होर्मुज में अमेरिका का बड़ा सैन्य ऑपरेशन, 40 जहाजों को दी सुरक्षा; 1.8 करोड़ बैरल तेल सुरक्षित निकला

विदेश

अमेरिकी सेना ने जलडमरूमध्य के आसपास करीब 60 ईरानी सैन्य ठिकानों/लक्ष्यों को बनाया निशाना, ईरानी ड्रोन हमलों का किया मुकाबला; तेल आपूर्ति बहाल करने की कोशिश तेज

तेहरान/वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सेना ने अब तक के सबसे बड़े और जोखिमपूर्ण अभियानों में से एक को अंजाम दिया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार यानी 1 सितंबर 2026 को अमेरिकी सेना ने करीब 40 वाणिज्यिक जहाजों को सैन्य सुरक्षा प्रदान करते हुए लगभग 1.8 करोड़ बैरल तेल को होर्मुज जलडमरूमध्य से पार कराया।

यह अभियान ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका और ईरान के बीच फिर से सीधा सैन्य टकराव तेज हो गया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जहाजों को सुरक्षा देने के साथ-साथ अमेरिकी बलों ने जलडमरूमध्य के आसपास करीब 60 ईरानी सैन्य लक्ष्यों पर हमला किया। इन लक्ष्यों में एयर डिफेंस सिस्टम, रडार नेटवर्क, समुद्री सैन्य संसाधन, माइन बिछाने की क्षमता और संचार प्रतिष्ठान शामिल बताए गए हैं।

एक ही ऑपरेशन में हमला और जहाजों की सुरक्षा

अमेरिकी अभियान की खास बात यह रही कि सैन्य कार्रवाई और व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा एक साथ की गई।

CNN को जानकारी देने वाले दो अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने जहाजों के काफिले को होर्मुज से निकालते समय ईरानी ड्रोन हमलों का सामना किया। अमेरिकी बलों ने कई ड्रोन हमलों को रोकने के साथ एक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल को भी निष्क्रिय किया।

अमेरिकी सैन्य रणनीति का उद्देश्य केवल ईरानी सैन्य क्षमता को कमजोर करना नहीं था, बल्कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक पर वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को बनाए रखना भी था।

1.8 करोड़ बैरल तेल क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। युद्ध से पहले इस रास्ते से रोजाना लगभग 2 करोड़ बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते थे।

ऐसे में मंगलवार को करीब 1.8 करोड़ बैरल तेल का निकलना युद्ध शुरू होने के बाद का एक बड़ा दैनिक आंकड़ा माना जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक यह सामान्य युद्ध-पूर्व दैनिक प्रवाह का लगभग 90 प्रतिशत है। हालांकि, यह एक दिन का असाधारण स्तर है और इसका मतलब यह नहीं है कि इतनी मात्रा में तेल की आवाजाही अब नियमित रूप से शुरू हो गई है।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इससे पहले सोमवार को भी 1.7 करोड़ से अधिक बैरल तेल होर्मुज से गुजरा था। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने भी इस आंकड़े की जानकारी दी थी।

होर्मुज पर क्यों छिड़ी है इतनी बड़ी जंग?

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देशों के तेल निर्यात के लिए यह रास्ता बेहद अहम है।

ईरान लंबे समय से इस जलमार्ग में अपनी सामरिक स्थिति का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए करता रहा है। मौजूदा संघर्ष में जलडमरूमध्य को लेकर टकराव और बढ़ गया है।

अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी और जलमार्ग में सैन्य निगरानी बढ़ाई है, जबकि ईरान ने अमेरिकी तथा उसके सहयोगी देशों के सैन्य ठिकानों और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी हितों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की है। ब्रिटेन की हाउस ऑफ कॉमन्स लाइब्रेरी के हालिया विश्लेषण के अनुसार, संघर्ष के दौरान दोनों पक्षों की नाकेबंदी और जलमार्ग को लेकर तनाव के कारण होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है।

अमेरिकी हमलों में किन ईरानी लक्ष्यों को निशाना बनाया गया?

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक मंगलवार के अभियान में होर्मुज के आसपास करीब 60 सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया गया।

इनमें मुख्य रूप से:

  • ईरानी एयर डिफेंस साइट्स
  • रडार सिस्टम
  • समुद्री सैन्य संसाधन
  • समुद्री माइन बिछाने की क्षमता से जुड़े ठिकाने
  • कम्युनिकेशन साइट्स
  • वाणिज्यिक जहाजों पर हमला करने की क्षमता से जुड़े संसाधन

शामिल थे।

इसलिए इसे केवल “60 सैन्य ठिकाने पूरी तरह तबाह” कहना सही नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक यह संख्या हमले किए गए सैन्य लक्ष्यों की है और हर लक्ष्य के पूरी तरह नष्ट होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ईरानी ड्रोन और मिसाइलों से भी मुकाबला

