नई दिल्ली, Action Bharat। पैकेटबंद खाद्य और पेय पदार्थों में अगर चीनी, नमक या सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा है, तो इसकी जानकारी उपभोक्ताओं को पैकेट के सामने ही स्पष्ट रूप से मिलनी चाहिए। लोकल सर्कल्स के सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों ने ऐसी चेतावनी को प्रमुखता से दिखाने की मांग की है।
सर्वे में 23,516 प्रतिक्रियाएं मिलीं। उपभोक्ताओं ने यह भी कहा कि खाद्य उत्पादों पर चेतावनी व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लंबे समय तक टालने के बजाय जल्द लागू किया जाना चाहिए।
• 80 प्रतिशत उपभोक्ता चाहते हैं कि एक भी चीज ज्यादा हो तो चेतावनी मिले
सर्वे में शामिल लोगों का बड़ा हिस्सा इस बात के पक्ष में रहा कि यदि किसी पैकेटबंद उत्पाद में चीनी, नमक या फैट में से किसी एक की मात्रा भी तय सीमा से अधिक है, तो पैकेट पर इसकी स्पष्ट चेतावनी होनी चाहिए।
उपभोक्ताओं का कहना है कि ऐसी जानकारी केवल तब उपलब्ध नहीं होनी चाहिए, जब एक से अधिक पोषक तत्व निर्धारित सीमा पार कर जाएं।
• 88 प्रतिशत लोगों ने मांगा बड़ा और स्पष्ट चेतावनी लेबल
सर्वे में 88 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि चेतावनी लेबल इतना बड़ा और स्पष्ट होना चाहिए कि उसे पैकेट के सामने से आसानी से पढ़ा जा सके।
यानी उपभोक्ता ऐसी जानकारी चाहते हैं जो छोटी लिखावट या पैकेट के पीछे छिपी न हो, बल्कि खरीदारी के समय तुरंत नजर आए।
• FSSAI के प्रस्ताव में लाल रंग के चेतावनी चिन्ह का प्रावधान
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 28 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग को लेकर एक प्रस्ताव पेश किया था।
प्रस्ताव में अधिक मात्रा होने पर लाल रंग के हेक्सागोनल चेतावनी चिन्ह के जरिए ‘ज्यादा चीनी’, ‘ज्यादा नमक’, ‘ज्यादा फैट’ या ‘बहुत ज्यादा मीठा पेय’ जैसी जानकारी देने का सुझाव है।
• पहले चरण में कम से कम दो चीजें ज्यादा होने पर चेतावनी
प्रस्तावित व्यवस्था को दो चरणों में लागू करने की बात सामने आई है। पहले चरण में उन उत्पादों पर चेतावनी लागू करने का प्रस्ताव है, जिनमें मिलाई गई चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट में से कम से कम दो निर्धारित सीमा से अधिक हों।
कुछ मीठे पेय पदार्थ भी प्रस्तावित चेतावनी व्यवस्था के दायरे में आ सकते हैं।
वहीं, यदि किसी उत्पाद में इन तीन में से केवल एक चीज की मात्रा ज्यादा है, तो उसके लिए दूसरे चरण में चेतावनी लागू करने का प्रस्ताव बताया गया है।
• 53 प्रतिशत लोग कुल मात्रा के आधार पर चेतावनी चाहते हैं
सर्वे में यह भी पूछा गया कि चेतावनी केवल मिलाई गई चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट के आधार पर होनी चाहिए या उत्पाद में मौजूद इनकी कुल मात्रा को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
इस सवाल पर प्रतिक्रिया देने वाले 20,525 लोगों में 53 प्रतिशत ने कहा कि चेतावनी उत्पाद में मौजूद चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट की कुल मात्रा के आधार पर होनी चाहिए।
• 88 प्रतिशत ने छह महीने में नियम लागू करने की मांग की
नए नियमों को लागू करने की समयसीमा पर भी उपभोक्ताओं ने तेजी की मांग की। इस सवाल का जवाब देने वाले 20,068 लोगों में 88 प्रतिशत ने कहा कि नई चेतावनी व्यवस्था को छह महीने के भीतर लागू कर दिया जाना चाहिए।
• उपभोक्ताओं की मांग: खरीदारी से पहले मिले साफ जानकारी
सर्वे का मुख्य संदेश यही है कि उपभोक्ता पैकेटबंद खाद्य पदार्थ खरीदते समय यह आसानी से समझना चाहते हैं कि किसी उत्पाद में चीनी, नमक या फैट की मात्रा कितनी अधिक है।
फ्रंट-ऑफ-पैक पर स्पष्ट चेतावनी होने से उपभोक्ताओं को खरीदारी के समय ही उत्पाद की पोषण संबंधी जानकारी समझने में मदद मिल सकती है।
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