अमेरिकी सेना की खुफिया जानकारी लीक होने से मचा हड़कंप, पेंटागन के करीब 50 अधिकारियों का हुआ पॉलीग्राफ टेस्ट

विदेश

वॉशिंगटन। अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान में संवेदनशील और खुफिया सूचनाओं के लीक होने को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। अमेरिकी सरकार के जांचकर्ताओं ने ज्वाइंट स्टाफ के करीब 50 अधिकारियों और कर्मचारियों का पॉलीग्राफ यानी लाई डिटेक्टर टेस्ट कराया है। यह जांच उन गोपनीय जानकारियों के मीडिया तक पहुंचने के मामले में की गई, जिनमें अमेरिका के उन्नत हथियारों और उनके घटते भंडार से जुड़ी संवेदनशील सूचनाएं शामिल थीं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जांच का एक प्रमुख उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या सैन्य अधिकारियों या नागरिक कर्मचारियों में से किसी ने जानबूझकर मीडिया को ऐसी गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराई थी।

लंबी दूरी की मिसाइल और पैट्रियट इंटरसेप्टर से जुड़ी थी जानकारी

रिपोर्ट के अनुसार, लीक हुई संवेदनशील सूचनाओं में अमेरिका के महत्वपूर्ण युद्धक हथियारों के भंडार से जुड़ी जानकारी शामिल थी। इनमें लंबी दूरी की मिसाइलों और पैट्रियट इंटरसेप्टर जैसे हथियारों के घटते स्टॉक से संबंधित विवरण भी बताए गए हैं।

इन हथियार प्रणालियों से जुड़ी जानकारी को अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में इनके भंडार या उपलब्धता से संबंधित सूचनाओं के सार्वजनिक होने को अमेरिकी रक्षा तंत्र गंभीर सुरक्षा मामला मान रहा है।

अगस्त में करीब 50 लोगों का हुआ टेस्ट

सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में ज्वाइंट स्टाफ से जुड़े लगभग 50 लोगों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया। जांचकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की कि क्या इनमें से किसी व्यक्ति ने मीडिया को वर्गीकृत या खुफिया जानकारी लीक की थी।

अमेरिकी ज्वाइंट स्टाफ में लगभग 1,500 से 2,000 अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। यह संगठन अमेरिका के अलग-अलग कॉम्बैटेंट कमांड के साथ ऑपरेशन, रक्षा नीति और युद्ध संबंधी योजनाओं के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इतने बड़े संगठन में करीब 50 लोगों को एक ही लीक जांच के सिलसिले में पॉलीग्राफ टेस्ट से गुजरना असामान्य माना जा रहा है।

पहले भी कई अधिकारियों की हुई थी जांच

यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी सैन्य अधिकारियों से लीक के संबंध में पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया हो। रिपोर्टों के अनुसार, गर्मियों की शुरुआत में यूएस सेंट्रल कमांड और अन्य कॉम्बैटेंट कमांड से जुड़े कई दर्जन अधिकारियों का भी इसी तरह परीक्षण किया गया था।

हालांकि, सुरक्षा मंजूरी रखने वाले अधिकारियों के लिए पॉलीग्राफ टेस्ट पूरी तरह असामान्य प्रक्रिया नहीं है। टॉप-सीक्रेट जानकारी या विशेष संवेदनशील कार्यक्रमों तक पहुंच रखने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा मंजूरी की समय-समय पर समीक्षा की जाती है।

लेकिन मौजूदा जांच में एक साथ इतने लोगों को शामिल किया जाना इसकी गंभीरता को अलग बनाता है।

ट्रंप लीक की घटनाओं से बेहद नाराज

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन खुफिया लीक को लेकर काफी नाराज थे। जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि हथियारों से संबंधित जानकारी तक पहुंच रखने वाले लोगों की संख्या सीमित थी।

