Action Bharat | बाहरी दिल्ली: पीतमपुरा के एनपी ब्लॉक में जर्जर इमारतों को लेकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। निगम ने 12 सितंबर 2026 को चार इमारतों पर नोटिस चस्पा कर करीब 30 फ्लैटों को 48 घंटे के भीतर खाली करने का आदेश दिया है। अचानक घर खाली करने के निर्देश से यहां रहने वाले परिवारों की चिंता बढ़ गई है।
• सुरक्षा कारणों से खाली कराने का आदेश: प्रशासन ने इमारतों की जर्जर स्थिति को देखते हुए निवासियों को 48 घंटे के भीतर फ्लैट खाली करने को कहा है। आदेश का पालन नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
• 1988 तक थी सरकारी डिस्पेंसरी: जानकारी के मुताबिक इन इमारतों के भूतल पर वर्ष 1988 तक सरकारी डिस्पेंसरी संचालित होती थी। इसके बाद रखरखाव के अभाव में भूतल की स्थिति लगातार खराब होती चली गई।
• छत को संभालने के लिए लगाए गए लोहे के जैक: इमारत की सुरक्षा को लेकर छत पर लोहे के कई जैक लगाए जाने की बात सामने आई है। जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चार इमारतों पर नोटिस लगाया गया।
• तीसरी-चौथी मंजिल पर निर्माण पर सवाल: इन इमारतों में प्रत्येक मंजिल पर आठ फ्लैट बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दो इमारतों की तीसरी और चौथी मंजिल तथा एक अन्य इमारत की तीसरी मंजिल पर फ्लैटों का निर्माण किया गया है।
• अवैध निर्माण की अनुमति किसने दी? निवासियों ने सवाल उठाया है कि यदि इमारत नीचे से जर्जर हो रही थी तो ऊपर की मंजिलों पर निर्माण कैसे हुआ। लोगों का दावा है कि दो मंजिल से ऊपर निर्माण की अनुमति नहीं थी, फिर तीसरी और चौथी मंजिल पर निर्माण किसकी अनुमति से हुआ?
• मेहनत की कमाई से खरीदे फ्लैट: निवासियों का कहना है कि उन्होंने अपनी वर्षों की मेहनत की कमाई से ये फ्लैट खरीदे हैं। अब अचानक खाली करने के आदेश के कारण उन्हें आर्थिक और आवासीय संकट का सामना करना पड़ रहा है।
• रखरखाव की कमी पर सवाल: स्थानीय लोगों का आरोप है कि डिस्पेंसरी बंद होने के बाद इमारतों की उचित मरम्मत नहीं हुई। उनका कहना है कि लंबे समय तक रखरखाव नहीं होने का खामियाजा अब फ्लैटों में रहने वाले परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।
• छह लोगों के परिवार को चिंता: एनपी ब्लॉक के 130बी निवासी रूपल ने बताया कि वह करीब 10 वर्षों से यहां रह रहे हैं और उनके परिवार में छह लोग हैं। उनका सवाल है कि महज 48 घंटे में वे अपने परिवार को लेकर कहां जाएंगे।
• तीन अन्य इमारतों को लेकर भी सवाल: रूपल के अनुसार, एक इमारत को जर्जर घोषित किए जाने के बाद आसपास की तीन अन्य इमारतों के निवासियों को भी घर खाली करने का आदेश दिया गया है। उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि इसका नुकसान अब स्थानीय निवासियों को उठाना पड़ रहा है।
बड़ा सवाल
पीतमपुरा की इन इमारतों को लेकर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा के साथ-साथ रखरखाव और कथित अवैध निर्माण की जिम्मेदारी का है। निवासी अचानक बेघर होने की स्थिति को लेकर चिंतित हैं और प्रशासन से स्पष्ट समाधान की मांग कर रहे हैं।
