नई दिल्ली। गणेश उत्सव के दौरान घर-घर में भगवान गणेश की स्थापना की जा रही है। पूजा और सजावट के साथ वास्तु से जुड़ी कुछ मान्यताओं का भी ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणपति की स्थापना वाले स्थान को साफ-सुथरा और सकारात्मक बनाए रखना जरूरी माना जाता है।
गणेश जी की पूजा में तुलसी के पत्ते अर्पित नहीं करने की मान्यता है। पूजा स्थल या भगवान गणेश को लगाए जाने वाले भोग में तुलसी का इस्तेमाल वर्जित माना गया है।
इसी तरह पूजा स्थल के आसपास जूते-चप्पल और चमड़े से बनी वस्तुएं जैसे पर्स या बेल्ट नहीं रखनी चाहिए। मान्यता के अनुसार मंदिर को घर का पवित्र स्थान माना जाता है और वहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
गणपति की प्रतिमा को लेकर भी विशेष मान्यता बताई गई है। स्रोत के अनुसार, घर में स्थापना के लिए मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा को शुभ माना जाता है, जबकि प्लास्टिक या अन्य सामग्री से बनी प्रतिमा स्थापित न करने की सलाह दी गई है।
पूजा स्थल के आसपास कबाड़, टूटा हुआ सामान या झाड़ू रखने से भी बचने की सलाह दी गई है। स्थापना वाली जगह को खुला, साफ और व्यवस्थित रखने की बात कही गई है।
इसके अलावा गणपति के आसपास ऐसी तस्वीरें या पेंटिंग लगाने से बचने की सलाह दी गई है, जिनमें गुस्सा, डर, लड़ाई-झगड़ा या उदासी दिखाई देती हो। इसके बजाय सकारात्मक वातावरण देने वाली तस्वीरें लगाने की बात कही गई है।
घर में गणपति स्थापना को लेकर कुछ अन्य वास्तु मान्यताओं में बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणपति को शुभ बताया गया है। गणेश जी के सामने दीपक को दक्षिण-पूर्व यानी आग्नेय कोण में रखने और रोज ताजे लाल या पीले फूल अर्पित करने की सलाह भी दी गई है।
नोट: ये बातें धार्मिक और वास्तु संबंधी मान्यताओं पर आधारित हैं; इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नियम नहीं माना जाना चाहिए।
