बिजनेस (Action Bharat) | रूस-यूक्रेन युद्ध का असर अब वैश्विक खाद्य बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। काला सागर क्षेत्र में जहाजों, बंदरगाहों और अनाज निर्यात ढांचे पर हो रहे हमलों के कारण रूस और यूक्रेन से गेहूं की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर एशियाई देशों पर पड़ा है, जो अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में गेहूं का आयात करते हैं।
आपूर्ति में अनिश्चितता के बीच एशियाई खरीदार अब ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना जैसे दूसरे प्रमुख निर्यातक देशों का रुख कर रहे हैं। लेकिन वहां से गेहूं खरीदना उन्हें पहले की तुलना में काफी महंगा पड़ रहा है।
5 लाख टन से ज्यादा गेहूं की खरीद
व्यापार क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, हाल की डील में एशियाई खरीदारों ने कम से कम 5 लाख मीट्रिक टन ऑस्ट्रेलियाई और अर्जेंटीना के गेहूं की खरीद की है।
व्यापारियों का कहना है कि इन सौदों का मकसद रूस और यूक्रेन से आने वाली उन गेहूं की खेपों की भरपाई करना है, जिनकी आपूर्ति हमलों और लॉजिस्टिक बाधाओं के कारण प्रभावित हुई है।
इंडोनेशिया समेत कई एशियाई देश घरेलू मांग पूरी करने के लिए आयात पर काफी निर्भर हैं। ऐसे में ब्लैक सी क्षेत्र से सप्लाई बाधित होने पर उन्हें वैकल्पिक स्रोतों से खरीद करनी पड़ रही है।
ऑस्ट्रेलियाई गेहूं 330 डॉलर प्रति टन तक
व्यापारियों के अनुसार, एशियाई खरीदारों ने ऑस्ट्रेलियाई प्रीमियम व्हाइट गेहूं के लिए लागत और माल ढुलाई सहित लगभग 315 से 330 डॉलर प्रति टन तक का भुगतान किया है।
वहीं, अर्जेंटीना के गेहूं के सौदे करीब 310 से 315 डॉलर प्रति टन की कीमत पर हुए हैं।
इसके मुकाबले अगस्त-सितंबर डिलीवरी के लिए ब्लैक सी क्षेत्र के गेहूं की अधिकांश खेपों के सौदे करीब 260 से 280 डॉलर प्रति टन के आसपास हुए थे।
यानी वैकल्पिक स्रोतों से गेहूं खरीदने के लिए एशियाई आयातकों को काफी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।
शिकागो बाजार में गेहूं 35% तक चढ़ा
वैश्विक बाजार में भी इसका असर देखने को मिल रहा है। शिकागो बाजार में गेहूं के बेंचमार्क वायदा भाव जून के अंत से अब तक करीब 35 प्रतिशत बढ़ चुके हैं।
बाजार में इस तेजी के पीछे काला सागर क्षेत्र से गेहूं की संभावित आपूर्ति में कमी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। केवल गेहूं के वायदा बाजार में ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख निर्यातक देशों में भी हाजिर कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
ओडेसा के अनाज टर्मिनल को ड्रोन हमले में नुकसान
अमेरिकी कृषि वस्तु व्यापार समूह ADM के मुताबिक, 31 अगस्त को हुए ड्रोन हमले में यूक्रेन के ब्लैक सी बंदरगाह ओडेसा स्थित उसके UEP अनाज टर्मिनल को नुकसान पहुंचा था।
काला सागर क्षेत्र में बंदरगाहों और मालवाहक जहाजों पर हमलों के कारण अनाज टर्मिनलों का संचालन प्रभावित होने की खबर है। इससे प्रमुख निर्यात सीजन के दौरान गेहूं की कई खेपों की लोडिंग में देरी या रद्दीकरण की स्थिति बनी है।
आगे और बढ़ सकती है कीमतों की चुनौती
रूस और यूक्रेन वैश्विक गेहूं व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में काला सागर क्षेत्र से निर्यात में लंबे समय तक बाधा बनी रहती है तो एशियाई आयातकों को ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और अमेरिका जैसे वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ सकता है।
इसका असर केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीमित नहीं रहेगा। अगर आयात लागत लंबे समय तक ऊंची रहती है, तो एशियाई देशों में गेहूं और उससे जुड़े खाद्य उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
