सत्य निकेतन हादसे पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिल्ली हाई कोर्ट से केस ट्रांसफर करने से किया इनकार

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दिल्ली (Action Bharat) | सत्य निकेतन इमारत गिरने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट से केस अपने पास ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले में पहले ही कार्रवाई शुरू हो चुकी है, इसलिए मौजूदा स्थिति में किसी बदलाव की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली हाई कोर्ट अनधिकृत निर्माण के खिलाफ दिए गए निर्देशों के पालन की निगरानी करता रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अहसानद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने गुरुवार को मामले की सुनवाई की। अदालत ने एमिकस क्यूरी और दिल्ली सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों पर विचार करते हुए केस को हाई कोर्ट से ट्रांसफर नहीं करने का फैसला किया।

सत्य निकेतन हादसे में गई 7 लोगों की जान

दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे एक पांच मंजिला इमारत अचानक गिर गई थी। इस इमारत में लड़कों के लिए पेइंग गेस्ट सुविधा संचालित होने की बात सामने आई थी। हादसे में 7 लोगों की मौत हुई, जबकि 12 लोग घायल हुए।

हाई कोर्ट की कार्रवाई जारी रहेगी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि दिल्ली हाई कोर्ट में मामले को लेकर कार्रवाई पहले से चल रही है, इसलिए केस को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की जरूरत नहीं है। शीर्ष अदालत ने संकेत दिया कि हाई कोर्ट समय-समय पर अपने निर्देशों के पालन की निगरानी करता रहेगा।

अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई का दावा

मामले में एमिकस क्यूरी नियुक्त किए गए वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत सिन्हा ने अदालत को बताया कि उनके सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सिविक अथॉरिटीज ने अनधिकृत निर्माण और पीजी आवासों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। उनके अनुसार चार मंजिल से ऊंची इमारतों को गिराने की कार्रवाई भी की जा रही है।

दिल्ली सरकार ने भी ट्रांसफर का विरोध किया

दिल्ली सरकार और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि मामले को दिल्ली हाई कोर्ट से ट्रांसफर न किया जाए। उनका कहना था कि सिविक अथॉरिटीज अब मामले में अधिक फोकस के साथ कार्रवाई कर रही हैं।

8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दी थी ट्रांसफर की संभावना

इससे पहले 8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह कहा गया था कि जरूरत पड़ने पर केस को अपने पास ट्रांसफर किया जा सकता है। लेकिन अब अदालत ने केस को दिल्ली हाई कोर्ट से ट्रांसफर नहीं करने का फैसला किया है। साथ ही अनधिकृत निर्माण के खिलाफ पहले दिए गए निर्देशों के पालन को जारी रखने की बात कही गई है।

मामले में मालिक समेत तीन गिरफ्तार

सत्य निकेतन हादसे के सिलसिले में इमारत के मालिक, उनकी पत्नी और बेटे को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, मामले में MCD के पांच अधिकारियों को निलंबित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

अब निगरानी और कार्रवाई पर नजर

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मामले की आगे की निगरानी दिल्ली हाई कोर्ट में ही जारी रहेगी। हादसे के बाद अनधिकृत निर्माण के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उठाए गए कदमों पर अब हाई कोर्ट की निगरानी महत्वपूर्ण होगी।

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