नई दिल्ली | इंस्टाग्राम पर बच्चों से जुड़ी यौन शोषण सामग्री (CSAM) के कथित प्रसार और प्रचार को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने मामले को गंभीर मानवाधिकार और बाल सुरक्षा से जुड़ा विषय मानते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B) को नोटिस जारी किया है।
आयोग ने संबंधित मंत्रालयों से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस की ओर से मामले में की जा रही जांच भी जारी है।
सिर्फ कंटेंट अपलोड करने का मामला नहीं
NHRC की चिंता केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री किसी यूजर ने अपलोड की या नहीं। आयोग इस पूरे सिस्टम की भूमिका की जांच कर रहा है, जिसके माध्यम से किसी सामग्री को उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाया, सुझाया या प्रचारित किया जा सकता है।
आयोग यह भी देख रहा है कि प्लेटफॉर्म की एल्गोरिदम आधारित सिफारिश प्रणाली, कंटेंट क्यूरेशन और विज्ञापन व्यवस्था का इस तरह की आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार में कोई योगदान तो नहीं है।
मामले में यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि यदि किसी प्लेटफॉर्म के तकनीकी सिस्टम किसी सामग्री को केवल होस्ट करने के बजाय उसे व्यवस्थित, सुझाने या ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो उसकी कानूनी जिम्मेदारी किस सीमा तक बनती है।
I&B मंत्रालय से अहम सवाल
NHRC ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से विशेष रूप से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या मेटा की गतिविधियां सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट के प्रकाशक या प्रकाशक जैसी भूमिका के दायरे में आती हैं।
आयोग के सामने यह सवाल है कि जहां प्लेटफॉर्म के सिस्टम कंटेंट को बनाने, उसमें बदलाव करने, उसे क्यूरेट करने, सुझाव देने, प्रकाशित करने या उसकी पहुंच बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, वहां प्लेटफॉर्म को केवल एक तकनीकी मध्यस्थ मानने की सीमा क्या होगी।
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी प्लेटफॉर्म की कानूनी जिम्मेदारी उसकी वास्तविक भूमिका और लागू कानूनों के आधार पर तय होती है।
‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा पर भी सवाल
मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
आम तौर पर इंटरमीडियरी के लिए उपलब्ध इस कानूनी सुरक्षा का संबंध यूजर्स द्वारा अपलोड किए गए कंटेंट को लेकर उसकी जिम्मेदारी से होता है, लेकिन यह सुरक्षा कानून में निर्धारित शर्तों के अधीन है।
NHRC की जांच में यह पहलू भी सामने आया है कि यदि कोई प्लेटफॉर्म केवल यूजर को सामग्री अपलोड करने की सुविधा देने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अपने तकनीकी टूल्स और एल्गोरिदम के माध्यम से सामग्री को संपादित करने, कैप्शन सुझाने, क्यूरेट करने या उसकी पहुंच बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाता है, तो उसकी कानूनी स्थिति का अलग तरीके से परीक्षण किया जाना चाहिए।
NHRC सदस्य प्रियांक कानूनगो ने उठाया मुद्दा
NHRC सदस्य प्रियांक कानूनगो ने मामले को लेकर प्लेटफॉर्म की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भूमिका का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि सामग्री मूल रूप से किसी यूजर ने अपलोड की थी।
यदि प्लेटफॉर्म के अपने सिस्टम किसी सामग्री की प्रस्तुति, सिफारिश और पहुंच बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो उसकी जिम्मेदारी और नियामकीय स्थिति पर भी विचार करना जरूरी हो जाता है।
इसी आधार पर आयोग यह जांच कर रहा है कि संबंधित प्लेटफॉर्म को केवल ‘इंटरमीडियरी’ मानकर कानूनी सुरक्षा दी जा सकती है या उसकी कुछ गतिविधियां उसे अलग नियामकीय श्रेणी में ले जाती हैं।
MeitY और दिल्ली पुलिस की भूमिका भी जांच में
NHRC के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से मेटा को नोटिस जारी किया गया है। वहीं दिल्ली पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है।
जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित आपत्तिजनक सामग्री प्लेटफॉर्म पर किस तरह मौजूद थी और उसके प्रसार से जुड़े तकनीकी तथा अन्य पहलू क्या थे।
साथ ही संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लागू नियमों और व्यवस्थाओं की समीक्षा भी की जा रही है।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा बनी बड़ा सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में नाबालिग उपयोगकर्ता मौजूद हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बच्चों से संबंधित अवैध और शोषणकारी सामग्री को न केवल हटाया जाए, बल्कि उसके प्रसार और दोबारा सामने आने की संभावना को रोकने के लिए प्रभावी तकनीकी व्यवस्था भी मौजूद हो।
मामले में अब मंत्रालयों के जवाब और दिल्ली पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी। इन्हीं के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित सामग्री प्लेटफॉर्म पर किस प्रकार पहुंची, उसकी पहचान और रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए गए तथा प्लेटफॉर्म की तकनीकी प्रणालियों की भूमिका कितनी थी।
News for Action Bharat की नजर
इंस्टाग्राम से जुड़े इस मामले में NHRC का हस्तक्षेप सिर्फ एक सोशल मीडिया पोस्ट या अकाउंट की जांच तक सीमित नहीं है। आयोग ने प्लेटफॉर्म की तकनीकी भूमिका, एल्गोरिदम, कंटेंट क्यूरेशन, विज्ञापन व्यवस्था और ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा जैसे व्यापक सवाल उठाए हैं।
अब असली परीक्षा यह होगी कि MeitY और I&B मंत्रालय NHRC के सवालों का क्या जवाब देते हैं और दिल्ली पुलिस की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। खास तौर पर यह तय होना महत्वपूर्ण होगा कि प्लेटफॉर्म की भूमिका केवल यूजर द्वारा अपलोड की गई सामग्री को उपलब्ध कराने तक थी या उसके सिस्टम ने कथित आपत्तिजनक सामग्री की पहुंच बढ़ाने में भी कोई भूमिका निभाई।
मामला जांच के स्तर पर है। इसलिए किसी व्यक्ति या संस्था की आपराधिक जिम्मेदारी के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकता है।
