नई दिल्ली (Action Bharat)। संसद के मानसून सत्र के सत्रावसान में हो रही देरी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के बावजूद अब तक सत्रावसान नहीं किया गया है और इसके पीछे सरकार की राजनीतिक रणनीति हो सकती है।
कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि सरकार परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने आरोप लगाया कि इसके लिए राजनीतिक दबाव और अन्य तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
• 29 दिन बाद भी नहीं हुआ संसद का सत्रावसान
कांग्रेस के मुताबिक, मानसून सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के 29 दिन बाद भी संसद का औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ है। पार्टी ने इसकी तुलना वर्ष 2015 के मानसून सत्र से करते हुए कहा कि उस समय संसद के स्थगन और सत्रावसान के बीच 28 दिनों का अंतर रहा था।
कांग्रेस का कहना है कि इस बार यह अंतर पहले ही 29 दिन हो चुका है और हर गुजरते दिन के साथ यह अवधि बढ़ रही है। पार्टी ने दावा किया कि सामान्य तौर पर संसद के स्थगन और सत्रावसान के बीच इतना लंबा अंतर नहीं होता और आमतौर पर यह अवधि तीन-चार दिनों के आसपास रहती है।
• परिसीमन बिल को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सत्रावसान में देरी को केवल संसदीय प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जा सकता। उनके मुताबिक, सरकार इस अवधि का इस्तेमाल राजनीतिक संख्या बल जुटाने के लिए कर रही है।
कांग्रेस का दावा है कि परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। पार्टी का आरोप है कि सरकार के पास फिलहाल ऐसा बहुमत नहीं है और इसी वजह से विपक्ष तथा अन्य दलों के सांसदों का समर्थन हासिल करने की कोशिश की जा रही है।
• सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाने पर भी कांग्रेस नाराज
कांग्रेस ने परिसीमन विधेयक को लेकर सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाए जाने पर भी सवाल उठाया है। पार्टी का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दे पर सरकार को सभी राजनीतिक दलों के साथ व्यापक चर्चा करनी चाहिए।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार संसद के सत्रावसान को भी अपनी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बना रही है और इसे एक तरह के “माइंड गेम” के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
• जयराम रमेश ने 2015 के रिकॉर्ड का किया जिक्र
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद का सत्र समाप्त होने के बाद सत्रावसान में हो रही देरी ने 2015 में बने रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है।
कांग्रेस नेता के मुताबिक, 2015 के मानसून सत्र में स्थगन और सत्रावसान के बीच 28 दिनों का अंतर था, जबकि इस बार यह अंतर 29 दिन तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि फिलहाल जल्द सत्रावसान होने की कोई स्पष्ट संभावना भी दिखाई नहीं दे रही है।
• तीन राजनीतिक दलों को लेकर कांग्रेस का बड़ा आरोप
कांग्रेस ने अपने आरोपों को आगे बढ़ाते हुए दावा किया कि 17 अप्रैल को संबंधित विधेयक के खिलाफ मतदान करने वाली तीन पार्टियों में से एक में भाजपा पहले ही विभाजन कराने में सफल हो चुकी है।
इसके अलावा कांग्रेस का आरोप है कि विधेयक के खिलाफ मतदान करने वाले अन्य नेताओं या दलों का रुख बदलने के लिए धमकी, दबाव और प्रलोभन जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, ये कांग्रेस द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं और उपलब्ध स्रोत सामग्री में इनके समर्थन में अलग से कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।
• दो-तिहाई बहुमत जुटाने की ‘साजिश’ का आरोप
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है। कांग्रेस ने इस कथित प्रयास को लोकतांत्रिक और संसदीय प्रक्रिया के लिहाज से गंभीर मुद्दा बताया है।
हालांकि, उपलब्ध सामग्री में केंद्र सरकार या भाजपा की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है। इसलिए कांग्रेस के आरोपों को फिलहाल विपक्ष के राजनीतिक दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
• सत्रावसान में देरी से क्यों बढ़ी राजनीतिक हलचल
संसद का सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद भी औपचारिक सत्रावसान नहीं होने को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है। पार्टी का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में स्थगन और सत्रावसान के बीच बहुत अधिक अंतर नहीं होता, जबकि इस बार यह अवधि लगातार बढ़ रही है।
कांग्रेस के मुताबिक, इस देरी का संबंध परिसीमन विधेयक को लेकर संभावित राजनीतिक गतिविधियों से हो सकता है। अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और संसद का औपचारिक सत्रावसान कब किया जाता है।
