नई दिल्ली | भारत की मेजबानी में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान विदेशी मेहमानों के सम्मान में आयोजित गाला डिनर को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। डिनर में विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों की गैरमौजूदगी के बाद सवाल उठने लगे कि क्या उन्हें इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया था या नहीं। हालांकि, आधिकारिक सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, विपक्षी मुख्यमंत्रियों को भी बाकायदा निमंत्रण भेजा गया था।
विपक्षी मुख्यमंत्रियों को भी भेजा गया था न्योता
गाला डिनर में मुख्य रूप से भाजपा और उसके सहयोगी दलों से जुड़े मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी दिखाई दी। इसके बाद राजनीतिक स्तर पर यह चर्चा शुरू हुई कि विपक्षी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को शायद निमंत्रण नहीं दिया गया था।
हालांकि, रिपोर्ट में आधिकारिक सूत्रों के हवाले से इन दावों को खारिज किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों को भी इस महत्वपूर्ण राजनयिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजा गया था, लेकिन कुछ मुख्यमंत्री इसमें शामिल नहीं हुए।
तेलंगाना के CM ने पहले स्वीकार किया था निमंत्रण
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आयोजित रात्रिभोज का निमंत्रण मिला था। जानकारी के मुताबिक, 12 सितंबर को डिनर से एक दिन पहले रेवंत रेड्डी ने निमंत्रण स्वीकार भी कर लिया था।
लेकिन बाद में मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सरकार को बताया गया कि रेवंत रेड्डी अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे। इस तरह निमंत्रण स्वीकार करने के बावजूद तेलंगाना के मुख्यमंत्री गाला डिनर में मौजूद नहीं रहे।
केरल और कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी नहीं पहुंचे
तेलंगाना के अलावा केरल और कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों की गैरमौजूदगी भी चर्चा में रही। रिपोर्ट के अनुसार, केरल के वी. डी. सतीसन और कर्नाटक के डी. के. शिवकुमार भी इस रात्रिभोज में शामिल नहीं हुए।
वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के विदेश दौरे पर होने की जानकारी सामने आई है। इसलिए उनकी गैरमौजूदगी को अन्य मुख्यमंत्रियों की अनुपस्थिति से अलग परिस्थिति के रूप में देखा गया।
BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में डिनर का महत्व
BRICS शिखर सम्मेलन भारत की मेजबानी में आयोजित एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम था। ऐसे कार्यक्रमों के दौरान विदेशी नेताओं और प्रतिनिधियों के सम्मान में आयोजित रात्रिभोज को कूटनीतिक और औपचारिक कार्यक्रमों का हिस्सा माना जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित करने का निर्णय भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान देश के अलग-अलग शहरों में समूह से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित करने की सरकार की नीति के अनुरूप था। आधिकारिक सूत्रों ने विपक्षी मुख्यमंत्रियों के कार्यक्रम में शामिल नहीं होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
पहले भी सामने आता रहा है राजनीतिक विवाद
राजकीय कार्यक्रमों और निमंत्रण को लेकर केंद्र सरकार तथा विपक्ष के बीच पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि भाजपा पहले राहुल गांधी पर निमंत्रण मिलने के बावजूद महत्वपूर्ण राजकीय कार्यक्रमों में शामिल नहीं होने का आरोप लगा चुकी है।
दूसरी ओर, विपक्षी पार्टी ने सरकार पर राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को एक राजकीय भोज में आमंत्रित नहीं करने को लेकर सवाल उठाए हैं।
सवाल यही—निमंत्रण के बावजूद दूरी क्यों?
इस पूरे मामले में उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी मुख्यमंत्रियों को BRICS गाला डिनर के लिए निमंत्रण भेजे जाने की बात आधिकारिक सूत्रों ने कही थी। इसके बावजूद तेलंगाना, केरल और कर्नाटक के संबंधित मुख्यमंत्री कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री कार्यालय ने अपनी गैरमौजूदगी के लिए “अपरिहार्य परिस्थितियों” का हवाला दिया। वहीं, उपलब्ध स्रोत में केरल और कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों की गैरमौजूदगी का कोई विस्तृत कारण नहीं दिया गया है। इसलिए उनकी अनुपस्थिति के पीछे किसी राजनीतिक वजह को निश्चित तथ्य के तौर पर कहना फिलहाल उचित नहीं होगा।
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