करोड़ों के फ्लैट्स, फिर भी बदहाल व्यवस्था: हल्की बारिश में जलमग्न बेसमेंट, गिरी दीवारें; RWA ने मांगा स्ट्रक्चरल ऑडिट

दिल्ली

नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के वसंत कुंज जैसे पॉश इलाके में करोड़ों रुपये की कीमत वाले फ्लैट्स में रहने वाले लोगों को इन दिनों बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सेक्टर ई-1 की सोसायटी में हल्की बारिश के बाद बेसमेंट पार्किंग में पानी भरने, बाहरी चारदीवारियां गिरने और वाहनों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाओं ने निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

निवासियों का आरोप है कि बारिश के दौरान बेसमेंट पार्किंग में पानी घुटनों तक पहुंच जाता है। वहीं, हाल में हुई बारिश के बाद सोसायटी के अलग-अलग हिस्सों में दीवारें गिर गईं। इससे पार्किंग में खड़े वाहन क्षतिग्रस्त हुए। एक बिजली पैनल के गिरने से करंट फैलने का खतरा भी पैदा हुआ।

इन घटनाओं के बाद सेक्टर ई, वसंत कुंज रेजीडेंट्स ज्वाइंट फोरम ने संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर सोसायटी का तत्काल स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग की है।

हल्की बारिश में बेसमेंट पार्किंग जलमग्न

निवासियों के मुताबिक, सोसायटी के एफ-ब्लॉक में डीडीए की ओर से आवंटित बेसमेंट पार्किंग में बारिश के दौरान पानी भरने की समस्या लंबे समय से बनी हुई है।

हालिया बारिश के बाद स्थिति और खराब हो गई। लोगों का कहना है कि पानी इतना भर गया कि पार्किंग में खड़े वाहनों तक पहुंच गया। इससे न केवल गाड़ियों को नुकसान का खतरा बना रहता है, बल्कि बिजली और अन्य तकनीकी प्रणालियों को लेकर भी सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा होती हैं।

निवासियों का सवाल है कि यदि करोड़ों रुपये की संपत्ति वाले आवासीय परिसर में सामान्य बारिश के बाद ही बेसमेंट पार्किंग जलमग्न हो जाए, तो भारी बारिश के दौरान स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है।

दो बाहरी चारदीवारियां ढहीं, चार वाहन क्षतिग्रस्त

बारिश के दौरान सोसायटी के ई-7 और डी-9 ब्लॉक में डीडीए की ओर से बनाई गई दो बाहरी चारदीवारियां ढह गईं।

इन दीवारों के पास ओपन पार्किंग में वाहन खड़े थे। दीवार गिरने के कारण वहां खड़े चार वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।

निवासियों का कहना है कि गनीमत रही कि दीवार गिरने के समय उसके आसपास कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।

दीवार गिरने की घटनाओं ने निर्माण की गुणवत्ता और लंबे समय से किए जा रहे रखरखाव पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिजली पैनल गिरने से करंट का खतरा

मामले में सबसे गंभीर चिंता बिजली व्यवस्था को लेकर भी सामने आई है। निवासियों के अनुसार, एक बिजली पैनल के गिरने के बाद वहां करंट फैलने की आशंका पैदा हो गई थी।

बारिश के दौरान पानी और बिजली के उपकरणों का संपर्क किसी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है। ऐसे में स्थानीय लोगों ने बिजली व्यवस्था का तत्काल निरीक्षण और क्षतिग्रस्त पैनल को सुरक्षित तरीके से दुरुस्त कराने की मांग की है।

पेड़ गिरने से दो कारों को नुकसान

सोसायटी में केवल दीवार गिरने की घटनाएं ही नहीं हुईं। ए-1 और ए-2 ब्लॉक के बीच एक पेड़ भी गिर गया, जिससे दो वाहनों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।

निवासियों का कहना है कि बारिश और तेज हवा के दौरान कमजोर पेड़ या जर्जर ढांचे गिरने का खतरा लगातार बना रहता है। इसलिए सोसायटी परिसर में पेड़ों और सभी बाहरी संरचनाओं की सुरक्षा जांच भी जरूरी है।

RWA ने अधिकारियों को लिखा पत्र

घटनाओं के बाद सेक्टर ई, वसंत कुंज रेजीडेंट्स ज्वाइंट फोरम ने दक्षिणी दिल्ली के सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी, विधायक कैलाश गहलोत और डीडीए अधिकारियों को पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

RWA की प्रमुख मांगों में सोसायटी का स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट, गिरी हुई दीवारों का पुनर्निर्माण, बिजली पैनल की मरम्मत और बेसमेंट पार्किंग में जलभराव की स्थायी समस्या का समाधान शामिल है।

फोरम ने प्रधानमंत्री और दिल्ली के मुख्यमंत्री को भी ईमेल के माध्यम से मामले की जानकारी देने की बात कही है।

RWA का सवाल- हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?