अमेरिकी सेना के मुताबिक, जहाजों की सुरक्षा के दौरान ईरान की ओर से ड्रोन हमलों की कई लहरें आईं। अमेरिकी सैन्य बलों ने इन हमलों को रोकने की कोशिश की और एक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल को भी निष्क्रिय किया।

इससे साफ है कि होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों को निकालना केवल नौसैनिक एस्कॉर्ट का सामान्य अभियान नहीं था, बल्कि यह वास्तविक युद्ध क्षेत्र के बीच से जहाजों को सुरक्षित निकालने का अभियान था।

तेल टैंकर पर हमला, दो फिलीपीनी नाविकों की मौत

इसी बीच होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। सऊदी झंडे वाले तेल टैंकर Sidr से जुड़ी घटना में दो फिलीपीनी नाविकों की मौत हो गई।

सऊदी शिपिंग कंपनी Bahri के अनुसार, 31 अगस्त की रात जहाज एक सुरक्षा घटना में शामिल हुआ था। रिपोर्टों के मुताबिक जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ था। इस घटना में दो फिलीपीनी क्रू सदस्यों की मौत हुई, जबकि बाकी 14 फिलीपीनी क्रू सदस्य सुरक्षित बताए गए।

इस घटना ने यह सवाल और गंभीर कर दिया है कि युद्ध के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक पर वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित की जाए।

ईरान ने भी अमेरिका के सहयोगी देशों पर किया जवाबी हमला

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों के खिलाफ मिसाइल एवं ड्रोन हमले किए।

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उसने बहरीन, जॉर्डन, कुवैत और इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। दूसरी ओर, इन देशों की ओर से कई हमलों को हवा में ही रोकने की जानकारी दी गई है। जॉर्डन ने 13 बैलिस्टिक मिसाइलों के अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने की बात कही, जिनमें से 10 को इंटरसेप्ट करने का दावा किया गया।

बहरीन ने भी ईरानी ड्रोन हमलों को अपने एयर डिफेंस सिस्टम से रोकने की जानकारी दी है।

ईरान में अमेरिकी हमलों से हताहतों की खबर

ईरानी सरकारी मीडिया ने अमेरिकी हमलों में 18 लोगों की मौत और 108 लोगों के घायल होने का दावा किया है। यह आंकड़ा ईरान के स्वास्थ्य मंत्री के हवाले से सामने आया है।

अमेरिका ने नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाने से इनकार किया है। अलग-अलग घटनाओं और हताहतों के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है, इसलिए युद्ध क्षेत्र से सामने आ रहे दावों को सावधानी के साथ देखा जा रहा है।

शादी समारोह पर हमले को लेकर भी विवाद

अमेरिकी कार्रवाई के बाद दक्षिणी ईरान में एक शादी समारोह के पास हुए विस्फोट को लेकर भी विवाद सामने आया है। ईरानी पक्ष ने अमेरिकी हमले में नागरिकों के मारे जाने का आरोप लगाया है, जबकि अमेरिका का कहना है कि उसके अभियानों का लक्ष्य सैन्य ढांचा था और नागरिकों को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया। इस घटना में मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग रिपोर्टें सामने आई हैं।

तेल की कीमतों पर सीधा असर

होर्मुज संकट का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। युद्ध के कारण जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही में भारी गिरावट आई है, जिससे बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली।

3 सितंबर की रिपोर्टों के मुताबिक Brent crude करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था और पिछले कुछ दिनों में कीमतों में तेज उछाल आया था। बाजार की नजर अब इस बात पर है कि अमेरिका कितने समय तक होर्मुज में जहाजों की सैन्य सुरक्षा बनाए रख सकता है और ईरान इस पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है।

अमेरिका के सामने बड़ी चुनौती

अमेरिका के लिए होर्मुज अभियान केवल सैन्य शक्ति दिखाने का मामला नहीं है। इसके साथ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखने की चुनौती भी जुड़ी हुई है।

यदि बड़ी संख्या में तेल टैंकर नियमित रूप से इस मार्ग से गुजरते हैं तो इससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति संबंधी दबाव कम हो सकता है। लेकिन यदि ईरान लगातार ड्रोन, मिसाइल या समुद्री माइन के जरिए जहाजों को निशाना बनाता रहा तो अमेरिकी सेना को लंबे समय तक महंगे और जोखिमपूर्ण एस्कॉर्ट ऑपरेशन चलाने पड़ सकते हैं।

अब आगे क्या?

अमेरिका ने साफ संकेत दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद नहीं होने देना चाहता। दूसरी तरफ ईरान भी अमेरिकी सैन्य दबाव के सामने पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा है।

ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान संघर्ष का सबसे महत्वपूर्ण मोर्चा बना रह सकता है। एक तरफ अमेरिका सैन्य दबाव बढ़ाकर तेल और वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित करना चाहता है, वहीं ईरान अमेरिकी उपस्थिति और उसके सहयोगी देशों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर रहा है।

सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या सैन्य टकराव सीमित रहेगा या फिर होर्मुज में लगातार हमलों के कारण संघर्ष पूरे खाड़ी क्षेत्र में और व्यापक हो जाएगा।

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