इसी वजह से अमेरिकी अधिकारियों के सामने यह सवाल भी खड़ा हुआ कि संवेदनशील सूचनाएं आखिर बाहर कैसे पहुंचीं। जांच का एक पहलू यह भी रहा कि कहीं किसी व्यक्ति ने जानबूझकर किसी विदेशी खुफिया एजेंसी के लिए काम करते हुए जानकारी तो साझा नहीं की।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि किसी अधिकारी का विदेशी एजेंसी से संबंध सामने आया है।

सभी वरिष्ठ अधिकारियों का नहीं हुआ पॉलीग्राफ टेस्ट

जांच का दायरा बड़ा होने के बावजूद सभी वरिष्ठ अधिकारियों का पॉलीग्राफ टेस्ट नहीं कराया गया

एक वरिष्ठ पेंटागन अधिकारी के अनुसार, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन इस परीक्षण में शामिल नहीं थे।

वहीं, सूत्रों के मुताबिक मीडिया को जानकारी लीक करने से संबंधित पूछे गए विशेष सवालों में परीक्षण किए गए लोगों में से किसी को भी फेल नहीं बताया गया

इसका मतलब यह है कि फिलहाल पॉलीग्राफ टेस्ट के आधार पर किसी व्यक्ति को लीक के लिए जिम्मेदार ठहराने वाली जानकारी सामने नहीं आई है।

जुलाई में बनी थी संयुक्त टास्क फोर्स

खुफिया लीक की जांच को लेकर अमेरिकी रक्षा विभाग पहले ही बड़ा कदम उठा चुका है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने जुलाई में पेंटागन और अमेरिकी न्याय विभाग की संयुक्त टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की थी।

इस टास्क फोर्स का उद्देश्य संदिग्ध सूचना लीक की पहचान करना और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता तैयार करना है।

हेगसेथ ने उस समय जोर दिया था कि संवेदनशील सैन्य जानकारी के लीक होने की स्थिति में रक्षा विभाग को न्याय विभाग और एफबीआई जैसी जांच एजेंसियों को कार्रवाई के लिए आवश्यक जानकारी जल्द उपलब्ध करानी चाहिए।

उनका तर्क था कि खुफिया जानकारी के लीक होने से लोगों की जान और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों को खतरा हो सकता है।

इस बार FBI नहीं, सेना ने खुद की जांच

मौजूदा पॉलीग्राफ टेस्ट की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें एफबीआई शामिल नहीं थी। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इस दौर की जांच अमेरिकी सेना ने स्वयं की।

अमेरिका में पॉलीग्राफ टेस्ट के इस्तेमाल को लेकर संघीय कानून और पेंटागन के अपने नियम लागू होते हैं। इसके लिए कुछ प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय भी निर्धारित हैं। विशेष परिस्थितियों में कर्मचारियों की सहमति समेत कई नियमों का पालन करना होता है।

इसलिए यह जांच केवल पॉलीग्राफ टेस्ट तक सीमित नहीं मानी जा रही है। अमेरिकी अधिकारी लीक के स्रोत, जानकारी तक पहुंच रखने वाले लोगों और सूचना के मीडिया तक पहुंचने की परिस्थितियों की भी पड़ताल कर रहे हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल—खुफिया जानकारी लीक हुई कैसे?

करीब 50 अधिकारियों और कर्मचारियों के पॉलीग्राफ टेस्ट के बावजूद अभी इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका की अत्यंत संवेदनशील रक्षा जानकारी मीडिया तक आखिर पहुंची कैसे?

जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि जानकारी किसी कर्मचारी की जानबूझकर की गई कार्रवाई का परिणाम थी, अनधिकृत तरीके से साझा की गई या सुरक्षा व्यवस्था में किसी अन्य स्तर पर सेंध लगी।

फिलहाल किसी विशेष अधिकारी को इन लीक के लिए दोषी ठहराए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। जांच जारी है और आने वाले समय में इसके आधार पर आगे की प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

न्यूज़ फॉर एक्शन भारत: अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान में इतने बड़े स्तर पर पॉलीग्राफ टेस्ट कराया जाना इस बात का संकेत है कि प्रशासन संवेदनशील सैन्य सूचनाओं के लीक को लेकर बेहद गंभीर है। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *