नई दिल्ली (Action Bharat) | भारत और रूस के बीच मजबूत होते रणनीतिक रिश्तों की एक दिलचस्प तस्वीर शुक्रवार को नई दिल्ली में देखने को मिली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत पहुंचे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद उनके साथ एक ही कार में सफर किया। दोनों नेता पुतिन की बेहद सुरक्षित मानी जाने वाली बख्तरबंद लग्जरी लिमोजिन ‘ऑरस सेनाट’ में साथ निकले।
इस अनौपचारिक सफर को कूटनीतिक हलकों में ‘कारप्लोमेसी 4.0’ के रूप में देखा जा रहा है। रूस की यह आधिकारिक कार अपनी सुरक्षा व्यवस्था और लग्जरी डिजाइन के लिए जानी जाती है और इसे अक्सर ‘फोर्ट्रेस ऑन व्हील्स’ यानी ‘पहियों पर किला’ कहा जाता है।
• गले मिलकर किया एक-दूसरे का गर्मजोशी से स्वागत
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नई दिल्ली पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया। इसके बाद दोनों के बीच करीब 45 मिनट तक बैठक हुई।
बैठक के दौरान व्यापार, ऊर्जा और रक्षा समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत और रूस के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से इस मुलाकात को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
• पुतिन की ‘ऑरस सेनाट’ में साथ सफर
बैठक के बाद दोनों नेताओं का एक ही कार में साथ सफर करना इस मुलाकात का सबसे खास दृश्य रहा। दोनों नेता रूस की अत्यधिक सुरक्षित बख्तरबंद लग्जरी लिमोजिन ऑरस सेनाट में साथ निकले।
इस कार को रूसी राष्ट्रपति की आधिकारिक कार के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है। इसकी सुरक्षा को देखते हुए इसे ‘फोर्ट्रेस ऑन व्हील्स’ यानी पहियों पर किला भी कहा जाता है।
दोनों नेताओं का इस तरह एक साथ कार में सफर करना भारत-रूस संबंधों में मौजूद व्यक्तिगत सहजता और करीबी रिश्तों की झलक के तौर पर भी देखा गया।
• पहले भी साथ कार में नजर आ चुके हैं मोदी और पुतिन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए एक साथ कार में सफर करना पहली बार नहीं है। इससे पहले पिछले वर्ष चीन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों नेता पुतिन की इसी ‘ऑरस सेनाट’ कार में साथ सफर करते दिखाई दिए थे।
उस समय भी दोनों नेताओं की एक साथ कार में सफर करते हुए तस्वीरों ने काफी ध्यान खींचा था। अब नई दिल्ली में दोबारा ऐसा दृश्य सामने आने के बाद भारत-रूस संबंधों को लेकर इसकी चर्चा और बढ़ गई है।
• ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले दिल्ली पहुंचे पुतिन
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 11 सदस्यीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले नई दिल्ली पहुंचे। अगले दिन शिखर बैठक प्रस्तावित थी।
भारत में आयोजित इस महत्वपूर्ण बहुपक्षीय बैठक के दौरान विभिन्न वैश्विक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा होनी है। ऐसे समय में पुतिन की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी मुलाकात पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रही।
• रक्षा क्षेत्र में रूस भारत का प्रमुख साझेदार
भारत और रूस के बीच संबंध केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं हैं। रूस लंबे समय से भारत के प्रमुख रणनीतिक साझेदारों में शामिल रहा है। विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच दशकों से सहयोग रहा है और रूस भारत के प्रमुख सैन्य आपूर्तिकर्ताओं में रहा है।
इसके अलावा ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण संबंध हैं। बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच दोनों देश अपने आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर लगातार जोर देते रहे हैं।
• दिसंबर 2025 में भी भारत आए थे पुतिन
राष्ट्रपति पुतिन इससे पहले दिसंबर 2025 में भारत की यात्रा पर आए थे। इसके अलावा इसी महीने की शुरुआत में किर्गिस्तान में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के दौरान भी प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन की मुलाकात हुई थी।
अब नई दिल्ली में दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर वैश्विक नजर बनी हुई है।
• कूटनीति से आगे दिखी व्यक्तिगत सहजता
मोदी और पुतिन का गले मिलना, बैठक के बाद एक ही कार में सफर करना और पहले भी इसी तरह साथ यात्रा करना दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत सहजता की ओर संकेत करता है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नेताओं की ऐसी अनौपचारिक गतिविधियां अक्सर रिश्तों की गर्मजोशी और आपसी विश्वास का प्रतीक मानी जाती हैं।
नई दिल्ली में सामने आई यह तस्वीर इसलिए भी खास रही क्योंकि एक ओर जहां दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत चल रही है, वहीं दूसरी ओर दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत संबंधों की सहज झलक भी देखने को मिली।
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