में बाधा पैदा हुई और चोरों की गतिविधियां कैमरे में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हो सकीं।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी मूर्ति लेकर रात करीब 1:30 बजे मंदिर से निकल गए।

भक्तों के भेष में रेकी का भी शक

जांच अधिकारियों को आशंका है कि चोरी करने वाले गिरोह ने वारदात से पहले मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया होगा। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या आरोपी पहले आम श्रद्धालुओं के रूप में मंदिर में आए थे और उसी दौरान उन्होंने प्रवेश एवं सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी जुटाई थी।

हालांकि, अभी यह केवल जांच का एक पहलू है और पुलिस ने इस संभावना की पुष्टि नहीं की है।

सुबह पुजारी और एडमिनिस्ट्रेटर को मिली चोरी की जानकारी

मूर्ति चोरी होने का पता बुधवार सुबह चला। जब मंदिर के पुजारी और एडमिनिस्ट्रेटर मंदिर पहुंचे तो उन्हें मुख्य मूर्ति अपने स्थान से गायब मिली।

इसके बाद तत्काल चिथामुर पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और मंदिर परिसर का निरीक्षण किया।

फोरेंसिक टीम को भी बुलाया गया। टीम ने गर्भगृह और आसपास के स्थानों से फिंगरप्रिंट तथा अन्य संभावित साक्ष्य जुटाए। जांच में पुलिस ने स्निफर डॉग की भी सहायता ली।

दो विशेष टीमें गठित

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने चोरी की जांच और मूर्ति की बरामदगी के लिए दो विशेष टीमें बनाई हैं।

इन टीमों को मुख्य रूप से तीन दिशाओं में जांच आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है—

  • चोरी की गई पन्ने की मूर्ति का पता लगाना।
  • वारदात में शामिल आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी।
  • मंदिर के अंदर या बाहर से किसी व्यक्ति की संभावित भूमिका की जांच।

पुलिस मंदिर में मौजूद सुरक्षा व्यवस्था और घटना के समय वहां मौजूद लोगों से संबंधित जानकारी भी खंगाल रही है।

अलार्म चालू नहीं था, यह भी जांच का हिस्सा

प्रारंभिक जांच में पुलिस को यह जानकारी मिली है कि घटना वाली रात मंदिर का सुरक्षा अलार्म सक्रिय नहीं किया गया था। बताया गया है कि मंदिर के पुजारी पिछली रात अलार्म चालू करना भूल गए थे।

अब पुलिस इस बिंदु की भी जांच कर रही है कि अलार्म के निष्क्रिय रहने का चोरी की घटना से कोई सीधा संबंध था या यह केवल संयोग था।

इसके साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरों को मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी कैसे मिली।

अंतरराज्यीय मूर्ति तस्करी गिरोह की आशंका

मूर्ति की कीमत और उसकी ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्ता को देखते हुए पुलिस इस संभावना को गंभीरता से ले रही है कि वारदात किसी संगठित गिरोह का काम हो सकती है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या चोरी के पीछे कोई अंतरराज्यीय मूर्ति तस्करी नेटवर्क सक्रिय है या स्थानीय स्तर पर ही वारदात की साजिश रची गई थी।

फिलहाल पुलिस ने किसी गिरोह या संदिग्ध व्यक्ति का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।

2008 में मैसूर से लाकर स्थापित की गई थी मूर्ति

मंदिर से चोरी हुई भगवान मुरुगन की मूर्ति को लेकर भी पुलिस और मंदिर प्रबंधन से जानकारी जुटाई जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह मूर्ति मैसूर से लाकर वर्ष 2008 में मंदिर में स्थापित की गई थी।

पन्ने से निर्मित होने के कारण मूर्ति की आर्थिक कीमत काफी अधिक मानी जा रही है, लेकिन धार्मिक दृष्टि से भी इसका मंदिर के लिए विशेष महत्व था।

पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मूर्ति की बरामदगी

फिलहाल जांच का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य चोरी हुई बेशकीमती मूर्ति को जल्द से जल्द बरामद करना है। CCTV से जुड़े सुराग, फोरेंसिक साक्ष्य, मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और संभावित रेकी से संबंधित जानकारी को जोड़कर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि चोरी के बाद मूर्ति को कहां ले जाया गया और क्या इसके पीछे पहले से सक्रिय कोई संगठित तस्करी नेटवर्क है।

मामले में आगे की जांच और पुलिस की कार्रवाई के बाद ही चोरी की पूरी साजिश और आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

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