पटना (Action Bharat)। राजधानी पटना से सटे मनेर प्रखंड में करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से नवनिर्मित पुल के एप्रोच पथ में उद्घाटन से पहले ही बड़ी और चौड़ी दरारें पड़ने का मामला सामने आया है। सड़क में लगातार बढ़ रही दरारों को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
मामला मनेर प्रखंड की किता चौहत्तर पूर्वी पंचायत के छिहत्तर गांव में सोन सोता पर बनाए गए पुल से जुड़ा है। ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से बनाए गए इस पुल को दोनों ओर की मुख्य सड़कों से जोड़ने के लिए एप्रोच पथ का निर्माण किया गया है।
• उद्घाटन से पहले एप्रोच पथ में आई बड़ी दरारें
नवनिर्मित पुल के एप्रोच पथ में कई स्थानों पर अचानक गहरी और चौड़ी दरारें दिखाई देने लगीं। ग्रामीणों के मुताबिक, समय के साथ इन दरारों का आकार बढ़ता जा रहा है।
एप्रोच पथ पर इस तरह दरारें आने से स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। खासकर बाइक और साइकिल से गुजरने वाले लोगों के लिए दुर्घटना का खतरा बताया जा रहा है। रात के समय सड़क पर बनी दरारें स्पष्ट दिखाई नहीं देने के कारण स्थिति और जोखिमपूर्ण हो सकती है।
• ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर उठाए सवाल
दरारों को लेकर ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में अनियमितता और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि पुल और एप्रोच पथ का निर्माण गुणवत्तापूर्ण तरीके से हुआ होता तो उद्घाटन से पहले ही सड़क की स्थिति ऐसी नहीं होती।
ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की जांच कराने की मांग की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि एप्रोच पथ में दरार आने की वास्तविक वजह क्या है और निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन हुआ था या नहीं।
• मरम्मत करने पहुंचे विभागीय कर्मियों का विरोध
दरारों की जानकारी मिलने के बाद विभागीय अधिकारी और कर्मचारी एप्रोच पथ की मरम्मत के लिए मौके पर पहुंचे। लेकिन ग्रामीणों ने मरम्मत कार्य का विरोध कर दिया और विभागीय कर्मियों को वहां से जाने के लिए मजबूर कर दिया।
ग्रामीणों का आरोप था कि केवल ऊपर से दरारों को भरकर या मरम्मत करके मामले को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना था कि यदि सड़क के नीचे की मिट्टी और उसकी संरचना की मजबूती की जांच किए बिना सिर्फ ऊपरी सतह की मरम्मत की गई तो समस्या दोबारा सामने आ सकती है।
• ग्रामीणों ने मांगी जमीन के नीचे की संरचना की जांच
ग्रामीणों ने एप्रोच पथ की मजबूती की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल सड़क की ऊपरी सतह को ठीक करने के बजाय यह भी जांचना जरूरी है कि नीचे की मिट्टी और निर्माण संरचना कितनी मजबूत है।
ग्रामीणों ने जरूरत पड़ने पर एप्रोच पथ की दोबारा ढलाई कराने और दोनों तरफ बोल्डर पिचिंग कराने की मांग की है। उनका मानना है कि इससे मिट्टी के कटाव और सड़क के धंसने की समस्या को रोकने में मदद मिल सकती है।
• ग्रामीणों को दोबारा दरारें आने की आशंका
ग्रामीण संतोष कुमार, बिनोद राय, निरंतर कुमार नारायण समेत अन्य लोगों ने निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि सिर्फ ऊपरी हिस्से में मरम्मत करके खानापूर्ति की गई तो कुछ समय बाद फिर से दरारें उभर सकती हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, ऐसी स्थिति में सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाएगा। इसलिए वे एप्रोच पथ की वास्तविक स्थिति की जांच और आवश्यकतानुसार मजबूत निर्माण की मांग कर रहे हैं।
• विभाग ने बाढ़ के पानी के बाद मिट्टी के सेटलमेंट को बताया कारण
वहीं, ग्रामीणों के आरोपों के बीच ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से अलग वजह बताई गई है। दानापुर के कार्यपालक अभियंता अरुण कुमार प्रभाकर ने स्वीकार किया कि एप्रोच पथ में दरारें आई हैं।
उन्होंने बताया कि बाढ़ का पानी निकलने के बाद मिट्टी के सेटलमेंट के कारण इस तरह की समस्या उत्पन्न हुई है। उनके अनुसार फिलहाल एप्रोच पथ की मरम्मत कराई जा रही है।
• बोल्डर पिचिंग पर विभाग ने क्या कहा?
बोल्डर पिचिंग की ग्रामीणों की मांग पर कार्यपालक अभियंता ने कहा कि फिलहाल मरम्मत का काम कराया जाएगा। उनके अनुसार बोल्डर पिचिंग के लिए विभागीय आदेश मिलने के बाद इसे भी कराया जा सकता है।
• उद्घाटन से पहले सामने आई खामी ने उठाए सवाल
करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से बने पुल के एप्रोच पथ में उद्घाटन से पहले ही दरारें सामने आने से निर्माण की गुणवत्ता और सड़क की मजबूती को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
एक तरफ ग्रामीण इसे निर्माण की गुणवत्ता से जोड़कर जांच और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं, वहीं विभाग इसे बाढ़ के पानी के बाद मिट्टी के सेटलमेंट से जुड़ी समस्या बता रहा है। अब महत्वपूर्ण यह होगा कि एप्रोच पथ की तकनीकी जांच में दरारों की वास्तविक वजह क्या सामने आती है और क्या मरम्मत के बाद सड़क लंबे समय तक सुरक्षित एवं मजबूत रह पाती है।