निवासियों का कहना है कि यदि निर्माण अथवा रखरखाव से जुड़ी समस्याओं की समय रहते जांच नहीं की गई और भविष्य में कोई बड़ा हादसा हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा।

RWA का आरोप है कि दीवारों के गिरने की घटनाएं केवल बारिश का परिणाम मानकर नजरअंदाज नहीं की जानी चाहिए। इन घटनाओं से निर्माण गुणवत्ता, इस्तेमाल की गई सामग्री और रखरखाव की स्थिति की जांच की आवश्यकता सामने आती है।

निवासियों ने बताई अपनी परेशानी

RWA ज्वाइंट फोरम के संयोजक मुनेश कुमार के मुताबिक, नामी कॉलोनी में रहने के बावजूद लोग बुनियादी सुविधाओं को लेकर परेशान हैं। उनका कहना है कि हल्की बारिश में पेड़ और दीवारें गिरने की घटनाओं से लोगों में डर का माहौल है।

स्थानीय निवासी प्रवीण धीमान ने दीवार गिरने की घटनाओं को गंभीर बताते हुए तत्काल सुरक्षा ऑडिट की मांग की। उनके अनुसार, एक ही दिन में दो दीवारों का गिरना निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव की जांच की जरूरत को दर्शाता है।

एक अन्य निवासी बिम्मी ने कहा कि दीवार गिरने से कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं और बेसमेंट पार्किंग में हल्की बारिश के बाद ही घुटनों तक पानी भर जाता है।

कार मालिक को भारी नुकसान

दीवार गिरने से प्रभावित वाहन मालिक गंगेश यादव ने बताया कि उनकी कार डीडीए की आवंटित ओपन एरिया पार्किंग में खड़ी थी। दीवार गिरने से वाहन के आगे और पीछे की लाइट टूट गईं तथा बंपर और बोनट को भी नुकसान पहुंचा।

ऐसे में प्रभावित वाहन मालिकों ने नुकसान की भरपाई और पार्किंग क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

RWA की प्रमुख मांगें

निवासियों और RWA ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं—

  1. पूरी सोसायटी का तत्काल स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराया जाए।
  2. गिरी हुई चारदीवारियों का सुरक्षित तरीके से पुनर्निर्माण किया जाए।
  3. क्षतिग्रस्त बिजली पैनल की तत्काल मरम्मत कराई जाए।
  4. बेसमेंट पार्किंग में जलभराव की स्थायी समस्या का समाधान किया जाए।
  5. प्रभावित पार्किंग क्षेत्रों का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए।
  6. सोसायटी के खुले और संवेदनशील हिस्सों को तत्काल सुरक्षित किया जाए।
  7. बारिश के दौरान पेड़ और अन्य संरचनाओं से होने वाले खतरे का निरीक्षण कराया जाए।
  8. क्षतिग्रस्त वाहनों के मामले में जिम्मेदारी और मुआवजे की स्थिति स्पष्ट की जाए।

करोड़ों की संपत्ति, लेकिन सुरक्षा पर सवाल

वसंत कुंज की इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है—क्या महंगे और प्रतिष्ठित आवासीय परिसरों में रहने वाले लोगों को भी बुनियादी सुरक्षा और जलनिकासी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ेगा?

हल्की बारिश में बेसमेंट का जलमग्न होना, चारदीवारियों का गिरना, बिजली पैनल के क्षतिग्रस्त होने और पेड़ गिरने से वाहनों को नुकसान पहुंचना अलग-अलग घटनाएं जरूर हैं, लेकिन इनके पीछे यदि रखरखाव या संरचनात्मक कमजोरी जैसी कोई साझा वजह है तो उसकी तकनीकी जांच जरूरी है।

अब देखना होगा कि संबंधित विभाग RWA की शिकायत पर कितना जल्द निरीक्षण कराते हैं और क्या सोसायटी का स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाती है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—बारिश के बाद दीवारें और पार्किंग डूबने की घटनाएं चेतावनी हैं, तो क्या अगली भारी बारिश से पहले जिम्मेदार विभाग जागेंगे?

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