नई दिल्ली (Action Bharat) | राजधानी दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले कांग्रेस के भीतर ही संगठन की उपयोगिता और भारत के लिए इसके फायदे को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने पिछले कुछ BRICS सम्मेलनों से भारत को मिले ठोस लाभ और परिणामों पर सवाल उठाए हैं। वहीं कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने BRICS को भारत की महत्वपूर्ण कूटनीतिक ताकत बताते हुए इसकी वैश्विक भूमिका और भारत की मेजबानी को बेहद अहम बताया है।
• दिल्ली में होने जा रहा है 18वां BRICS शिखर सम्मेलन
नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन होना है। सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंच चुके हैं। वहीं चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के 12 सितंबर को भारत पहुंचने की जानकारी दी गई है।
BRICS सम्मेलन की मेजबानी ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक, रणनीतिक और कूटनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए इस सम्मेलन की मेजबानी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी भूमिका मजबूत करने के अवसर के तौर पर देखा जा रहा है।
• BRICS के फायदे पर चिदंबरम ने उठाए सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने BRICS की उपयोगिता पर सवाल खड़े किए हैं। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में चिदंबरम ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि पिछले दो-तीन BRICS शिखर सम्मेलनों से कोई ठोस फायदा या ठोस नतीजा सामने आया है।
चिदंबरम का सवाल सीधे तौर पर BRICS बैठकों से निकलने वाले व्यावहारिक परिणामों को लेकर है। उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि केवल बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होने से आगे बढ़कर यह देखना जरूरी है कि भारत को इन बैठकों से वास्तविक आर्थिक, रणनीतिक या कूटनीतिक लाभ क्या मिल रहा है।
• शशि थरूर ने BRICS को बताया भारत की कूटनीतिक ताकत
दूसरी ओर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने BRICS की भूमिका का बचाव करते हुए इसे भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक मंच बताया। थरूर के मुताबिक BRICS ग्लोबल साउथ के देशों को एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराता है।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ में 100 से अधिक देश हैं, जबकि BRICS में शामिल 11 प्रमुख देश विचारों की विविधता और अलग-अलग देशों की व्यापक रेंज का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके अनुसार भारत की अध्यक्षता में इस मंच की मेजबानी का अपना विशेष महत्व है।
• दुनिया की आबादी और ग्लोबल GDP में बड़ी हिस्सेदारी
थरूर ने BRICS देशों की सामूहिक ताकत का उल्लेख करते हुए कहा कि 11 BRICS देश दुनिया की बड़ी आबादी और ग्लोबल GDP के करीब 41 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उनके मुताबिक इस समूह का आकार और वैश्विक आर्थिक प्रभाव अपने आप में इसकी अहमियत को दर्शाता है। इसलिए भारत में आयोजित हो रहे BRICS सम्मेलन को केवल एक सामान्य अंतरराष्ट्रीय बैठक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
• भारत के लिए प्रतिष्ठा का विषय है सम्मेलन की मेजबानी
शशि थरूर ने BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी को भारत के लिए प्रतिष्ठा का विषय बताया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण प्रभाव है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
थरूर के मुताबिक करीब एक दर्जन राष्ट्राध्यक्षों और सरकारों के प्रमुखों की मौजूदगी भी अपने आप में बड़ी बात है। BRICS के सदस्य देशों के अलावा कुछ पर्यवेक्षक देश भी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री स्तर पर प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने इसे भारत की कूटनीतिक रूप से अलग-अलग देशों को एक मंच पर साथ लाने की क्षमता का उदाहरण बताया।
• BRICS को लेकर कांग्रेस में सामने आया मतभेद
BRICS को लेकर चिदंबरम और थरूर के बयानों ने कांग्रेस के भीतर अलग-अलग दृष्टिकोण को सामने ला दिया है। एक तरफ चिदंबरम संगठन से मिलने वाले ठोस परिणामों पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ थरूर इसके रणनीतिक और कूटनीतिक महत्व को रेखांकित कर रहे हैं।
यानी सम्मेलन शुरू होने से पहले ही BRICS की उपयोगिता को लेकर कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं की राय अलग दिखाई दे रही है।
• चिदंबरम के बयान पर बीजेपी का पलटवार
पी. चिदंबरम के बयान के बाद बीजेपी ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। रिपोर्ट के अनुसार बीजेपी ने चिदंबरम की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन पर भारत की प्रगति को लेकर नकारात्मक रवैया रखने का आरोप लगाया।
इस राजनीतिक प्रतिक्रिया के बाद BRICS सम्मेलन को लेकर कूटनीतिक चर्चा के साथ-साथ घरेलू राजनीतिक बहस भी तेज होती दिखाई दे रही है।
• BRICS के सामने साझा सहमति बनाने की चुनौती
शशि थरूर ने BRICS के महत्व की बात करते हुए इसकी चुनौतियों को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि समूह के भीतर विचारों में पूरी तरह एकरूपता नहीं है और वैश्विक मुद्दों पर साझा रुख बनाना आसान नहीं है।
उन्होंने विशेष रूप से संयुक्त घोषणा-पत्र पर सहमति बनाने की चुनौती का उल्लेख किया। उनके अनुसार विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान सर्वसम्मति से संयुक्त घोषणा-पत्र जारी करने के बजाय भारत की ओर से ‘चेयर का घोषणा-पत्र’ जारी किया गया था। अब यह सवाल महत्वपूर्ण है कि क्या शिखर सम्मेलन के दौरान भी इसी तरह की स्थिति सामने आएगी।
• मतभेदों को दूर करना भारतीय कूटनीति के लिए बड़ी परीक्षा
थरूर के अनुसार BRICS के सदस्य देशों के बीच मतभेदों को सुलझाना भारतीय राजनयिकों के लिए बड़ी चुनौती होगी। अलग-अलग देशों के अपने रणनीतिक हित और वैश्विक मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं। ऐसे में भारत की अध्यक्षता में सभी पक्षों को एक साझा मंच पर लाकर सहमति तैयार करना सम्मेलन की बड़ी परीक्षा हो सकती है।
• अब BRICS सम्मेलन के नतीजों पर रहेगी नजर
एक ओर चिदंबरम ने पिछले सम्मेलनों के ठोस परिणामों पर सवाल उठाया है, वहीं थरूर ने BRICS की वैश्विक और कूटनीतिक अहमियत को सामने रखा है। ऐसे में 12-13 सितंबर को होने वाले सम्मेलन के दौरान होने वाली द्विपक्षीय बैठकों, साझा घोषणाओं और प्रमुख फैसलों पर खास नजर रहेगी।
सम्मेलन के बाद सामने आने वाले वास्तविक परिणाम ही यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि BRICS भारत के लिए कितना प्रभावी आर्थिक और कूटनीतिक मंच साबित हो रहा है।
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