चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के उम्मीदवार अंकित बिढान ने प्रधान पद पर जीत दर्ज की है। उन्होंने आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई ASAP के उम्मीदवार आदिल बराड़ को हराया। जीत के बाद अंकित ने इसे अपनी नहीं बल्कि जेन-जी की जीत बताया।
अंकित बिढान हरियाणा के जींद जिले के पेगां गांव के रहने वाले हैं। जींद को हरियाणा की राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है और इसी क्षेत्र से निकलकर उन्होंने चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी में अपनी राजनीतिक पहचान बनाई।
जींद से चंडीगढ़ तक का सफर
अंकित ने जींद के डीएवी स्कूल से 12वीं तक पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ का रुख किया और एलएलबी तथा एलएलएम की पढ़ाई पूरी की। फिलहाल वह पीएचडी स्कॉलर हैं और पिछले करीब छह वर्षों से पंजाब यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए हैं।
यूनिवर्सिटी में रहते हुए वह एबीवीपी से जुड़े और छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। विद्यार्थियों के बीच लगातार सक्रिय रहने के बाद इस चुनाव में उन्हें संगठन ने प्रधान पद का उम्मीदवार बनाया और उन्होंने जीत हासिल की।
परिवार की भी राजनीतिक-सामाजिक पृष्ठभूमि
अंकित के पिता जींद शुगर मिल में निदेशक रह चुके हैं। फिलहाल वह अपने गांव में पाइप की फैक्ट्री चलाते हैं। उनकी मां गृहिणी हैं। उनके बड़े भाई सुमित शिक्षा विभाग में क्लर्क हैं, जबकि बड़ी बहन नीरू शादीशुदा हैं।
अंकित बोले- मेरी नहीं, जेन-जी की जीत
जीत के बाद अंकित बिढान ने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं बल्कि जेन-जी की जीत है। उन्होंने दावा किया कि परिणाम से एबीवीपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जेन-जी के बीच स्वीकार्यता का संकेत मिलता है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद पहली बार किसी यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव हुए हैं, इसलिए पंजाब यूनिवर्सिटी का चुनाव विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण रहा।
अंकित ने कहा कि विद्यार्थियों ने उनके पुराने काम और सक्रियता को देखते हुए भरोसा जताया है। अब उनकी प्राथमिकता चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों को पूरा करना होगी।
जीत के साथ नामांकन और पात्रता पर विवाद
हालांकि चुनाव परिणाम के साथ ही अंकित बिढान की पात्रता और नामांकन को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। आम आदमी पार्टी के विधायक और पीयू चुनाव प्रभारी अमृतपाल सिंह सुखानंद ने नामांकन में कथित खामियों का आरोप लगाते हुए हाई कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।
सुखानंद का दावा है कि अंकित के नामांकन में छह खामियां सामने आई हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अंकित को नकल के मामले में पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से दो साल के लिए प्रतिबंधित किया गया था।
इसके अलावा सेक्टर-11 में मारपीट से जुड़े एक मामले का भी उन्होंने दावा किया है।
डिग्री की मान्यता पर भी सवाल
आप नेता ने अंकित की साबरमती यूनिवर्सिटी की डिग्री की मान्यता की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि चुनाव नियमों के अनुसार अंकित प्रत्याशी बनने के योग्य नहीं थे तो उनका नामांकन स्वीकार कैसे किया गया।
इन आरोपों को लेकर हाई कोर्ट जाने की चेतावनी दी गई है। अब मामला केवल छात्रसंघ चुनाव के नतीजे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अंकित की पात्रता और नामांकन प्रक्रिया भी विवाद का विषय बन गई है।
निष्कर्ष: अंकित बिढान ने पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के प्रधान पद पर जीत हासिल कर छात्र राजनीति में बड़ी उपलब्धि दर्ज की है, लेकिन उनकी जीत के साथ उठे पात्रता और नामांकन से जुड़े सवाल आगे कानूनी विवाद का रूप ले सकते हैं।
