नई दिल्ली (Action Bharat) | देश की प्रमुख सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ONGC ने भारत के पश्चिमी तट पर अपने समुद्री तेल क्षेत्रों के विकास और आधुनिकीकरण के लिए Larsen & Toubro (L&T) को करीब ₹5,000 करोड़ का बड़ा प्रोजेक्ट सौंपा है। इस परियोजना का उद्देश्य मौजूदा समुद्री परिसंपत्तियों को आधुनिक बनाना और उत्पादन से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।
इस मेगा ऑर्डर के बाद L&T के शेयर में भी कारोबार के दौरान तेजी देखने को मिली। परियोजना में नए समुद्री प्लेटफॉर्म के निर्माण से लेकर समुद्र के भीतर पाइपलाइन और केबल नेटवर्क बिछाने तक कई महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं।
• समुद्र में तीन नए वेल-हेड प्लेटफॉर्म बनेंगे
इस परियोजना के तहत L&T को तीन नए वेल-हेड प्लेटफॉर्म तैयार करने हैं। इसके अलावा एक नया राइजर प्लेटफॉर्म भी विकसित किया जाएगा।
इन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल समुद्री तेल एवं गैस क्षेत्रों में उत्पादन और उससे जुड़े संचालन को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।
• समुद्र के भीतर बिछेगा पाइपलाइन और केबल नेटवर्क
प्रोजेक्ट में समुद्र के भीतर पाइपलाइन और केबल नेटवर्क तैयार करना भी शामिल है। इसके जरिए नए समुद्री ढांचों को मौजूदा उत्पादन एवं प्रसंस्करण व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
इस तरह नई सुविधाओं को पहले से संचालित तेल क्षेत्रों के साथ एकीकृत करने की योजना है।
• पुराने समुद्री ढांचे भी होंगे आधुनिक
L&T केवल नए ढांचे तैयार नहीं करेगी, बल्कि मौजूदा समुद्री परिसंपत्तियों में जरूरी बदलाव और आधुनिकीकरण का काम भी करेगी। इसे ब्राउनफील्ड मॉडिफिकेशन कहा जाता है।
इसका मकसद पुराने लेकिन चालू तेल क्षेत्रों की सुविधाओं को अपग्रेड कर उनकी कार्यक्षमता और उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाना है।
• EPCIC की पूरी जिम्मेदारी L&T के पास
प्रोजेक्ट में L&T को Engineering, Procurement, Construction, Installation and Commissioning (EPCIC) से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है।
यानी कंपनी परियोजना की इंजीनियरिंग और सामग्री खरीद से लेकर निर्माण, समुद्र में इंस्टॉलेशन और अंतिम कमीशनिंग तक की गतिविधियों को संभालेगी।
• पश्चिमी बेसिन में ONGC का बड़ा विस्तार
यह मेगा ऑर्डर ऐसे समय में आया है जब ONGC अपने पश्चिमी बेसिन के समुद्री तेल क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
कंपनी का लक्ष्य पुराने समुद्री क्षेत्रों से उत्पादन को बनाए रखने के साथ-साथ उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर उत्पादन बढ़ाना है।
• L&T के चार दशक के ऑफशोर अनुभव पर भरोसा
L&T को समुद्री ऊर्जा क्षेत्र में लंबे समय से काम करने का अनुभव है। कंपनी फिक्स्ड ऑफशोर प्लेटफॉर्म, सबसी पाइपलाइन, ब्राउनफील्ड अपग्रेड और डीकमीशनिंग जैसे कई जटिल कार्यों में काम कर चुकी है।
इसी अनुभव को देखते हुए ONGC ने समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर के इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए L&T पर भरोसा जताया है।
• शेयर बाजार में भी दिखा असर
₹5,000 करोड़ के इस बड़े ऑर्डर की खबर सामने आने के बाद L&T के शेयर में कारोबार के दौरान तेजी देखी गई। निवेशकों की नजर अब इस बड़े ऑर्डर के कंपनी के कारोबार और भविष्य की ऑर्डर बुक पर पड़ने वाले असर पर है।
• भारत के समुद्री ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अहम कदम
L&T के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, यह परियोजना भारत के ऑफशोर ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए महत्वपूर्ण है। नई सुविधाओं को मौजूदा उत्पादन क्षेत्रों के साथ जोड़ने के लिए उच्च स्तर की इंजीनियरिंग और समुद्री निर्माण क्षमता की जरूरत होगी।
ONGC के इस निवेश से देश के समुद्री तेल क्षेत्रों में पुराने बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और भविष्य के उत्पादन को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
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