दो दशक के इंतजार के बाद पूरी तरह ऑपरेशनल हुआ डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क, 2,843 किमी का माल ढुलाई रेल नेटवर्क तैयार

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असम (Action Bharat) | भारत के रेल और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए मंगलवार का दिन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) परियोजना को मंजूरी मिलने के करीब दो दशक बाद देश का प्रमुख समर्पित माल ढुलाई रेल नेटवर्क पूरी तरह ऑपरेशनल हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) के बचे हुए तीन सेक्शन राष्ट्र को समर्पित किए।

इन सेक्शनों के चालू होने के साथ पश्चिमी और पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का नेटवर्क एक-दूसरे से जुड़ गया है। इससे देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों, माल ढुलाई केंद्रों और बंदरगाहों के बीच रेल कनेक्टिविटी को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

2,843 किलोमीटर का DFC नेटवर्क

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क की कुल लंबाई करीब 2,843 किलोमीटर है। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से मालगाड़ियों के लिए अलग और तेज रेल मार्ग उपलब्ध कराना है, ताकि यात्री ट्रेनों के साथ साझा रेल पटरियों पर होने वाली भीड़ को कम किया जा सके।

पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का परिचालन पश्चिम बंगाल के सोननगर से पंजाब के लुधियाना तक पहले से हो रहा है। वहीं पश्चिमी कॉरिडोर मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) से उत्तर प्रदेश के दादरी तक जाता है।

दादरी में वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की कनेक्टिविटी ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से होती है। इस कनेक्शन के बाद देश के प्रमुख पूर्वी और पश्चिमी माल ढुलाई मार्ग एक बड़े समर्पित नेटवर्क का हिस्सा बन गए हैं।

326 किलोमीटर के तीन सेक्शन का उद्घाटन

प्रधानमंत्री द्वारा जिन तीन सेक्शनों को राष्ट्र को समर्पित किया गया, उनकी कुल लंबाई 326 किलोमीटर बताई गई है।

इनमें:

  • न्यू सानंद–न्यू मकरपुरा
  • न्यू अंबरगांव–न्यू सफाले
  • न्यू सफाले–न्यू जेएनपीटी

शामिल हैं।

इन तीनों सेक्शनों के निर्माण पर 20,700 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। इनके शुरू होने से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक समर्पित माल ढुलाई रेल कनेक्टिविटी और मजबूत हो गई है।

JNPT से सीधे जुड़ेंगे औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र

DFC नेटवर्क के पूरी तरह चालू होने का सबसे बड़ा फायदा माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है। जवाहरलाल नेहरू पोर्ट से सीधा संपर्क होने के कारण आयात-निर्यात के माल को देश के विभिन्न औद्योगिक और व्यापारिक केंद्रों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

समर्पित फ्रेट कॉरिडोर पर मालगाड़ियों के लिए अलग ट्रैक उपलब्ध होने से माल परिवहन की गति और क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों और बंदरगाहों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आने की उम्मीद है।

मुंबई के मौजूदा रेल नेटवर्क पर मालगाड़ियों का दबाव कम होने से यात्री और माल रेल सेवाओं के संचालन को भी फायदा मिलने की संभावना है।

2014 से पहले काम आगे नहीं बढ़ने का दावा

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने परियोजना को लेकर कहा कि 2014 से पहले इस परियोजना पर कोई भौतिक काम पूरा नहीं हुआ था। उनके मुताबिक, इसके बाद एनडीए सरकार ने लंबे समय से लंबित समस्याओं और विभिन्न सेक्शनों से जुड़े मुद्दों को हल करके परियोजना को आगे बढ़ाया।

DFC परियोजना को देश के बुनियादी ढांचे और माल परिवहन व्यवस्था में बड़े बदलाव वाली परियोजनाओं में शामिल किया जाता है। इसका लक्ष्य मालगाड़ियों के लिए अधिक क्षमता वाला समर्पित रेल नेटवर्क तैयार करना है।

5.2 लाख मालगाड़ियां पहले ही कर चुकी हैं सफर

रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त तक पहले से परिचालन में आ चुके DFC के हिस्सों पर करीब 5.2 लाख मालगाड़ियां अपनी यात्रा पूरी कर चुकी थीं।

इनका औसत परिचालन लगभग 435 मालगाड़ियां प्रतिदिन बताया गया है। अब नेटवर्क के पूरी तरह ऑपरेशनल होने के बाद माल ढुलाई क्षमता और परिचालन में और बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है।

रेलवे के अनुसार, इन परिचालित हिस्सों पर अब तक करीब 658 बिलियन ग्रॉस टन किलोमीटर (GTKM) और 360 बिलियन नेट टन किलोमीटर (NTKM) का संचालन दर्ज किया गया है।

दानकुनी से सोननगर का हिस्सा अलग परियोजना

पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की शुरुआती योजना पश्चिम बंगाल के दानकुनी तक थी। हालांकि दानकुनी से सोननगर के बीच करीब 538 किलोमीटर के हिस्से को DFC परियोजना से अलग कर दिया गया है।

अब रेलवे इस हिस्से पर मल्टी-ट्रैकिंग से संबंधित कार्य कर रहा है। ऐसे में मौजूदा DFC नेटवर्क के साथ इस क्षेत्र में रेल क्षमता बढ़ाने की दिशा में अलग से काम जारी है।

व्यापार और लॉजिस्टिक्स के लिए महत्वपूर्ण कदम

पूरे नेटवर्क के ऑपरेशनल होने से देश में माल ढुलाई के लिए रेल की भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है। बंदरगाहों से औद्योगिक क्षेत्रों तक माल की आवाजाही को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने के साथ लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को भी गति मिल सकती है।

DFC का विस्तार भारत की माल परिवहन व्यवस्था को यात्री रेल नेटवर्क से अलग करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। इससे भविष्य में मालगाड़ियों की संख्या और क्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त गुंजाइश तैयार हो सकती है।

करीब दो दशक के इंतजार के बाद 2,843 किलोमीटर के इस समर्पित माल ढुलाई रेल नेटवर्क का पूरी तरह ऑपरेशनल होना भारतीय रेलवे और देश के लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

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