नई दिल्ली | देशभर में आज जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मंदिरों से लेकर घरों तक भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां हैं। आधी रात को श्रीकृष्ण के जन्म के समय मंदिरों में घंटियां बजती हैं, शंखनाद होता है और भक्त जयकारों के साथ बाल गोपाल के जन्म का उत्सव मनाते हैं।
इसी दौरान एक जयकारा लगभग हर कृष्ण मंदिर और घर में सुनाई देता है—“नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की…”
यह सिर्फ उत्सव के दौरान लगाया जाने वाला जयकारा नहीं है, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के गोकुल पहुंचने और नंद बाबा के घर आनंद छाने की धार्मिक कथा से जुड़ा हुआ है। जन्माष्टमी पर इस जयकारे का विशेष महत्व माना जाता है।
‘नंद के आनंद भयो’ का क्या है अर्थ?
“नंद के आनंद भयो” का सीधा अर्थ है कि नंद बाबा के घर आनंद छा गया। वहीं “जय कन्हैया लाल की” का अर्थ भगवान श्रीकृष्ण की जय-जयकार से है।
धार्मिक परंपरा में इस जयकारे को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और उनके गोकुल आगमन की खुशी व्यक्त करने का माध्यम माना जाता है।
मान्यता है कि जब गोकुलवासियों को नंद बाबा के घर बालक के जन्म की खबर मिली, तो पूरे गोकुल में उत्सव का माहौल बन गया। लोग नंद भवन पहुंचकर नंद बाबा और माता यशोदा को बधाई देने लगे।
इसी खुशी को व्यक्त करते हुए “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” जैसे जयकारे लगाए जाते हैं।
श्रीकृष्ण का जन्म कहां हुआ था?
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में देवकी और वसुदेव के यहां हुआ था। उस समय मथुरा के राजा कंस का अत्याचार था और भविष्यवाणी के अनुसार देवकी की आठवीं संतान से कंस के विनाश की बात कही गई थी।
कंस ने देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया था। देवकी की संतानों को लेकर कंस भयभीत था।
मान्यता के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। जन्म के बाद वसुदेव उन्हें कंस से बचाने के लिए मथुरा से गोकुल ले गए।
वसुदेव बाल कृष्ण को लेकर पहुंचे गोकुल
पौराणिक कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण के जन्म के बाद वसुदेव उन्हें एक टोकरी में लेकर गोकुल की ओर निकल पड़े। रास्ते में यमुना नदी को पार करने का प्रसंग भी कृष्ण जन्म कथा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
गोकुल पहुंचने के बाद वसुदेव ने बाल कृष्ण को नंद बाबा के घर पहुंचाया। इसी दौरान वहां माता यशोदा के यहां जन्मी कन्या को लेकर वसुदेव वापस मथुरा लौट आए।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी घटना के बाद श्रीकृष्ण का पालन-पोषण नंद बाबा और माता यशोदा के घर हुआ और उन्हें गोकुल के लोग अपने प्रिय कन्हैया के रूप में मानने लगे।
सुबह गोकुल में छा गया था उत्सव का माहौल
कृष्ण जन्म की कथा में आगे बताया जाता है कि जब गोकुलवासियों को नंद बाबा के घर बालक के जन्म की जानकारी मिली तो वहां खुशी की लहर दौड़ गई।
नंद भवन में बधाई देने वालों की भीड़ जुटने लगी। लोग दूध, दही, माखन और अन्य उपहार लेकर पहुंचे। पूरे गोकुल में उत्सव जैसा माहौल बन गया।
इसी प्रसंग को याद करते हुए जन्माष्टमी के अवसर पर भक्त नंद बाबा के घर आनंद होने और कन्हैया के आगमन की खुशी में जयकारे लगाते हैं।
नंद बाबा के नाम से क्यों जुड़ा है जयकारा?
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की मूल कथा मथुरा से जुड़ी है, लेकिन उनके बाल स्वरूप और बचपन की लीलाओं का प्रमुख संबंध गोकुल और नंद बाबा के परिवार से माना जाता है।
श्रीकृष्ण का पालन-पोषण नंद बाबा और माता यशोदा ने किया। इसी कारण कृष्ण के बाल स्वरूप को नंदलाल, कन्हैया और लड्डू गोपाल जैसे नामों से भी भक्त प्रेमपूर्वक पुकारते हैं।
“नंद के आनंद भयो” इसी भाव को व्यक्त करता है कि नंद बाबा के घर भगवान के बाल स्वरूप में आनंद का आगमन हुआ।
जन्माष्टमी पर आधी रात को क्यों लगता है जयकारा?
जन्माष्टमी की पूजा परंपरा में मध्यरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म रात के समय हुआ था।
इसीलिए भक्त रात में व्रत और पूजा के बाद श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं। जैसे ही जन्मोत्सव का समय आता है, मंदिरों में घंटियां और शंख बजाए जाते हैं तथा भगवान श्रीकृष्ण की जय-जयकार की जाती है।
“नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” भी इसी जन्मोत्सव का प्रमुख हिस्सा बन गया है।
जयकारे में छिपा है उत्सव और भक्ति का भाव
इस जयकारे का महत्व केवल इसके शब्दों तक सीमित नहीं है। इसमें कृष्ण जन्म की खुशी, नंद बाबा के परिवार के आनंद और भक्तों की भगवान के प्रति श्रद्धा का भाव जुड़ा हुआ है।
जन्माष्टमी पर जब भक्त सामूहिक रूप से यह जयकारा लगाते हैं, तो इसका उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी मनाना और उनके बाल स्वरूप के प्रति अपनी भक्ति प्रकट करना होता है।
News for Action Bharat की नजर
“नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” जन्माष्टमी के सबसे लोकप्रिय जयकारों में से एक है। धार्मिक परंपरा में इसे नंद बाबा के घर श्रीकृष्ण के आगमन की खुशी से जोड़ा जाता है।
श्रीकृष्ण की जन्म कथा मथुरा, वसुदेव-देवकी, कंस, गोकुल और नंद-यशोदा से जुड़े कई प्रसंगों को अपने भीतर समेटे हुए है। यही वजह है कि जन्माष्टमी की रात जब बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाया जाता है, तो इस जयकारे के साथ भक्तों के बीच उत्साह और भक्ति का माहौल बन जाता है।
“नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की…” केवल एक जयकारा नहीं, बल्कि कृष्ण जन्म की खुशी और भक्तिभाव को व्यक्त करने वाली धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।
