नई दिल्ली: आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने एक बार फिर बाहरी वित्तीय सहारे की ओर कदम बढ़ाया है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने अमेरिका से करीब 10 अरब डॉलर की ‘Exchange Stabilization Support Facility’ की मांग किए जाने की जानकारी दी है। पाकिस्तान का कहना है कि इसका उद्देश्य पारंपरिक कर्ज लेना नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा की स्थिति मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को सकारात्मक संकेत देना है।
एक मीडिया इंटरव्यू में औरंगजेब ने बताया कि इस संबंध में अमेरिकी वित्त मंत्रालय के साथ बातचीत चल रही है। हालांकि, अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है।
10 अरब डॉलर की सुविधा क्यों चाहिए?
पाकिस्तान सरकार के अनुसार प्रस्तावित सुविधा का मकसद देश की करेंसी और विदेशी मुद्रा स्थिरता को मजबूत करना है। सरकार चाहती है कि इससे अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों में पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति को लेकर भरोसा बढ़े और देश के लिए भविष्य में बाजार से फंड जुटाना आसान हो।
पाकिस्तानी वित्त मंत्री ने इसे सामान्य ऋण सुविधा से अलग बताया है। उनके मुताबिक इसका प्रमुख उद्देश्य बाजार को यह संकेत देना है कि पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा संबंधी दबाव से निपटने के लिए पर्याप्त बैकअप मौजूद है।
2023 में डिफॉल्ट के करीब पहुंचा था पाकिस्तान
पाकिस्तान पिछले कई वर्षों से गंभीर बाहरी भुगतान और विदेशी मुद्रा संकट का सामना करता रहा है। वर्ष 2023 में देश डिफॉल्ट के बेहद करीब पहुंच गया था। उस समय IMF और दूसरे द्विपक्षीय साझेदारों से मिली वित्तीय सहायता के बाद पाकिस्तान तत्काल संकट से बाहर निकल सका।
फिलहाल पाकिस्तान 2024 में स्वीकृत IMF के 7 अरब डॉलर के कार्यक्रम को लागू कर रहा है। इसके साथ ही सरकार विदेशी निवेशकों का भरोसा बहाल करने और अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार में नियमित रूप से वापसी की कोशिश कर रही है।
कर्ज पर निर्भरता कम करने की तैयारी
पाकिस्तान अब अपनी वित्तीय रणनीति में बदलाव करने की बात कह रहा है। सरकार की कोशिश है कि वह लगातार द्विपक्षीय कर्ज की अवधि बढ़ाने और मित्र देशों से मिलने वाली वित्तीय सहायता पर निर्भर रहने के बजाय लंबी अवधि वाली बाजार आधारित फाइनेंसिंग की ओर बढ़े।
इसका सीधा संबंध पाकिस्तान की क्रेडिट प्रोफाइल से भी है। बेहतर क्रेडिट रेटिंग मिलने पर देश के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से कर्ज जुटाना अपेक्षाकृत आसान और कम महंगा हो सकता है।
B+ क्रेडिट रेटिंग हासिल करने का लक्ष्य
पाकिस्तान सरकार अपनी Sovereign Credit Rating में सुधार के लिए अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों के साथ काम कर रही है। वित्त मंत्री के अनुसार सरकार कम से कम B+ रेटिंग हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।
बेहतर रेटिंग से पाकिस्तान को लंबी अवधि के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से फंड जुटाने में मदद मिल सकती है। इससे देश की वित्तीय लागत और निवेशकों के जोखिम आकलन पर भी असर पड़ सकता है।
सितंबर तक अमेरिका से जवाब की उम्मीद
पाकिस्तान को उम्मीद है कि सितंबर के अंत तक अमेरिकी वित्त मंत्रालय या अमेरिकी EXIM Bank की ओर से प्रस्तावित सुविधा को लेकर प्रतिक्रिया मिल सकती है। हालांकि, जब तक औपचारिक समझौता नहीं होता, तब तक 10 अरब डॉलर की राशि को पाकिस्तान को मिलने वाली पक्की आर्थिक सहायता नहीं माना जा सकता।
बड़ी तस्वीर
पाकिस्तान का 10 अरब डॉलर की सुविधा के लिए प्रयास ऐसे समय में सामने आया है जब देश अपनी अर्थव्यवस्था को IMF कार्यक्रम, विदेशी मुद्रा स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोबारा भरोसा कायम करने के बीच संतुलित करने की कोशिश कर रहा है। अगर यह सुविधा आगे बढ़ती है, तो पाकिस्तान इसे अपनी करेंसी स्थिरता और वित्तीय विश्वसनीयता सुधारने के एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर पेश कर सकता है।
