‘जबरन हिंदी थोपना संविधान पर सीधा हमला’, NCW बैठक विवाद पर बोले केरल कांग्रेस नेता वीडी सतीशन

राजनीति

तिरुवनंतपुरम (Action Bharat) | राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की ओर से हरियाणा के फरीदाबाद में आयोजित एक कार्यशाला में हिंदी के इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कार्यक्रम में शामिल केरल के विधायकों ने हिंदी के कथित अनिवार्य इस्तेमाल और गैर-हिंदी भाषी प्रतिनिधियों के लिए अनुवाद की व्यवस्था नहीं होने पर आपत्ति जताई और कार्यक्रम से वॉकआउट कर दिया।

घटना के दो दिन बाद केरल के कांग्रेस नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्रीय सम्मेलन में जबरन हिंदी थोपना और गैर-हिंदी भाषी राज्यों के प्रतिनिधियों को डराना-धमकाना देश के संवैधानिक समझौते की मूल भावना पर हमला है।

फरीदाबाद की कार्यशाला में हुआ विवाद

दरअसल, राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से फरीदाबाद में कार्यशाला आयोजित की गई थी। इसमें केरल के कुछ विधायक भी शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि वहां मुख्य रूप से केवल हिंदी का इस्तेमाल किया जा रहा था।

केरल के विधायकों की शिकायत थी कि गैर-हिंदी भाषी प्रतिनिधियों के लिए संवाद को समझने में मदद देने के लिए पर्याप्त अनुवाद व्यवस्था भी मौजूद नहीं थी।

अनुवाद की व्यवस्था नहीं होने पर विधायकों ने किया वॉकआउट

स्रोत के अनुसार, कार्यशाला में गैर-हिंदी भाषी लोगों के लिए अनुवाद की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। विधायकों ने अपनी इस मांग और आपत्ति को कार्यक्रम के दौरान उठाया।

जब उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया तो नाराज विधायकों ने कार्यक्रम का बहिष्कार करते हुए वहां से वॉकआउट कर दिया।

वीडी सतीशन ने कहा- सभी भाषाओं का होना चाहिए सम्मान

केरल के नेता वीडी सतीशन ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि देश के सभी राज्यों और भाषाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, भाषा के आधार पर किसी व्यक्ति या राज्य पर कुछ थोपना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।

उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि से आने वाले प्रतिनिधियों को समान सम्मान और संवाद का अवसर देने पर जोर दिया।

‘संवैधानिक समझौते की मूल भावना पर प्रहार’

सतीशन ने कहा कि किसी राष्ट्रीय सम्मेलन में जबरन हिंदी थोपना और गैर-हिंदी भाषी राज्यों के प्रतिनिधियों को डराना-धमकाना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।

उन्होंने इसे देश की भाषाई विविधता और लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ते हुए सभी भाषाओं के सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया।

भाषा का मुद्दा फिर चर्चा में

फरीदाबाद की NCW कार्यशाला में हुए इस विवाद ने देश में भाषा के इस्तेमाल को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर सामने ला दिया है। भारत में अलग-अलग राज्यों की अपनी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में विभिन्न भाषाई समूहों के प्रतिनिधियों के लिए संवाद की उचित व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

इस पूरे मामले में केरल के विधायकों की आपत्ति मुख्य रूप से कार्यक्रम में हिंदी के इस्तेमाल और गैर-हिंदी भाषी प्रतिनिधियों के लिए अनुवाद व्यवस्था से जुड़ी थी।

विवाद के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर

केरल की ओर से इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की बात कही गई है। वहीं, फरीदाबाद की कार्यशाला में विधायकों के वॉकआउट के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।

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